जल जीवन मिशन 2.0 के तहत मेघालय का समझौता: ग्रामीण जल आपूर्ति में नया सुधार मॉडल
मेघालय ने जल जीवन मिशन (JJM) 2.0 के तहत केंद्र सरकार के साथ सुधार-आधारित समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर कर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यह राज्य इस तरह का समझौता करने वाला देश का बारहवां राज्य बन गया है। मार्च 2026 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत जल जीवन मिशन 2.0 अब केवल बुनियादी ढांचा निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका ध्यान परिणाम-आधारित और सेवा-केंद्रित ग्रामीण जल आपूर्ति सुनिश्चित करने पर है। यह पहल ग्रामीण भारत में दीर्घकालिक जल सुरक्षा, स्थिरता और विकेंद्रीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लाई गई है।
सुधार-आधारित MoU की प्रमुख विशेषताएं
इस समझौते का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणाली को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाना है। इसके तहत ग्राम पंचायतों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों को सशक्त बनाकर स्थानीय स्तर पर जल प्रबंधन की जिम्मेदारी दी जा रही है। साथ ही, जिला जल एवं स्वच्छता मिशन की स्थापना की जाएगी, जो स्थानीय कार्ययोजनाएं तैयार करेगा और जिला प्रशासन के साथ मिलकर उनके क्रियान्वयन की निगरानी करेगा। यह मॉडल पारंपरिक केंद्रीकृत प्रणाली से हटकर स्थानीय भागीदारी और जवाबदेही को प्राथमिकता देता है।
जल जीवन मिशन के तहत प्रगति और लक्ष्य
मेघालय ने ग्रामीण क्षेत्रों में नल से जल आपूर्ति के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्तमान में राज्य में 83% से अधिक ग्रामीण घरों तक नल का जल पहुंच चुका है, जो पहले की तुलना में काफी सुधार दर्शाता है। केंद्र सरकार ने इस मिशन की समयसीमा को बढ़ाकर दिसंबर 2028 कर दिया है, ताकि सभी ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन उपलब्ध कराया जा सके। इसके लिए ₹1.51 लाख करोड़ का अतिरिक्त बजट भी स्वीकृत किया गया है, जिससे मिशन के कार्यान्वयन को गति मिलेगी।
स्थिरता और सामुदायिक भागीदारी पर जोर
जल जीवन मिशन 2.0 का एक महत्वपूर्ण पहलू जल स्रोतों की स्थिरता और संरक्षण है। इसके लिए ‘जल संचय’ जैसी पहलें और मनरेगा जैसी योजनाओं के साथ समन्वय किया जा रहा है। सामुदायिक भागीदारी यानी ‘जन भागीदारी’ को इस मिशन का केंद्र बनाया गया है, ताकि स्थानीय लोग जल आपूर्ति प्रणाली के संचालन और रखरखाव में सक्रिय भूमिका निभा सकें। मेघालय ने जल प्रबंधन के लिए व्यापक नीति और संस्थागत ढांचे को भी अपनाया है, जिससे जलवायु परिवर्तन और जल संकट जैसी चुनौतियों का प्रभावी समाधान किया जा सके।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- जल जीवन मिशन का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक घर तक कार्यात्मक नल कनेक्शन उपलब्ध कराना है।
- जल जीवन मिशन 2.0 सेवा वितरण, स्थिरता और विकेंद्रीकृत शासन पर आधारित है।
- मनरेगा योजना का उपयोग जल संरक्षण और स्रोत सुदृढ़ीकरण के लिए किया जा सकता है।
- ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियां स्थानीय जल आपूर्ति प्रणालियों का प्रबंधन करती हैं।
यह समझौता केंद्र और राज्य के बीच विश्वास-आधारित सहयोग का प्रतीक है, जिसका लक्ष्य सभी ग्रामीण परिवारों को सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है। मजबूत जवाबदेही, सुधार-आधारित दृष्टिकोण और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से मेघालय जल्द ही पूर्ण जल कवरेज हासिल करने की दिशा में अग्रसर है। यह पहल न केवल ग्रामीण जीवन स्तर को सुधारने में सहायक होगी, बल्कि ‘विकसित भारत 2047’ के व्यापक लक्ष्य की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण योगदान देगी।