चीन के EAST फ्यूजन रिएक्टर में वैज्ञानिकों ने पार की ग्रीनवाल्ड सीमा: न्यूक्लियर फ्यूजन में ऐतिहासिक प्रगति

चीन के EAST फ्यूजन रिएक्टर में वैज्ञानिकों ने पार की ग्रीनवाल्ड सीमा: न्यूक्लियर फ्यूजन में ऐतिहासिक प्रगति

चीन के “एक्सपेरिमेंटल एडवांस्ड सुपरकंडक्टिंग टोकामक” (EAST) रिएक्टर ने न्यूक्लियर फ्यूजन अनुसंधान में एक बड़ा मील का पत्थर हासिल किया है। वैज्ञानिकों ने प्लाज़्मा को उस घनत्व पर स्थिर बनाए रखने में सफलता पाई है जो लंबे समय से मानी जा रही “ग्रीनवाल्ड घनत्व सीमा” से कहीं अधिक है। यह उपलब्धि फ्यूजन ऊर्जा को आत्मनिर्भर और व्यावहारिक ऊर्जा स्रोत बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।

क्या है ग्रीनवाल्ड घनत्व सीमा?

टोकामक रिएक्टर अत्यंत गर्म और सघन प्लाज़्मा को चुंबकीय क्षेत्रों द्वारा नियंत्रित करते हैं। दशकों से एक सैद्धांतिक सीमा – जिसे ग्रीनवाल्ड सीमा कहा जाता है – यह दर्शाती थी कि यदि प्लाज़्मा का घनत्व इस सीमा से अधिक हो जाए, तो वह अस्थिर हो जाता है और रिएक्टर में विघटन होता है। लेकिन चीन के हेफेई स्थित EAST रिएक्टर में वैज्ञानिकों ने इस सीमा के 1.3 से 1.65 गुना अधिक घनत्व पर भी स्थिर प्लाज़्मा बनाए रखा, जो कि पहले असंभव माना जाता था।

अत्याधुनिक हीटिंग तकनीक और दीवार संशोधन

इस सफलता में प्रमुख योगदान रहा इलेक्ट्रॉन साइक्लोट्रॉन रेजोनेंस हीटिंग तकनीक का, जिसके माध्यम से प्लाज़्मा को प्रारंभ में माइक्रोवेव द्वारा गर्म किया गया। इसके अतिरिक्त, वैज्ञानिकों ने प्लाज़्मा के प्रारंभिक चरण में ड्यूटेरियम गैस का उच्च स्तर रखा और फिर तापमान बढ़ने पर हाइड्रोजन जोड़ा। रिएक्टर की टंगस्टन दीवारों पर लिथियम की परत चढ़ाई गई ताकि अशुद्धियाँ कम हो सकें और प्लाज़्मा अधिक घनत्व पर भी विघटित न हो।

सिद्ध हुआ “प्लाज़्मा-दीवार आत्म-संगठन सिद्धांत”

EAST की यह खोज 2021 में प्रस्तावित “प्लाज़्मा-दीवार आत्म-संगठन सिद्धांत” की पुष्टि करती है, जो दो स्थिर प्लाज़्मा अवस्थाओं का प्रस्ताव रखता है: एक जो घनत्व सीमा तक सीमित हो और दूसरी जिसमें यह सीमा लागू न हो। EAST में प्राप्त परिणाम स्पष्ट रूप से उस अवस्था में थे जहां ग्रीनवाल्ड सीमा लागू नहीं होती। इसमें divertor क्षेत्र को ठंडा रखा गया, जिससे रिएक्टर दीवारों से गर्मी और कणों का ह्रास कम हुआ।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • ग्रीनवाल्ड सीमा टोकामक में अधिकतम स्थिर प्लाज़्मा घनत्व को दर्शाती है।
  • टोकामक रिएक्टर में उच्च तापमान प्लाज़्मा को चुंबकीय क्षेत्र से नियंत्रित किया जाता है।
  • इलेक्ट्रॉन साइक्लोट्रॉन रेजोनेंस हीटिंग माइक्रोवेव के माध्यम से प्लाज़्मा इलेक्ट्रॉनों को गर्म करता है।
  • EAST चीन द्वारा संचालित एक प्रमुख न्यूक्लियर फ्यूजन अनुसंधान रिएक्टर है।

ITER और फ्यूजन ऊर्जा पर प्रभाव

हालाँकि EAST के ये प्रयोग अल्पकालिक और कम शक्ति वाले थे, लेकिन यह उपलब्धि एक बड़ी वैज्ञानिक मान्यता को चुनौती देती है कि प्लाज़्मा घनत्व को एक सीमा से अधिक नहीं किया जा सकता। उच्च ईंधन घनत्व से यह संभावना बनती है कि फ्यूजन रिएक्टर कम तापमान या कम समय में ही “इग्निशन” हासिल कर सकते हैं, जो ऊर्जा उत्पादन की दृष्टि से एक क्रांति होगी।

यह शोध ITER परियोजना के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो विश्व का सबसे बड़ा फ्यूजन रिएक्टर है और जिसका निर्माण फ्रांस में भारत सहित कई देशों की साझेदारी में हो रहा है। वहां भी घनत्व सीमाओं को पार करना भविष्य के ऊर्जा संयंत्रों के लिए अत्यावश्यक माना जा रहा है।

EAST की यह उपलब्धि न केवल विज्ञान के क्षेत्र में नई संभावनाएँ खोलती है, बल्कि मानवता के लिए साफ, असीम और सुरक्षित ऊर्जा का द्वार भी।

Originally written on January 14, 2026 and last modified on January 14, 2026.

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