चागोस द्वीपसमूह विवाद: ब्रिटेन ने समझौता किया स्थगित
ब्रिटेन ने चागोस द्वीपसमूह को मॉरीशस को सौंपने की अपनी योजना को अस्थायी रूप से रोक दिया है, जिससे एक लंबे समय से चले आ रहे संप्रभुता विवाद पर विराम लग गया है। यह निर्णय अमेरिका के विरोध के बाद लिया गया, जिसने इस समझौते के रणनीतिक प्रभावों पर चिंता जताई। यह मुद्दा हिंद महासागर क्षेत्र में भू-राजनीतिक संतुलन और सैन्य हितों से जुड़ा हुआ है।
यूके–मॉरीशस समझौते का परिचय
वर्ष 2025 में ब्रिटेन ने चागोस द्वीपसमूह पर मॉरीशस के ऐतिहासिक दावे को स्वीकार करते हुए इसे लौटाने पर सहमति जताई थी। इस समझौते के तहत ब्रिटेन ने डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे पर 99 वर्षों तक नियंत्रण बनाए रखने के लिए लीज व्यवस्था की योजना बनाई थी। इसके बदले मॉरीशस को वार्षिक भुगतान दिया जाना था। इस पहल को उपनिवेशवाद से मुक्ति की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना गया था।
अमेरिका की आपत्ति और रणनीतिक चिंता
संयुक्त राज्य अमेरिका, जो डिएगो गार्सिया में ब्रिटेन के साथ संयुक्त सैन्य अड्डा संचालित करता है, ने प्रारंभ में इस समझौते का समर्थन किया था। हालांकि, 2026 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर आपत्ति जताई और इसे पश्चिमी देशों की रणनीतिक स्थिति को कमजोर करने वाला बताया। अमेरिका की इन चिंताओं के कारण ब्रिटेन को इस समझौते पर पुनर्विचार करना पड़ा।
कानूनी और राजनीतिक चुनौतियां
इस समझौते को लागू करने में कानूनी अड़चनें भी सामने आईं, क्योंकि डिएगो गार्सिया से संबंधित किसी भी बदलाव के लिए अमेरिका की सहमति आवश्यक है। साथ ही, ब्रिटेन में प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की सरकार को विपक्षी दलों के विरोध का भी सामना करना पड़ा। इन परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने समझौते को फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया।
भू-राजनीतिक प्रभाव और महत्व
चागोस द्वीपसमूह हिंद महासागर के मध्य में स्थित है और इसमें लगभग 60 द्वीप शामिल हैं। यह क्षेत्र वैश्विक सैन्य और व्यापारिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डा अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक संचालन का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में इस समझौते का स्थगन यह दर्शाता है कि उपनिवेशवाद से जुड़े मुद्दों और आधुनिक सैन्य हितों के बीच संतुलन बनाना कितना जटिल है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- चागोस द्वीपसमूह हिंद महासागर के मध्य में स्थित है।
- डिएगो गार्सिया एक महत्वपूर्ण यूके–यूएस सैन्य अड्डा है।
- मॉरीशस इस पर ऐतिहासिक अधिकार का दावा करता है।
- अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने अपने परामर्श में मॉरीशस के पक्ष का समर्थन किया है।
यह घटनाक्रम स्पष्ट करता है कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में केवल ऐतिहासिक न्याय ही नहीं, बल्कि रणनीतिक और सुरक्षा हित भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। चागोस द्वीपसमूह का मुद्दा भविष्य में भी वैश्विक मंच पर चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।