जीआरपी प्रमुखों का 7वां अखिल भारतीय सम्मेलन सम्पन्न, रेलवे सुरक्षा पर समन्वित रणनीति पर जोर

जीआरपी प्रमुखों का 7वां अखिल भारतीय सम्मेलन सम्पन्न, रेलवे सुरक्षा पर समन्वित रणनीति पर जोर

नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) प्रमुखों का 7वां अखिल भारतीय सम्मेलन सम्पन्न हुआ। इस सम्मेलन का आयोजन रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के संयोजन में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता आरपीएफ की महानिदेशक सुश्री सोनाली मिश्रा ने की। इसमें विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशक, अतिरिक्त महानिदेशक तथा वरिष्ठ जीआरपी अधिकारी शामिल हुए। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष-सह-सीईओ और अन्य सदस्य भी उपस्थित रहे। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य यात्री सुरक्षा और रेलवे अवसंरचना की सुरक्षा को मजबूत करने हेतु समन्वित कार्ययोजना तैयार करना था।

उभरती सुरक्षा चुनौतियों पर मंथन

भारतीय रेलवे का विस्तृत भौगोलिक नेटवर्क, भारी यात्री संख्या और खुली संरचना इसे संगठित अपराध, मादक पदार्थ तस्करी, तोड़फोड़, पत्थरबाजी और संभावित विध्वंसक गतिविधियों के प्रति संवेदनशील बनाती है।

विचार-विमर्श में एक समग्र सुरक्षा ढांचे की आवश्यकता पर बल दिया गया, जिसमें खुफिया तंत्र, प्रौद्योगिकी, क्षेत्रीय समन्वय और सामुदायिक सहभागिता को एकीकृत किया जाए। जीआरपी कर्मियों के लिए बेहतर अवसंरचना और सुविधाओं के विकास पर भी चर्चा हुई, ताकि उनकी परिचालन क्षमता को सुदृढ़ किया जा सके।

तकनीक आधारित सुरक्षा उपाय

सम्मेलन में आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। फेसियल रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) युक्त सीसीटीवी कैमरे, एआई-आधारित वीडियो एनालिटिक्स और ड्रोन निगरानी जैसे उपकरणों को अपनाने की दिशा में प्रगति पर चर्चा की गई।

आरपीएफ महानिदेशक ने बताया कि इन तकनीकी उन्नयनों से अपराधियों की पहचान और अवैध गतिविधियों का शीघ्र पता लगाने में मदद मिलेगी। उद्देश्य यह है कि तकनीक को जमीनी स्तर की पुलिसिंग के साथ समन्वित कर त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत किया जाए।

मादक पदार्थ तस्करी पर विशेष फोकस

रेल नेटवर्क के माध्यम से हो रही मादक पदार्थ तस्करी को रोकना सम्मेलन का प्रमुख एजेंडा रहा। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के वरिष्ठ अधिकारी ने प्रस्तुति देते हुए सक्रिय निगरानी और रियल-टाइम खुफिया साझाकरण की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि तस्करी नेटवर्क को जड़ से समाप्त किया जा सके।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • जीआरपी राज्य पुलिस के अधीन कार्य करती है, जबकि आरपीएफ रेल मंत्रालय के अंतर्गत संचालित होती है।
  • एफआरएस तकनीक सीसीटीवी नेटवर्क के माध्यम से वास्तविक समय में पहचान करने में सक्षम है।
  • नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
  • भारतीय रेलवे मार्ग लंबाई के आधार पर विश्व के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में से एक है।

सम्मेलन में नियमित मॉक ड्रिल और परिदृश्य-आधारित प्रशिक्षण मॉड्यूल की सिफारिश की गई, ताकि प्रथम प्रतिक्रिया, भीड़ नियंत्रण और आपात प्रबंधन क्षमता को सुदृढ़ किया जा सके। पत्थरबाजी और तोड़फोड़ जैसी घटनाओं से निपटने के लिए सामुदायिक जागरूकता और कड़े कानूनी उपायों पर भी जोर दिया गया। इस सम्मेलन ने राज्य पुलिस और आरपीएफ के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर एक तकनीक-सक्षम और सुदृढ़ रेलवे सुरक्षा प्रणाली के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

Originally written on February 27, 2026 and last modified on February 27, 2026.

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