जनवरी 2026 में दिल्ली देश की दूसरी सबसे प्रदूषित शहर, PM2.5 स्तर राष्ट्रीय मानकों से तीन गुना अधिक

जनवरी 2026 में दिल्ली देश की दूसरी सबसे प्रदूषित शहर, PM2.5 स्तर राष्ट्रीय मानकों से तीन गुना अधिक

जनवरी 2026 में दिल्ली को भारत का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर घोषित किया गया है, जिससे उत्तर भारत में सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण की गंभीरता एक बार फिर उजागर हुई है। Centre for Research on Energy and Clean Air (CREA) द्वारा किए गए मासिक विश्लेषण में यह जानकारी सामने आई है। दिल्ली से आगे केवल गाज़ियाबाद रहा, जिसने देश के सबसे प्रदूषित शहर का स्थान हासिल किया।

दिल्ली में PM2.5 का स्तर राष्ट्रीय सीमा से कहीं अधिक

जनवरी माह में दिल्ली में PM2.5 का औसत स्तर 169 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया, जो भारत की राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानक (NAAQS) की वार्षिक सीमा 60 µg/m³ से लगभग तीन गुना अधिक है। महीनों भर वायु में महीन कणों की उपस्थिति लगातार बनी रही, जिसका कारण अनुकूल मौसम की कमी और स्थायी उत्सर्जन स्रोत रहे।

गाज़ियाबाद प्रदूषण सूची में शीर्ष पर

जनवरी में गाज़ियाबाद का औसत PM2.5 स्तर 184 µg/m³ रहा और यह पूरे महीने (31 दिनों) में हर दिन राष्ट्रीय दैनिक मानक का उल्लंघन करता रहा। यह दर्शाता है कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु गुणवत्ता संकट गहराता जा रहा है।

वायु गुणवत्ता श्रेणियाँ और दिल्ली की दैनिक स्थिति

CREA के अनुसार, जनवरी 2026 में दिल्ली में:

  • 24 दिन ‘Very Poor’
  • 3 दिन ‘Severe’
  • 2 दिन ‘Poor’
  • 2 दिन ‘Moderate’ वायु गुणवत्ता वाले रहे।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार:

  • AQI 301–400: ‘Very Poor’
  • AQI 400+: ‘Severe’
    इन श्रेणियों में वायु गुणवत्ता गंभीर स्वास्थ्य जोखिम उत्पन्न करती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारत में PM2.5 के लिए वार्षिक मानक 60 µg/m³ निर्धारित है, जबकि WHO की दैनिक सुरक्षित सीमा मात्र 15 µg/m³ है।
  • PM2.5 बेहद महीन कण होते हैं जो फेफड़ों के जरिए रक्त में प्रवेश कर कई अंगों को प्रभावित कर सकते हैं।
  • NCAP (National Clean Air Programme) का उद्देश्य भारत के ‘non-attainment cities’ में PM प्रदूषण को कम करना है।
  • PM2.5 के साथ-साथ इसके precursor gases जैसे सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड पर ध्यान देना आवश्यक है।

राष्ट्रीय रुझान और नीति से जुड़ी चिंताएँ

रिपोर्ट के अनुसार, भारत के 248 में से 123 शहरों में PM2.5 का स्तर राष्ट्रीय सीमा से अधिक रहा। वहीं, कोई भी शहर WHO के सुरक्षित मानक को पूरा नहीं कर सका।

विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि:

  • NCAP कार्यक्रम को फिर से केंद्रित कर PM2.5 और उसके स्रोत गैसों पर ध्यान दिया जाए।
  • उद्योगों और बिजली संयंत्रों के लिए सख्त उत्सर्जन मानक अपनाए जाएँ।
  • Airshed-based प्रबंधन दृष्टिकोण को लागू किया जाए, जिससे एक भौगोलिक क्षेत्र के भीतर विभिन्न स्रोतों से होने वाले प्रदूषण को सामूहिक रूप से नियंत्रित किया जा सके।

जनवरी 2026 की ये रिपोर्ट प्रदर्शित करती है कि वायु गुणवत्ता सुधार की दिशा में नीतिगत, वैज्ञानिक और प्रशासनिक समन्वय की तत्काल आवश्यकता है।

Originally written on February 7, 2026 and last modified on February 7, 2026.

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