गोवा में संपन्न हुआ 56वां भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव: विविधता और संवेदना का उत्सव

गोवा में संपन्न हुआ 56वां भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव: विविधता और संवेदना का उत्सव

भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित आयोजनों में से एक, 56वां भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI) गोवा में भव्य समापन के साथ संपन्न हुआ। यह महोत्सव इस बार विश्व सिनेमा की विविधता, कलात्मकता और मानव संवेदनाओं को एक साथ लेकर आया। समापन समारोह में वियतनामी फिल्म “स्किन ऑफ यूथ” (Skin of Youth) ने सर्वश्रेष्ठ फिल्म के लिए गोल्डन पीकॉक अवॉर्ड जीतकर इतिहास रच दिया।

पहचान और प्रेम की साहसी कहानी

“स्किन ऑफ यूथ” 1990 के दशक के सैगॉन (वियतनाम) की पृष्ठभूमि पर आधारित है। फिल्म की कहानी सान नामक एक ट्रांसजेंडर सेक्स वर्कर और नाम नामक एक भूमिगत फाइटर की है, जो अपने छोटे बेटे की देखभाल करता है। दोनों की भावनात्मक यात्रा पहचान, प्रेम और संघर्ष के कई पहलुओं को उजागर करती है। निर्देशक एशली मेफेयर (Ashleigh Mayfair) ने बताया कि यह कहानी उनके अपने जीवन से प्रेरित है, विशेषकर उनकी ट्रांसजेंडर बहन के अनुभवों से। फिल्म की संवेदनशीलता, दृश्य सौंदर्य और साहसिक विषयवस्तु ने निर्णायकों को गहराई से प्रभावित किया।

निर्णायक मंडल और विशेष सम्मान

जूरी ने “स्किन ऑफ यूथ” को “पहले ही फ्रेम से आकर्षक” बताते हुए इसकी कलात्मक शैली और सामाजिक संवेदनशीलता की प्रशंसा की। इसके अलावा नॉर्वे की फिल्म “सेफ हाउस” (Safe House) को ICFT–UNESCO गांधी मेडल से सम्मानित किया गया, जो शांति और सांस्कृतिक संवाद को प्रोत्साहित करने वाली फिल्मों को दिया जाता है।
सर्वश्रेष्ठ प्रथम निर्देशक का पुरस्कार संयुक्त रूप से ईरान के हिसाम फरहमंद को उनकी फिल्म “माय डॉटर’स हेयर (राहा)” और एस्तोनिया के टोनिस पिल को उनकी फिल्म “फ्रैंक” के लिए मिला। वहीं उबेइमार रियोस और जारा सोफिजा ओस्तान को उनके उत्कृष्ट अभिनय के लिए सिल्वर पीकॉक सम्मान प्रदान किया गया।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • गोल्डन पीकॉक अवॉर्ड, भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का सर्वोच्च सम्मान है।
  • “स्किन ऑफ यूथ” वियतनाम में ट्रांसजेंडर पहचान और सामाजिक स्वीकृति के विषय को दर्शाती है।
  • इस वर्ष के महोत्सव में कई महाद्वीपों के नए निर्देशकों को सम्मानित किया गया।
  • ICFT–UNESCO गांधी मेडल उन फिल्मों को दिया जाता है जो शांति, करुणा और अहिंसा को बढ़ावा देती हैं।

संस्कृति, श्रद्धांजलि और समापन समारोह

समापन कार्यक्रम में भारतीय सिनेमा के कई महान कलाकारों को श्रद्धांजलि दी गई और पूर्वोत्तर भारत की लोक कलाओं का जीवंत प्रदर्शन हुआ। महोत्सव ने यह संदेश दोहराया कि सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में संवाद, सहानुभूति और एकता का सशक्त साधन है। 56वां IFFI न केवल फिल्मों का उत्सव रहा, बल्कि यह विविध संस्कृतियों के मिलन और मानवीय भावनाओं के साझा मंच के रूप में याद किया जाएगा।

Originally written on November 29, 2025 and last modified on November 29, 2025.

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