जस्टिस महेश शरदचंद्र सोनक बने झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश

जस्टिस महेश शरदचंद्र सोनक बने झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश

जस्टिस महेश शरदचंद्र सोनक ने शुक्रवार को झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली, जिससे राज्य की न्यायिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन दर्ज हुआ। राज्यपाल संतोष गंगवार ने उन्हें रांची स्थित लोक भवन में आयोजित समारोह में शपथ दिलाई। इस अवसर पर न्यायपालिका और राजनीतिक जगत की अनेक वरिष्ठ हस्तियाँ मौजूद थीं।

शपथ ग्रहण समारोह: न्यायिक गरिमा का प्रतीक

यह शपथ ग्रहण समारोह लोक भवन के बिरसा मुंडा मंडप में आयोजित किया गया, जहाँ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, झारखंड हाईकोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश, न्यायिक अधिकारी, बार के सदस्य और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी उपस्थित थे। जस्टिस सोनक ने यह पदभार 8 जनवरी को पूर्व मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान के सेवानिवृत्त होने के बाद संभाला।

कोलेजियम की मंजूरी और कार्यकाल

18 दिसंबर को भारत के सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने जस्टिस सोनक की झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पद पर नियुक्ति की अनुशंसा की थी, जिसे बाद में राष्ट्रपति द्वारा अनुमोदन प्राप्त हुआ। इस नियुक्ति के साथ ही वे झारखंड हाईकोर्ट के 17वें मुख्य न्यायाधीश बन गए हैं। नवंबर 2000 में झारखंड हाईकोर्ट की स्थापना के बाद से यह न्यायिक नेतृत्व में निरंतरता का प्रतीक है।

शैक्षणिक और पेशेवर पृष्ठभूमि

28 नवंबर 1964 को जन्मे जस्टिस सोनक ने अपनी स्कूली शिक्षा डॉन बॉस्को हाई स्कूल, पणजी, गोवा से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने धेम्पे कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड साइंस से विज्ञान स्नातक की उपाधि ली। कानून की पढ़ाई उन्होंने एम.एस. कॉलेज ऑफ लॉ, पणजी से प्रथम श्रेणी में पूरी की, जो मुंबई विश्वविद्यालय से संबद्ध है। अपने वर्तमान कार्यभार से पहले वे बॉम्बे हाईकोर्ट में न्यायाधीश के पद पर कार्यरत थे।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • झारखंड हाईकोर्ट की स्थापना नवंबर 2000 में हुई थी।
  • उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 217 के अंतर्गत की जाती है।
  • नियुक्तियाँ सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम की अनुशंसा के आधार पर होती हैं।
  • राज्यपाल उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को शपथ दिलाते हैं।

न्यायिक नेतृत्व में भविष्य की दिशा

मुख्य न्यायाधीश के रूप में जस्टिस सोनक अब झारखंड में न्यायपालिका के संचालन की संवैधानिक जिम्मेदारी निभाएंगे। उनके नेतृत्व से न्यायिक दक्षता में वृद्धि, मामलों का समय पर निपटारा, और जनता के न्याय तंत्र पर विश्वास मजबूत होने की उम्मीद है। ऐसे समय में जब देश भर की अदालतें बढ़ते मामलों और सुधार की मांगों से जूझ रही हैं, झारखंड हाईकोर्ट का यह नया नेतृत्व महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

Originally written on January 10, 2026 and last modified on January 10, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *