गोवा सरकार का नया विधेयक प्रस्ताव: मुंडकारों के अधिकार सुनिश्चित होने तक भूमि बिक्री पर रोक
गोवा सरकार ने मुंडकारों (Mundkars) के अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण विधायी कदम उठाने की घोषणा की है। प्रस्तावित कानून का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जब तक मुंडकारों के कानूनी दावे सुलझ नहीं जाते, तब तक ज़मींदार उन भूमि का लेनदेन न कर सकें जिन पर मुंडकार रहते हैं। यह कदम हजारों निवासियों के लिए अंतरिम सुरक्षा प्रदान करेगा, जो दशकों से असमर्थता और कानूनी अस्पष्टता का सामना कर रहे हैं।
राज्य सरकार का विधायी प्रस्ताव
मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने घोषणा की है कि राज्य सरकार एक विधेयक पेश करेगी जो ज़मींदारों को ऐसे भूखंडों को बेचने से रोकेगा, जहां मुंडकार अधिकारों का निर्धारण लंबित है। यह विधेयक 12 जनवरी से शुरू हो रहे गोवा विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा।
प्रस्तावित कानून का उद्देश्य ऐसे मामलों में भूमि स्थानांतरण को रोकना है जहां मुंडकार का दावा अदालत में लंबित है या अभी कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त नहीं हुआ है।
बिना दर्ज मामलों वाले मुंडकारों को राहत
यह विधेयक उन मुंडकारों के लिए राहत लाएगा जिन्होंने कभी अदालत में अपने अधिकारों की पुष्टि के लिए याचिका नहीं दायर की, लेकिन ज़मींदार के भूखंडों में लंबे समय से रह रहे हैं। सरकार को कई शिकायतें मिली हैं कि ज़मींदारों ने उन जमीनों को बेच दिया जिन पर मुंडकारों के मकान बने थे, जिससे नए मालिकों के साथ विवाद उत्पन्न हुए।
यह विधेयक इस शून्य को भरने का प्रयास करेगा, जिससे मुंडकारों को अधिकारों की स्पष्टता तक सुरक्षा मिलेगी।
मुंडकारी मामलों में लंबित प्रक्रियाएं
वर्तमान में गोवा की विभिन्न अदालतों में 2,000 से अधिक मुंडकारी मामले लंबित हैं। पहले इन मामलों को शीघ्र निपटाने के प्रयास हुए थे, लेकिन प्रगति सीमित रही।
2023 में बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने सभी मामलतदारों (Mamlatdars) को निर्देश दिया था कि वे मुंडकार मामलों का निपटान छह महीने के भीतर करें। साथ ही, जिलाधिकारियों को आदेश दिया गया था कि वे मामलों का पुनर्वितरण करें और नियमित कार्यभार का मूल्यांकन सुनिश्चित करें।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- मुंडकार गोवा में पारंपरिक निवासी होते हैं, जो ज़मींदारों की भूमि पर बसे होते हैं।
- गोवा में वर्तमान में 2,000 से अधिक मुंडकारी मामले लंबित हैं।
- बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने ऐसे मामलों के निपटान के लिए 6 माह की समयसीमा तय की है।
- प्रस्तावित विधेयक के अनुसार, मुंडकार अधिकारों के स्पष्ट होने तक भूमि बिक्री पर रोक रहेगी।
अध्यादेश से विधायी मार्ग की ओर बदलाव
सरकार पहले मुंडकारों के अधिकारों की रक्षा के लिए अध्यादेश लाने पर विचार कर रही थी, लेकिन अब विधानसभा सत्र को देखते हुए इसे विधेयक के रूप में लाने का निर्णय लिया गया है।
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि सरकार की मंशा लंबे समय से लंबित मामलों का शीघ्र निपटान करने और यह सुनिश्चित करने की है कि मुंडकारों को उन संपत्ति लेनदेन के कारण नुकसान न हो, जिनमें उनके दावे अब तक लंबित हैं।
यह प्रस्ताव गोवा की भूमि व्यवस्था में ऐतिहासिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।