जापान में लॉन्च को तैयार भारत का UPI: वैश्विक फिनटेक में नया कदम
भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) अब जापान में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने जा रहा है, जो डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भारत की वैश्विक पहुंच का एक महत्वपूर्ण संकेत है। यह पहल न केवल भारत की तकनीकी क्षमताओं को दर्शाती है, बल्कि इसे वित्तीय कूटनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।
जापान में परीक्षण के रूप में शुरू होगी सेवा
भारत और जापान के बीच साझेदारी के तहत वर्ष 2026 में UPI का परीक्षणात्मक रोलआउट जापान में शुरू किया जाएगा। यह पहल जापान की NTT डेटा और भारत की नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के सहयोग से की जा रही है। प्रारंभिक चरण में यह सेवा केवल भारतीय पर्यटकों के लिए उपलब्ध होगी, जिससे वे जापान में यात्रा के दौरान अपने UPI ऐप्स का उपयोग करके भुगतान कर सकेंगे। इसके माध्यम से उपयोगकर्ताओं के भारतीय बैंक खातों से सीधे पैसे डेबिट होंगे, जिससे कार्ड या अलग डिजिटल वॉलेट की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
सीमाओं से परे डिजिटल भुगतान का विस्तार
NPCI और NTT डेटा भविष्य में भारत और जापान के भुगतान नेटवर्क को गहराई से जोड़ने की योजना पर काम कर रहे हैं। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच निर्बाध क्रॉस-बॉर्डर डिजिटल भुगतान को संभव बनाना है। यह प्रयास वैश्विक स्तर पर भुगतान प्रणालियों को इंटरऑपरेबल बनाने और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेन-देन को सरल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
UPI की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय पहुंच
जापान में प्रस्तावित लॉन्च के साथ UPI की वैश्विक उपस्थिति लगातार बढ़ रही है। यह प्रणाली पहले ही भूटान, सिंगापुर, नेपाल, यूएई, श्रीलंका, कतर, मॉरिशस और फ्रांस जैसे आठ देशों में कार्यरत है। इस वैश्विक विस्तार का प्रमुख उद्देश्य भारतीय यात्रियों की सुविधा के साथ-साथ UPI को एक वैश्विक स्तर पर सक्षम डिजिटल भुगतान समाधान के रूप में स्थापित करना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य:
- यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) की शुरुआत भारत में वर्ष 2016 में की गई थी।
- इसे नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा संचालित किया जाता है।
- अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने UPI को दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम भुगतान प्रणाली बताया है।
- वैश्विक स्तर पर तत्काल भुगतान लेन-देन का लगभग 50% हिस्सा अकेले UPI के माध्यम से होता है।
भारत में UPI आज रोजमर्रा के लेन-देन का प्रमुख माध्यम बन चुका है। इसकी कम लागत, QR कोड के माध्यम से भुगतान की सुविधा और इंटरऑपरेबिलिटी ने इसे व्यापक रूप से अपनाया है। जापान जैसे तकनीकी रूप से उन्नत देश में इसकी शुरुआत यह दर्शाती है कि कैसे एक घरेलू सार्वजनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म वैश्विक फिनटेक परिदृश्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।