जनसंख्या में गिरावट से जूझ रहा चीन: जनसांख्यिकीय संकट की गहराई

जनसंख्या में गिरावट से जूझ रहा चीन: जनसांख्यिकीय संकट की गहराई

चीन की जनसंख्या में गिरावट 2025 में और अधिक गहरा गई, क्योंकि देश ने लगातार चौथे वर्ष जनसंख्या में कमी दर्ज की। परिवार-समर्थक नीतियों के विस्तार के बावजूद जनसांख्यिकीय और आर्थिक दबाव लगातार बढ़ते जा रहे हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, चीन की जनसंख्या 2025 में 3 मिलियन घटकर 1.404 बिलियन हो गई, जिससे यह भारत के बाद दुनिया का दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बना रहा।

जन्मदर में ऐतिहासिक गिरावट

2025 में चीन में केवल 7.92 मिलियन बच्चे पैदा हुए, जो 2024 की तुलना में 1.62 मिलियन या 17 प्रतिशत की गिरावट है। यह गिरावट 2016 से जारी जन्मदर में लगातार कमी की प्रवृत्ति को दर्शाती है। देश की क्रूड बर्थ रेट (प्रति 1,000 व्यक्तियों पर जन्म) घटकर 5.63 पर आ गई, जो आधुनिक इतिहास में सबसे निम्न स्तर है। यह आंकड़े बताते हैं कि चीन एक गहरे जनसांख्यिकीय संकट की ओर अग्रसर है।

प्रजनन दर में दीर्घकालिक गिरावट

चीन की प्रजनन दर लंबे समय से प्रतिस्थापन स्तर (replacement level) से नीचे है। सरकार ने 2020 में आधिकारिक प्रजनन दर 1.3 बताई थी, जबकि हालिया अनुमानों के अनुसार यह दर अब 1.0 के आसपास है। प्रतिस्थापन स्तर को बनाए रखने के लिए प्रति महिला 2.1 जन्मों की आवश्यकता होती है। ये आंकड़े आने वाले दशकों में जनसंख्या संकुचन और तीव्र वृद्धावस्था को दर्शाते हैं।

आर्थिक कारक और परिवार नियोजन

जनसंख्याविदों का मानना है कि जीवन यापन की बढ़ती लागत, शिक्षा में अत्यधिक प्रतिस्पर्धा, रोजगार की अनिश्चितता और धीमी आर्थिक वृद्धि जैसे कारकों के कारण युवा दंपत्तियों में बच्चों को जन्म देने की अनिच्छा बढ़ी है। आर्थिक सुस्ती के कारण पारिवारिक बजट पर बोझ बढ़ा है, जिससे राज्य के प्रोत्साहनों के बावजूद परिवार बढ़ाने की प्रवृत्ति कम हो रही है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • प्रतिस्थापन स्तर की प्रजनन दर प्रति महिला लगभग 2.1 जन्म होती है।
  • चीन ने 2015 में एक-बच्चा नीति से दो-बच्चा नीति की ओर बदलाव किया।
  • 2021 में चीन ने तीन-बच्चा नीति लागू की।
  • भारत ने 2023 में चीन को पीछे छोड़ते हुए विश्व की सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बन गया।

नीतिगत बदलाव और उनकी सीमाएं

सरकार ने प्रति बच्चे 3,600 युआन की नकद सब्सिडी, कर प्रोत्साहन, मातृत्व और बाल देखभाल समर्थन जैसी योजनाएं शुरू की हैं। इसके अतिरिक्त 2025 में कुछ गर्भनिरोधकों को कर छूट सूची से हटाया गया। बावजूद इसके, जन्म दर में गिरावट जारी है। इससे यह स्पष्ट होता है कि नीतिगत हस्तक्षेपों की एक सीमा होती है, जब तक कि वे गहरी सामाजिक और आर्थिक प्रवृत्तियों को नहीं बदल पाते।

निष्कर्ष

चीन की जनसंख्या में गिरावट अब एक संरचनात्मक और दीर्घकालिक समस्या बन चुकी है, जिसे केवल प्रोत्साहन योजनाओं से हल नहीं किया जा सकता। यह संकट न केवल श्रम शक्ति को प्रभावित करेगा, बल्कि आर्थिक वृद्धि, सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भी दीर्घकालिक प्रभाव डालेगा। चीन की यह स्थिति अन्य विकासशील देशों के लिए भी एक महत्वपूर्ण चेतावनी है कि जनसांख्यिकीय संतुलन बनाए रखना भविष्य की स्थिरता के लिए अत्यंत आवश्यक है।

Originally written on January 20, 2026 and last modified on January 20, 2026.

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