चीन में क्रोनिक किडनी रोग से जुड़ी एनीमिया के इलाज के लिए डेसिडुस्टैट को मंजूरी
भारतीय दवा कंपनी ज़ायडस लाइफसाइंसेज को अपनी दवा डेसिडुस्टैट के लिए चीन में विपणन की मंजूरी मिल गई है। यह दवा क्रोनिक किडनी डिजीज यानी सीकेडी से पीड़ित मरीजों में होने वाली एनीमिया के इलाज के लिए उपयोग की जाती है। चीन की दवा नियामक संस्था नेशनल मेडिकल प्रोडक्ट्स एडमिनिस्ट्रेशन ने इस दवा को मंजूरी दी है। यह उपलब्धि अहमदाबाद स्थित इस फार्मास्युटिकल कंपनी के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे उसे दुनिया के सबसे बड़े स्वास्थ्य बाजारों में से एक चीन में प्रवेश करने का अवसर मिला है।
इस मंजूरी के साथ ही डेसिडुस्टैट अब चीन में सीकेडी से पीड़ित वयस्क मरीजों के उपचार के लिए उपलब्ध हो सकेगी, विशेष रूप से उन मरीजों के लिए जो डायलिसिस पर नहीं हैं।
नॉन-डायलिसिस सीकेडी मरीजों के लिए मंजूरी
चीन की नियामक संस्था ने डेसिडुस्टैट को उन वयस्क मरीजों में होने वाली रीनल एनीमिया के उपचार के लिए स्वीकृति दी है जो अभी डायलिसिस उपचार पर निर्भर नहीं हैं। इस दवा का विपणन चीन में सीएमएस इंटरनेशनल डेवलपमेंट एंड मैनेजमेंट लिमिटेड के माध्यम से किया जाएगा, जो चाइना मेडिकल सिस्टम होल्डिंग्स की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है।
ज़ायडस लाइफसाइंसेज ने वर्ष 2020 में इस कंपनी को इस दवा के लिए विशेष लाइसेंस प्रदान किया था। सफल क्लिनिकल परीक्षणों और नियामक मूल्यांकन के बाद अब इस दवा को चीन के बाजार में लॉन्च करने का रास्ता साफ हो गया है।
दवा कैसे काम करती है
डेसिडुस्टैट एक आधुनिक मौखिक दवा है, जो शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को बढ़ाने में मदद करती है। यह शरीर में एंडोजेनस एरिथ्रोपोइटिन के स्तर को बढ़ाकर, हेप्सिडिन को कम करके और आयरन की उपलब्धता को बेहतर बनाकर काम करती है।
यह दवा हाइपोक्सिया-इंड्यूसिबल फैक्टर–प्रोलाइल हाइड्रॉक्सिलेज इनहिबिटर नामक दवाओं के वर्ग से संबंधित है। चूंकि यह इंजेक्शन की बजाय मौखिक रूप से दी जाती है, इसलिए मरीजों के लिए इसका उपयोग अधिक सुविधाजनक होता है और उपचार के पालन में भी सुधार हो सकता है।
चीन में उपचार की बड़ी आवश्यकता
चीन में क्रोनिक किडनी रोग के मरीजों की संख्या बहुत अधिक है, जिसके कारण इस दवा के लिए बड़ा संभावित बाजार मौजूद है। अनुमान के अनुसार चीन में 12 करोड़ से अधिक लोग सीकेडी से प्रभावित हैं और इनमें से बड़ी संख्या एनीमिया से भी पीड़ित होती है।
जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, एनीमिया की दर भी तेजी से बढ़ती है। शुरुआती चरणों में जहां लगभग 22 प्रतिशत मरीज एनीमिया से प्रभावित होते हैं, वहीं उन्नत चरणों में यह दर 98 प्रतिशत से भी अधिक हो जाती है। नॉन-डायलिसिस मरीजों में हीमोग्लोबिन स्तर को नियंत्रित करने की दर अभी भी बहुत कम है, जिससे उपचार की बड़ी आवश्यकता सामने आती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- डेसिडुस्टैट एक मौखिक दवा है जो क्रोनिक किडनी रोग से जुड़े एनीमिया के उपचार में उपयोग की जाती है।
- यह हाइपोक्सिया-इंड्यूसिबल फैक्टर–प्रोलाइल हाइड्रॉक्सिलेज इनहिबिटर वर्ग की दवा है।
- इस दवा को ज़ायडस लाइफसाइंसेज ने विकसित किया है और भारत में इसे ऑक्सेमिया ब्रांड नाम से बेचा जाता है।
- चीन की दवा नियामक संस्था का नाम नेशनल मेडिकल प्रोडक्ट्स एडमिनिस्ट्रेशन है।
डेसिडुस्टैट को पहले ही भारत में 2022 से ऑक्सेमिया नाम से बाजार में उपलब्ध कराया जा चुका है और कंपनी के अनुसार भारत में एक लाख से अधिक सीकेडी मरीज इसका उपयोग कर चुके हैं। चीन में मिली यह मंजूरी न केवल इस दवा की वैश्विक पहुंच को बढ़ाएगी बल्कि भारतीय फार्मास्युटिकल उद्योग की नवाचार क्षमता को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बनाएगी।