जीसैट-1A (EOS-05) मिशन: भारत की जियो-इमेजिंग क्षमताओं की बहाली की ओर इसरो का अहम कदम
चार वर्षों से अधिक समय बाद, भारत का जियो-इमेजिंग कार्यक्रम फिर से गति पकड़ने जा रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अब जीसैट-1A, जिसे EOS-05 भी कहा जाता है, के प्रक्षेपण की तैयारी में है। यह उपग्रह वर्ष 2021 में असफल रहे EOS-03 (Gisat-1) मिशन का प्रतिस्थापन है और भारत की रीयल-टाइम पृथ्वी अवलोकन क्षमता को बहाल करने की दिशा में एक निर्णायक प्रयास है।
जीसैट कार्यक्रम की पृष्ठभूमि
12 अगस्त 2021 को GSLV-F10 मिशन में क्रायोजेनिक ऊपरी चरण में गड़बड़ी के कारण Gisat-1 (EOS-03) को कक्षा में स्थापित नहीं किया जा सका। इस विफलता से पहले भी तकनीकी कारणों से मिशन दो बार स्थगित किया गया था। इसके बाद इसरो ने डिज़ाइन की गहन समीक्षा, परीक्षण और सत्यापन प्रक्रियाएँ अपनाईं, जिससे Gisat-1A मिशन की विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके।
क्षमताएँ और रणनीतिक महत्त्व
2.2 टन वर्ग का जीसैट-1A उपग्रह एक भूस्थैतिक कक्षा (geostationary orbit) से लगभग रीयल-टाइम और बार-बार इमेजिंग की क्षमता रखता है। यह उपग्रह मुख्यतः नागरिक उपयोग हेतु डिज़ाइन किया गया है, लेकिन इसका रणनीतिक महत्त्व भी अत्यधिक है, क्योंकि यह भारतीय उपमहाद्वीप की क्लाउड-फ्री और ऑल-वेदर निगरानी को संभव बनाता है।
इसके प्रमुख अनुप्रयोग:
- कृषि, वन्य क्षेत्र और खनिज अन्वेषण
- आपदा प्रबंधन और महासागर विज्ञान
- हिमखंडों और बर्फ के अध्ययन
- क्लाउड प्रोपरटी विश्लेषण
- सैन्य और रणनीतिक योजना में सहायता
प्रक्षेपण की तैयारी और संभावित समयसीमा
यूआर राव सैटेलाइट केंद्र (बेंगलुरु) में उपग्रह ने अपने प्रमुख परीक्षण पूरे कर लिए हैं और अब इसे श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र भेजने की अंतिम स्वीकृति का इंतजार है। इसरो अध्यक्ष वी. नारायणन ने पुष्टि की है कि अंतिम समीक्षा प्रक्रिया जारी है।
GSLV-F17 मिशन के लिए NOTAM (Notice to Airmen) जारी किया जा चुका है और 20 फरवरी से 5 मार्च 2026 के बीच प्रक्षेपण की संभावना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- Gisat-1A को EOS-05 के नाम से भी जाना जाता है; यह EOS-03 (Gisat-1) की विफलता का स्थान लेता है।
- यह उपग्रह GSLV-F17 रॉकेट द्वारा प्रक्षेपित किया जाएगा।
- Gisat श्रृंखला उपग्रह भूस्थैतिक कक्षा से रीयल-टाइम जियो-इमेजिंग प्रदान करते हैं।
- GSLV-F10 की विफलता 2021 में क्रायोजेनिक ऊपरी चरण की गड़बड़ी के कारण हुई थी।
हालिया विफलताओं से सीखे गए सबक
इसरो की सतर्कता हाल ही में हुई दो PSLV मिशनों की विफलता के कारण और बढ़ गई है, जिनमें EOS-09 (RISAT-1B) और DRDO का Anvesha (EOS-N1) उपग्रह खो दिया गया। हालांकि, GSLV रॉकेट ने 2021 के बाद से चार सफल प्रक्षेपण किए हैं, जिनमें NISAR (जुलाई 2025) भी शामिल है।
इस संदर्भ में Gisat-1A मिशन केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत के भारी रॉकेट लॉन्च कार्यक्रम और पृथ्वी अवलोकन की दीर्घकालिक रणनीति में विश्वास बहाली की एक निर्णायक परीक्षा भी माना जा रहा है।
भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को मज़बूती देने और आपदा प्रबंधन से लेकर रक्षा निगरानी तक के लिए जियो-इमेजिंग बेहद महत्वपूर्ण है—ऐसे में EOS-05 का सफल प्रक्षेपण इसरो और देश दोनों के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है।