चांग’ई-6 मिशन से चंद्रमा पर लौह ऑक्साइड क्रिस्टल की खोज, वैज्ञानिकों के लिए नई दिशा
चीन के चांग’ई-6 (Chang’e-6) चंद्र मिशन ने एक अभूतपूर्व वैज्ञानिक खोज की है। वैज्ञानिकों ने इस मिशन से लाए गए चंद्र मिट्टी के नमूनों में सूक्ष्म लौह ऑक्साइड क्रिस्टल पाए हैं, जो अब तक चंद्रमा की रासायनिक संरचना को लेकर चली आ रही धारणाओं को चुनौती देते हैं। यह खोज चंद्रमा के प्राचीन भू-वैज्ञानिक इतिहास और उसके वातावरण के विकास पर नई रोशनी डालती है।
चंद्र सतह पर ऑक्सीकरण खनिजों के पहले प्रमाण
दक्षिण ध्रुव–एटकेन बेसिन (South Pole–Aitken Basin) से लाए गए नमूनों के विश्लेषण में वैज्ञानिकों ने माइक्रोमीटर आकार के हेमेटाइट (Hematite) और मैग्हेमाइट (Maghemite) कणों की पहचान की। ये ऑक्सीकरण खनिज पहले असंभव माने जाते थे क्योंकि चंद्रमा की सतह अत्यधिक “रिड्यूसिंग” यानी ऑक्सीजन-रहित मानी जाती है। इन खनिजों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि चंद्रमा के कुछ क्षेत्रों में ऑक्सीकरण प्रक्रियाएँ वास्तव में हुई हैं।
प्राचीन टक्कर घटनाओं से जुड़ी उत्पत्ति
वैज्ञानिकों का मानना है कि अरबों वर्ष पहले हुए विशाल उल्कापिंडीय प्रभावों ने अस्थायी ऑक्सीजन-समृद्ध वाष्प वातावरण उत्पन्न किया होगा। जब यह वाष्प ठंडा हुआ, तो वाष्प-आधारित निक्षेपण (vapour-phase deposition) के माध्यम से सूक्ष्म हेमेटाइट क्रिस्टल बने। अध्ययन में मैग्नेटाइट और मैग्हेमाइट जैसे मध्यवर्ती खनिजों की भी पहचान की गई है, जो संभवतः दक्षिण ध्रुव–एटकेन बेसिन के आसपास पाए गए चुंबकीय विसंगतियों से जुड़े हैं।
चंद्रमा की रासायनिक और भूगर्भीय समझ में नई दिशा
यह खोज इस धारणा को बदल देती है कि चंद्रमा पर अत्यधिक ऑक्सीकरण खनिज बनना असंभव है। अब यह स्पष्ट है कि विशिष्ट प्रभाव-जनित परिस्थितियों में ऐसे खनिजों का निर्माण संभव है। इस अध्ययन से चंद्र सतह की चुंबकीय संरचना को भी बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी, जिससे भविष्य के मिशनों में उतरने के स्थलों और नमूना-संग्रह रणनीतियों का चयन अधिक वैज्ञानिक दृष्टि से किया जा सकेगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- हेमेटाइट और मैग्हेमाइट खनिज दक्षिण ध्रुव–एटकेन बेसिन से प्राप्त नमूनों में पाए गए।
- दक्षिण ध्रुव–एटकेन बेसिन सौरमंडल का सबसे पुराना और सबसे बड़ा ज्ञात प्रभाव क्षेत्र है।
- लौह ऑक्साइड का निर्माण प्राचीन विशाल टक्करों से उत्पन्न ऑक्सीजन-समृद्ध वाष्प से जुड़ा है।
- चांग’ई-6 मिशन ने 2024 में चंद्रमा के गहरे क्षेत्रों से नमूने पृथ्वी पर लाकर पहुँचाए।
दक्षिण ध्रुव–एटकेन बेसिन के नमूनों का वैज्ञानिक महत्व
यह बेसिन अपनी गहराई और प्राचीनता के कारण चंद्रमा की दुर्लभ भूगर्भीय प्रक्रियाओं को समझने का प्रमुख केंद्र है। चांग’ई-6 द्वारा यहाँ से नमूने लाकर वैज्ञानिकों को चंद्रमा की गहराई से ऐसी परतों का अध्ययन करने का अवसर मिला जो पहले तक अप्राप्य थीं। इस खोज ने न केवल चंद्रमा की उत्पत्ति और विकास की समझ को गहराया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि कैसे प्राचीन टक्कर घटनाओं ने उसके रासायनिक और चुंबकीय स्वरूप को आकार दिया।