चीन पर निर्भरता से मुक्त होने की तैयारी: अमेरिका में G7 देशों की दुर्लभ खनिजों पर उच्चस्तरीय बैठक
संयुक्त राज्य अमेरिका इस सप्ताह एक उच्चस्तरीय G7 मंत्रिस्तरीय बैठक की मेज़बानी कर रहा है, जिसका उद्देश्य दुर्लभ खनिजों और अन्य महत्वपूर्ण कच्चे माल पर चर्चा करना है। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब चीन और जापान के बीच निर्यात प्रतिबंधों को लेकर तनाव बढ़ गया है। बैठक में उन्नत अर्थव्यवस्थाओं की उस चिंता को रेखांकित किया गया है जो रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और उच्च तकनीकी उद्योगों के लिए चीन-प्रधान आपूर्ति श्रृंखलाओं पर अत्यधिक निर्भरता से उत्पन्न होती है।
वॉशिंगटन में G7 बैठक और वैश्विक भागीदारी
यह बैठक वॉशिंगटन डी.सी. में अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट द्वारा आयोजित की जा रही है, जिसमें कनाडा के वित्त मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शांपेन सहित कई प्रमुख प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया, भारत, मेक्सिको और यूरोपीय संघ के अधिकारी भी इसमें भाग लेंगे।
बैठक के प्रमुख एजेंडे:
• दुर्लभ खनिजों की वैश्विक उपलब्धता
• उनकी प्रोसेसिंग क्षमता का विकास
• आपूर्ति श्रृंखला को भू-राजनीतिक संकटों से सुरक्षित और लचीला बनाना
चीन-जापान विवाद और निर्यात प्रतिबंध
यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब जापान ने चीन पर दुर्लभ खनिजों के निर्यात में जानबूझकर विलंब और रोक लगाने का आरोप लगाया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन ने नागरिक उपयोग की सामग्रियों पर भी निर्यात प्रतिबंध बढ़ा दिया है। जापान की प्रधानमंत्री साना टकाइची के ताइवान पर दिए गए बयान के बाद राजनयिक तनाव उत्पन्न हुआ है। जापान का आरोप है कि चीन दुर्लभ खनिजों को ‘हथियार’ की तरह इस्तेमाल कर रहा है, जिसे बीजिंग ने सिरे से खारिज किया है।
रणनीतिक दबाव का साधन बनते दुर्लभ खनिज
चीन वर्तमान में दुर्लभ खनिजों की खनन, प्रोसेसिंग और मैगनेट निर्माण में दुनिया में सबसे आगे है। यह स्थिति उसे वैश्विक तकनीकी और रक्षा उद्योगों पर रणनीतिक प्रभाव डालने का अवसर देती है।
• अतीत में, चीन ने अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ के जवाब में निर्यात नियंत्रण का इस्तेमाल किया था।
• हालांकि, अक्टूबर में अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक समझौता हुआ था, फिर भी अमेरिका चीनी आपूर्ति पर निर्भरता कम करने की दिशा में कार्यरत है।
• विशेष रूप से रेयर अर्थ मैगनेट, जो रक्षा प्रणालियों, इलेक्ट्रिक वाहनों और इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए जरूरी हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
• दुर्लभ तत्व (Rare Earth Elements) रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स और स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
• चीन दुर्लभ खनिजों का सबसे बड़ा उत्पादक और प्रोसेसर है।
• G7 देशों में अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान शामिल हैं।
• महत्वपूर्ण खनिजों को अब राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ माना जा रहा है।
वैकल्पिक आपूर्ति शृंखलाओं की तलाश
संयुक्त राज्य अमेरिका ने विश्वास जताया है कि घरेलू नवाचार के बल पर चीन की प्रधानता को चुनौती दी जा सकती है। वहीं जर्मनी ने साझेदारों के साथ मिलकर आपूर्ति श्रृंखला को सशक्त करने के लिए संयुक्त कार्रवाई की बात कही है।
यह बैठक एक व्यापक वैश्विक समन्वय का संकेत देती है, जहाँ औद्योगिक लोकतांत्रिक देश अब स्रोतों का विविधीकरण, प्रोसेसिंग क्षमता में निवेश और रणनीतिक संसाधनों को संरक्षित करने को प्राथमिकता दे रहे हैं। यह प्रयास विश्व व्यापार में बढ़ती अस्थिरता और भू-राजनीतिक विभाजन के परिप्रेक्ष्य में और भी महत्वपूर्ण हो गया है।