जी7 वित्त मंत्रियों की बैठक में भारत और ऑस्ट्रेलिया को आमंत्रण: निष्क्रिय खनिज आपूर्ति चैनलों पर वैश्विक रणनीति
संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत और ऑस्ट्रेलिया को वाशिंगटन में होने वाली जी7 वित्त मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है, जिसका मुख्य फोकस महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति चैनलों की सुरक्षा है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब विकसित अर्थव्यवस्थाओं के लिए रक्षा, प्रौद्योगिकी और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में उपयोग होने वाले खनिजों में चीन पर भारी निर्भरता चिंताजनक बनी हुई है।
यह बैठक जी7 देशों के साथ चुनिंदा साझेदार देशों को एक मंच पर लाकर नीतिगत सामंजस्य और सामूहिक कार्रवाई को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखती है, ताकि आपूर्ति बाधाओं को कम किया जा सके और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में विविधता लाई जा सके।
प्रमुख प्रस्ताव: समर्पित ‘क्रिटिकल माइनरल डायलॉग’
यूएस ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने बताया कि यह बैठक जी7 वित्त मंत्रियों के साथ-साथ आमंत्रित भागीदार देशों को भी जोड़कर “महत्वपूर्ण खनिजों पर एक समर्पित चर्चा” का मंच प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि यह विषय पिछले साल जी7 नेताओं की शिखर बैठक में भी उठाया गया था और दिसंबर में वित्त मंत्रियों ने इस पर एक वर्चुअल बैठक भी की थी।
इस बार इन-परसन वार्ता का प्रमुख उद्देश्य प्रतिबद्धताओं को वास्तविक नीतिगत कार्यवाही में बदलना है। बेसेंट के अनुसार वित्त मंत्री स्तर पर चल रही यह बातचीत नीति-निर्माता देशों को एक साझा रणनीति पर काम करने का अवसर देती है।
भारत और ऑस्ट्रेलिया की रणनीतिक भूमिका
भारत को बैठक में आमंत्रित किया गया है, हालांकि तत्काल पुष्टि नहीं मिली है कि नई दिल्ली ने भागीदारी आधिकारिक तौर पर सुनिश्चित की है या नहीं। भारत की उपस्थिति महत्वपूर्ण इसलिए भी है क्योंकि वह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविध स्रोतों का समर्थन करता है और стратегिक खनिजों के मामले में बड़ी मांग वाला देश है।
वहीं ऑस्ट्रेलिया की भूमिका विशेष रूप से अहम मानी जा रही है। ऑस्ट्रेलिया के पास खनिज संसाधनों का बड़ा भंडार है और वह पश्चिमी देशों के साथ खनिज आपूर्ति विविधीकरण के प्रयासों में सक्रिय रूप से शामिल है। अक्टूबर में ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के बीच एक बड़े 8.5 अरब डॉलर के परियोजना पाइपलाइन समझौते पर सहमती हुई थी, जिसमें दुर्लभ पृथ्वी तत्वों और लिथियम के लिए एक रणनीतिक भंडार का प्रस्ताव भी शामिल है। इस पहल में यूरोप, जापान, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर का भी रूचि दिखाई दी है।
चीन का वर्चस्व और बढ़ती भू-राजनीतिक चुनौतियाँ
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार चीन तार, लिथियम, कोबाल्ट, ग्रेफाइट और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों की वैश्विक रिफाइनिंग में 47% से 87% तक की हिस्सेदारी रखता है। ये सभी सामग्री सेमीकंडक्टर, बैटरी, नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियाँ और सैन्य तकनीक के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
हाल में चीन द्वारा दुर्लभ पृथ्वी तत्वों और मैगनेटों पर निर्यात प्रतिबंधों की रिपोर्ट्स ने आपूर्ति जोखिम के प्रति चिंताओं को और बढ़ा दिया है। इससे स्पष्ट होता है कि चीन पर एकतरफा निर्भरता को कम करने के लिए पश्चिमी देशों को आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाने की आवश्यकता है।
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर प्रभाव
यह बैठक पिछले साल जी7 देशों द्वारा अपनाए गए खनिज आपूर्ति सुरक्षा और आर्थिक लचीलेपन पर सहमति के अनुरूप है। चीन द्वारा निर्यात नियंत्रणों को कड़ा करने के बाद, भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के आमंत्रण से यह दिखाता है कि एक व्यापक गठबंधन बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
इन वार्ताओं के परिणाम भविष्य में निवेश, खनिजों का भंडारण, वैकल्पिक स्रोतों की पहचान एवं साझेदार देशों के बीच सहयोग को प्रभावित करेंगे। इससे वैश्विक ऊर्जा संक्रमण और रक्षा क्षमताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई श्रृंखला सुरक्षित और विविध बनेगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- जी7 में अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, जापान, फ्रांस, जर्मनी, इटली और कनाडा शामिल हैं, साथ ही यूरोपीय संघ भी सदस्य है।
- महत्वपूर्ण खनिज वे खनिज हैं जो स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उपकरणों के निर्माण में उपयोग होते हैं।
- चीन वैश्विक खनिज रिफाइनिंग में प्रमुख भूमिका निभाता है, खासकर दुर्लभ पृथ्वी तत्वों और बैटरी सामग्री में वर्चस्व रखता है।
- आपूर्ति चैनलों में विविधता लाना आज की वैश्विक भू-राजनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल है।
इस प्रकार, जी7 की यह बैठक वैश्विक साझेदारी और रणनीतिक संसाधन सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।