ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ‘नेशनल क्लाइमेट स्टैक इनोवेशन चैलेंज’ की शुरुआत

ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ‘नेशनल क्लाइमेट स्टैक इनोवेशन चैलेंज’ की शुरुआत

राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने गेट्स फाउंडेशन और डलबर्ग एडवाइजर्स के सहयोग से नेशनल क्लाइमेट स्टैक इनोवेशन चैलेंज की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न जोखिमों से निपटने के लिए एक मजबूत तकनीकी ढांचा विकसित करना है। यह पहल विभिन्न जलवायु आंकड़ों को एकीकृत करके कृषि, ग्रामीण वित्त और सार्वजनिक नीति निर्माण के लिए बेहतर जलवायु जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास करेगी। भारत में बढ़ती गर्मी की लहरें, बाढ़, सूखा और चक्रवात जैसी घटनाएं कृषि उत्पादन और ग्रामीण आजीविका के लिए गंभीर चुनौती बन रही हैं। हालांकि जलवायु डेटा की उपलब्धता में सुधार हुआ है, लेकिन पूर्वानुमान और जोखिम प्रबंधन प्रणालियां अभी भी अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर बिखरी हुई हैं।

नेशनल क्लाइमेट स्टैक का उद्देश्य

नेशनल क्लाइमेट स्टैक का मुख्य लक्ष्य विभिन्न जलवायु डेटा और मॉडलों को एकीकृत करके एक समन्वित तकनीकी प्रणाली तैयार करना है। नाबार्ड के अध्यक्ष शाजी के वी के अनुसार वर्तमान में जलवायु से संबंधित जानकारी कई अलग-अलग प्लेटफॉर्म और वेबसाइटों पर उपलब्ध है, जिससे उसका प्रभावी उपयोग सीमित हो जाता है। प्रस्तावित क्लाइमेट स्टैक इन सभी डेटा स्रोतों को एकीकृत कर एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाएगा जो पूर्वानुमान आधारित विश्लेषण और वास्तविक समय में निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करेगा। यह पहल डिजिटल तकनीक के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों को अधिक लचीला और सुरक्षित बनाने के भारत के व्यापक लक्ष्य से भी जुड़ी है।

जलवायु आपदा पूर्वानुमान पर विशेष ध्यान

इस इनोवेशन चैलेंज का एक प्रमुख उद्देश्य निकट अवधि के जलवायु जोखिमों का पूर्वानुमान विकसित करना है। इसके तहत 10 से 15 वर्षों की अवधि को ध्यान में रखते हुए ऐसे मॉडल विकसित किए जाएंगे जो सूखा, बाढ़ और अत्यधिक मौसम जैसी घटनाओं की संभावना का अनुमान लगा सकें। इस प्रकार के पूर्वानुमान ढांचे क्लाइमेट स्टैक की आधारभूत परत के रूप में कार्य करेंगे। इससे सरकार और अन्य संस्थाओं को पहले से तैयारी करने तथा बेहतर नीति योजना बनाने में सहायता मिलेगी।

नवाचार और व्यावहारिक उपयोग को बढ़ावा

इस पहल के अंतर्गत ऐसे डैशबोर्ड और डिजिटल अनुप्रयोग विकसित करने को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है जो वास्तविक जीवन में उपयोगी साबित हो सकें। उदाहरण के लिए, जलवायु आधारित कृषि योजना, ग्रामीण ऋण जोखिम का आकलन और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में इन उपकरणों का उपयोग किया जा सकता है। वैज्ञानिक पूर्वानुमान को व्यावहारिक डिजिटल उपकरणों के साथ जोड़कर यह पहल जलवायु डेटा को उपयोगी और क्रियाशील जानकारी में बदलने का प्रयास करती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • नाबार्ड भारत में कृषि और ग्रामीण विकास के लिए एक शीर्ष विकास वित्तीय संस्था है।
  • नेशनल क्लाइमेट स्टैक का उद्देश्य विभिन्न जलवायु आंकड़ों को एकीकृत कर एक डिजिटल ढांचा तैयार करना है।
  • यह पहल 10–15 वर्षों की अवधि के लिए जलवायु जोखिमों के पूर्वानुमान पर केंद्रित है।
  • इस परियोजना में गेट्स फाउंडेशन और डलबर्ग एडवाइजर्स सहयोगी संस्थाओं के रूप में शामिल हैं।

इनोवेशन चैलेंज की संरचना और समयसीमा

नेशनल क्लाइमेट स्टैक इनोवेशन चैलेंज को कई चरणों में आयोजित किया जाएगा। 6 मार्च 2026 को प्रस्तावों के लिए खुला आमंत्रण जारी किया गया, जिसमें शोध संस्थानों, विश्वविद्यालयों, स्टार्टअप और निजी क्षेत्र के नवाचारकर्ताओं को भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है। मार्च से अप्रैल 2026 के बीच प्रस्तावों की जांच और चयन प्रक्रिया होगी। इसके बाद अप्रैल से मई के बीच छह से आठ सप्ताह का मार्गदर्शित विकास चरण आयोजित किया जाएगा। अंतिम तकनीकी मूल्यांकन और जूरी चयन मई से जून 2026 के दौरान किया जाएगा, जिसमें प्रस्तावों का आकलन वैज्ञानिक गुणवत्ता, पारदर्शिता, विस्तार क्षमता और व्यावहारिक उपयोगिता के आधार पर किया जाएगा।

Originally written on March 11, 2026 and last modified on March 11, 2026.

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