चाबहार बंदरगाह परियोजना पर ईरान का भारत को समर्थन, अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच सहयोग बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की
अमेरिकी प्रतिबंधों के नए दबाव के बीच, ईरान ने चाबहार बंदरगाह परियोजना को लेकर भारत को पूर्ण समर्थन देने की बात दोहराई है और इस रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की इच्छा भी जताई है। यह बयान ऐसे समय आया है जब वॉशिंगटन द्वारा प्रतिबंधों से छूट वापस लेने के बाद इस परियोजना के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
चाबहार बंदरगाह का रणनीतिक महत्व
चाबहार बंदरगाह भारत के लिए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पाकिस्तान को बाईपास करते हुए सीधी पहुंच का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। यह बंदरगाह ईरान के सिस्तान-बालूचिस्तान प्रांत में स्थित है और क्षेत्रीय व्यापार और परिवहन के लिए एक दीर्घकालिक रणनीतिक संपत्ति मानी जाती है। भले ही भू-राजनीतिक परिस्थितियाँ बदलती रहें, ईरानी अधिकारियों का कहना है कि चाबहार की रणनीतिक स्थिति और प्रासंगिकता में कोई कमी नहीं आई है।
अमेरिकी प्रतिबंधों और छूट को लेकर अनिश्चितता
पिछले वर्ष अमेरिका द्वारा भारत को दी गई प्रतिबंधों से छूट (sanctions waiver) को वापस लेने के बाद परियोजना के सामने नई चुनौतियाँ खड़ी हुईं। हालांकि भारत के साथ हुई चर्चाओं के बाद यह छूट 26 अप्रैल तक के लिए बढ़ा दी गई है, लेकिन इसके आगे विस्तार को लेकर स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है। इस असमंजस को केंद्र सरकार के वर्तमान बजट में चाबहार के लिए कोई नया आवंटन न करने के रूप में भी देखा गया।
भारत की वित्तीय प्रतिबद्धता बरकरार
भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि चाबहार बंदरगाह के विकास के लिए निर्धारित 120 मिलियन डॉलर की पूरी राशि पहले ही ईरान को हस्तांतरित की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त, भारत ने 2024 में हस्ताक्षरित 10-वर्षीय अनुबंध के तहत 250 मिलियन डॉलर की लाइन ऑफ क्रेडिट देने की प्रतिबद्धता भी जताई है। अधिकारियों के अनुसार, यह क्रेडिट समयबद्ध नहीं है, जिससे यह संकेत मिलता है कि भारत की रणनीतिक भागीदारी अभी भी मजबूत बनी हुई है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- चाबहार बंदरगाह भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पाकिस्तान को बाईपास करते हुए सीधी पहुंच देता है।
- यह परियोजना भारत और ईरान के बीच 2024 में हस्ताक्षरित दीर्घकालिक द्विपक्षीय समझौते के तहत संचालित हो रही है।
- ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंध तीसरे देशों के निवेश को भी प्रभावित करते हैं।
- चाबहार बंदरगाह ईरान के सिस्तान-बालूचिस्तान प्रांत में स्थित है।
ईरान ने भारत के साथ रिश्तों को मजबूत करने का संकेत दिया
भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने चाबहार बंदरगाह को क्षेत्रीय भूमिका निभाने में सक्षम बताते हुए इसे भारत-ईरान सहयोग का केंद्रबिंदु बताया। उन्होंने दोनों देशों के बीच प्राचीन सभ्यतागत संबंधों को रेखांकित करते हुए विश्वास जताया कि भारत बदलते भू-राजनीतिक हालातों से कुशलता से निपटेगा और इस परियोजना में अपनी भागीदारी बनाए रखेगा।
इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि चाबहार परियोजना न केवल भौगोलिक रणनीति का हिस्सा है, बल्कि यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा, कनेक्टिविटी और विदेश नीति के बहुपक्षीय दृष्टिकोण में भी एक केंद्रीय भूमिका निभा रही है।