चक्रवात दित्वाह के बाद भारत की मानवीय सहायता को श्रीलंका की सराहना
दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सहयोग की भावना को एक बार फिर बल मिला जब श्रीलंका ने हाल ही में आए भीषण चक्रवात दित्वाह के दौरान भारत द्वारा की गई तत्काल और बड़े पैमाने पर मानवीय सहायता के लिए आधिकारिक रूप से आभार व्यक्त किया। यह पहल इस बात का प्रमाण है कि संकट के समय में पड़ोसी देशों के बीच सहयोग किस तरह जीवन रक्षक बन सकता है। श्रीलंका की सरकार और नौसेना ने भारतीय नौसैनिक पोतों के राहत कार्यों को विशेष रूप से सम्मानित किया है।
श्रीलंका की ओर से औपचारिक मान्यता
श्रीलंका नौसेना ने नवंबर के अंत में आए चक्रवात के तुरंत बाद सहायता पहुँचाने वाले आठ विदेशी नौसैनिक पोतों को सम्मानित किया, जिनमें भारत के दो प्रमुख युद्धपोत शामिल थे। प्रधानमंत्री हरीनी अमरासुरिया ने व्यक्तिगत रूप से सहायता करने वाले देशों के राजनयिक प्रतिनिधियों को धन्यवाद दिया। इस प्राकृतिक आपदा में व्यापक बाढ़, भूस्खलन और बुनियादी ढांचे का भारी नुकसान हुआ, जिससे श्रीलंका की राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया प्रणाली पूरी तरह से चरमरा गई थी।
भारतीय नौसेना की भूमिका
भारतीय नौसेना के INS विक्रांत और INS उदयगिरी इस संकट के समय सबसे पहले पहुँचे विदेशी पोतों में थे। ये दोनों पोत पहले से ही श्रीलंकाई जलक्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू 2025 में भाग लेने के लिए मौजूद थे, जो श्रीलंका नौसेना की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित किया गया था। 27 नवंबर को चक्रवात के टकराने के तुरंत बाद इन पोतों को राहत कार्यों के लिए पुनर्नियोजित कर दिया गया।
ऑपरेशन सागर बंधु और राहत कार्यों का विस्तार
भारत ने चक्रवात के दिन ही ऑपरेशन सागर बंधु की शुरुआत की। इस मानवीय मिशन के तहत भारत ने 1,100 टन से अधिक राहत सामग्री प्रदान की, जिसमें खाद्यान्न, टेंट, तिरपाल, वस्त्र, स्वच्छता किट और जल शुद्धिकरण उपकरण शामिल थे। इसके अतिरिक्त, 14.5 टन दवाइयाँ और चिकित्सीय उपकरण तथा 60 टन लॉजिस्टिक सामग्री भी भेजी गई।
INS विक्रांत से तैनात हेलीकॉप्टरों ने हवाई राहत वितरण और बचाव कार्यों में प्रमुख भूमिका निभाई। साथ ही, भारतीय वायुसेना ने भी दो सप्ताह तक Mi-17 हेलीकॉप्टरों के माध्यम से राहत वितरण और लोगों की निकासी में सहायता प्रदान की।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ऑपरेशन सागर बंधु भारत द्वारा श्रीलंका को चक्रवात दित्वाह के बाद दी गई मानवीय सहायता का मिशन है।
- INS विक्रांत भारत का स्वदेशी रूप से निर्मित विमानवाहक पोत है।
- मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) संचालन भारतीय नौसेना की प्रमुख भूमिका में शामिल है।
- भारत और श्रीलंका नियमित रूप से समुद्री सुरक्षा और आपदा प्रतिक्रिया में सहयोग करते हैं।
दीर्घकालिक समर्थन और पुनर्निर्माण
भारत की सहायता केवल तत्काल राहत तक सीमित नहीं रही। 23 दिसंबर को भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने श्रीलंका के लिए 450 मिलियन अमेरिकी डॉलर के पुनर्निर्माण पैकेज की घोषणा की, जिसमें रियायती ऋण और अनुदान दोनों शामिल हैं। इससे भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता और पड़ोसी देशों के प्रति संवेदनशीलता का स्पष्ट संदेश गया है।
भारत की त्वरित प्रतिक्रिया और दूरगामी सहायता न केवल श्रीलंका में राहत कार्यों को सफल बनाने में सहायक रही, बल्कि यह दक्षिण एशिया में आपसी विश्वास और सहयोग को भी एक नई दिशा देती है।