चंद्रयान-4 के लिए मोंस माउटन के पास संभावित लैंडिंग साइट चिन्हित

चंद्रयान-4 के लिए मोंस माउटन के पास संभावित लैंडिंग साइट चिन्हित

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर के वैज्ञानिकों ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में मोंस माउटन के पास चंद्रयान-4 मिशन के लिए एक संभावित सुरक्षित लैंडिंग स्थल की पहचान की है। यह भारत का पहला चंद्र नमूना वापसी मिशन होगा। चयन उच्च-रिज़ॉल्यूशन चित्रों और विस्तृत भू-आकृतिक विश्लेषण के आधार पर किया गया है। लगभग एक वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र इस दुर्गम इलाके में सबसे सुरक्षित विकल्प के रूप में उभरा है।

उच्च-रिज़ॉल्यूशन भू-मानचित्रण

अध्ययन में Chandrayaan-2 के ऑर्बिटर पर लगे ऑर्बिटर हाई रिज़ॉल्यूशन कैमरा (ओएचआरसी) से प्राप्त 32 सेंटीमीटर स्थानिक रिज़ॉल्यूशन वाली स्टीरियो छवियों का उपयोग किया गया। इनसे 0.32 मीटर ग्रिड स्केल पर सटीक डिजिटल एलिवेशन मॉडल तैयार किए गए।

वैज्ञानिकों ने सतह की ढाल, क्रेटर घनत्व, बोल्डर वितरण और सूर्य प्रकाश की उपलब्धता जैसे कारकों का विश्लेषण किया। पहले 84° से 90° दक्षिण अक्षांश के बीच व्यापक क्षेत्रों की पहचान की गई थी, जिसे अब मोंस माउटन के आसपास पांच विशिष्ट क्षेत्रों तक सीमित कर दिया गया है। स्थायी छाया वाले एक क्षेत्र को ऊर्जा और संचार बाधाओं के कारण खारिज कर दिया गया।

सख्त इंजीनियरिंग मानदंड

Chandrayaan-4 इसरो का अब तक का सबसे जटिल चंद्र मिशन होगा। इसमें प्रोपल्शन मॉड्यूल, डिसेंडर मॉड्यूल, असेंडर मॉड्यूल, ट्रांसफर मॉड्यूल और री-एंट्री मॉड्यूल शामिल होंगे।

डिसेंडर-असेंडर संयोजन को सॉफ्ट लैंडिंग कर चंद्र नमूने एकत्र करने होंगे और उन्हें कक्षा में भेजकर पृथ्वी पर वापस लाना होगा। इंजीनियरों ने लैंडिंग के लिए 10 डिग्री से कम ढाल और 0.32 मीटर से छोटे बोल्डर का मानदंड निर्धारित किया है। 11–12 दिनों तक पर्याप्त सूर्य प्रकाश और पृथ्वी से निरंतर रेडियो संपर्क भी अनिवार्य है।

एमएम-4 सबसे उपयुक्त विकल्प

पांच संभावित स्थलों—एमएम-1, एमएम-3, एमएम-4 और एमएम-5—का मूल्यांकन किया गया। इनमें औसत ढाल, ऊंचाई परिवर्तन और 24×24 मीटर के सुरक्षित लैंडिंग ग्रिड की संख्या को ध्यान में रखा गया। ऊंचाई 4,800 मीटर से 6,100 मीटर से अधिक तक पाई गई।

एमएम-4 (अक्षांश −84.289° और देशांतर 32.808°) ने सबसे कम 9.89% खतरा स्तर और लगभग 5° औसत ढाल दर्ज की। इस क्षेत्र में 568 सुरक्षित ग्रिड उपलब्ध पाए गए, जो अन्य स्थलों की तुलना में सर्वाधिक हैं। अन्य विकल्पों में खतरा स्तर 12% से अधिक या सुरक्षित ग्रिड की संख्या कम थी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • चंद्रयान-4 का उद्देश्य दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र से चंद्र नमूने पृथ्वी पर लाना है।
  • ऑर्बिटर हाई रिज़ॉल्यूशन कैमरा 32 सेंटीमीटर तक की स्थानिक रिज़ॉल्यूशन प्रदान करता है।
  • मोंस माउटन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास 84° से 90° दक्षिण अक्षांश के बीच स्थित है।
  • सुरक्षित लैंडिंग के लिए सतह की ढाल, बोल्डर आकार और पर्याप्त सौर प्रकाश महत्वपूर्ण मानदंड हैं।

समग्र रूप से, यदि एमएम-4 स्थल को अंतिम स्वीकृति मिलती है, तो यह भारत के पहले चंद्र नमूना वापसी प्रयास की मेजबानी करेगा। मिशन की सफलता इसरो को उन चुनिंदा अंतरिक्ष एजेंसियों की श्रेणी में ला सकती है जो बाह्य ग्रह पिंडों से नमूने पृथ्वी पर वापस लाने में सक्षम हैं, और यह उच्च-रिज़ॉल्यूशन मानचित्रण तकनीकों की उपयोगिता को भी सिद्ध करेगा।

Originally written on February 12, 2026 and last modified on February 12, 2026.

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