चीन का टाइप 076 ‘सिचुआन’ युद्धपोत समुद्री परीक्षण पर, नौसैनिक शक्ति में नई छलांग
चीन ने अपने उन्नत उभयचर आक्रमण पोत टाइप 076 “सिचुआन” के समुद्री परीक्षण शुरू कर दिए हैं, जो उसकी नौसैनिक आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पोत आक्रमण मंच और हल्के विमानवाहक पोत दोनों की विशेषताओं का मिश्रण है, जिससे चीन की दूर-दराज समुद्री अभियानों की क्षमता में बड़ा इज़ाफ़ा होने की उम्मीद है।
नए युग का उभयचर युद्धपोत
“सिचुआन” (हुल नंबर 51) ने शंघाई के हुडोंग-झोंगहुआ शिपयार्ड से अपनी पहली समुद्री यात्रा शुरू की। इससे पहले इस पर महीनों तक बंदरगाह पर परीक्षण किए गए थे। प्रारंभिक समुद्री परीक्षणों में इसके प्रणोदन तंत्र, विद्युत प्रणाली और ऊर्जा उत्पादन क्षमता का मूल्यांकन किया जा रहा है। यह पोत चीन के हाल ही में शामिल किए गए विमानवाहक पोत “फुजियान” के बाद आया है, जो पीएलए नौसेना के तेज़ी से हो रहे तकनीकी विकास को दर्शाता है।
तकनीकी उन्नयन और विशिष्ट विशेषताएँ
टाइप 076 अपने पूर्ववर्ती टाइप 075 वर्ग से कहीं अधिक उन्नत है। इसका अनुमानित विस्थापन 40,000 टन से अधिक है, जबकि इसका फ्लाइट डेक 260 मीटर लंबा और 52 मीटर चौड़ा है जो इसे विश्व के सबसे बड़े उभयचर जहाज़ों में स्थान देता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता है इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट प्रणाली, जिससे यह दुनिया का पहला उभयचर पोत बन गया है जो स्थिर-पंख विमान (फिक्स्ड-विंग एयरक्राफ्ट) को लॉन्च कर सकता है।इसमें दोहरी द्वीप संरचना (dual-island design), बड़ा हैंगर स्पेस और आधुनिक एविएशन नियंत्रण प्रणाली जोड़ी गई है, जिससे इसकी संचालन क्षमता और भी अधिक लचीली हो जाती है।
मानवरहित हवाई प्रणालियों का एकीकरण
चीन इस पोत को भविष्य के मानवरहित हवाई अभियानों (UAV operations) का केंद्र बनाना चाहता है। निर्माण के दौरान इसमें GJ-11 स्टेल्थ ड्रोन के मॉडल देखे गए, और जहाज के आधिकारिक प्रतीक पर भी इसी ड्रोन की आकृति दर्शाई गई है। यह पोत UAVs, हेलीकॉप्टर और संभावित रूप से क्रू-युक्त विमानों को संचालित करने में सक्षम होगा। यह चीन की व्यापक ड्रोन नीति से मेल खाता है, जो हाल के सैन्य परेड और Jiutian UAV जैसे भारी ड्रोन के विकास में परिलक्षित होती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- टाइप 076 का विस्थापन 40,000 टन से अधिक है।
- फ्लाइट डेक का आकार: 260 मीटर × 52 मीटर।
- यह दुनिया का पहला उभयचर पोत है जिसमें इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट लगी है।
- निर्माण दिसंबर 2024 में पूर्ण हुआ और समुद्री परीक्षण नवंबर 2025 में शुरू हुए।
- यह पोत GJ-11 स्टेल्थ UAV सहित विभिन्न मानवरहित विमानों को संचालित कर सकेगा।
भारत और इंडो-पैसिफिक के लिए सामरिक प्रभाव
टाइप 076 की लंबी संचालन क्षमता और उन्नत विमानन तकनीक भारत सहित हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) के लिए सामरिक दृष्टि से अहम है। यह पोत ड्रोन, उभयचर सैनिक और लैंडिंग क्राफ्ट को तैनात करने में सक्षम है, जिससे चीन की समुद्री उपस्थिति विशेष रूप से अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के आसपास के क्षेत्रों में और मजबूत हो सकती है।इलेक्ट्रोमैग्नेटिक लॉन्च सिस्टम के प्रयोग से चीन ने अब विश्व की प्रमुख नौसेनाओं के साथ तकनीकी अंतर को काफी हद तक कम कर लिया है। इसके परिणामस्वरूप भारत को अपने दीर्घकालिक नौसैनिक योजनाओं में तकनीकी उन्नयन और सामरिक साझेदारियों पर अधिक ध्यान केंद्रित करना होगा।