गोवा में विश्व महासागर विज्ञान कांग्रेस 2026 का आयोजन, ब्लू इकोनॉमी पर जोर
गोवा में विश्व महासागर विज्ञान कांग्रेस 2026 का चौथा संस्करण आयोजित किया जा रहा है, जिसमें वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं, समुद्री उद्योगों और तटीय समुदायों की व्यापक भागीदारी देखने को मिल रही है। यह आयोजन पणजी स्थित राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान में 26 फरवरी तक चलेगा। सम्मेलन का मुख्य फोकस महासागर स्वास्थ्य, जलवायु लचीलापन और सतत ब्लू इकोनॉमी के मार्गों पर है।
महासागर: अर्थव्यवस्था और आजीविका का आधार
मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने उद्घाटन सत्र में कहा कि पृथ्वी की लगभग 75% सतह जल से आच्छादित है और भारत की लगभग 25% आबादी तटीय क्षेत्रों में निवास करती है। 193 किलोमीटर लंबी तटरेखा वाला गोवा मत्स्य पालन, पर्यटन और समुद्री व्यापार के माध्यम से समुद्र पर गहराई से निर्भर है।
उन्होंने रेखांकित किया कि महासागर जलवायु प्रणाली को प्रभावित करता है, लाखों लोगों की आजीविका को सहारा देता है और इसके संरक्षण के लिए जिम्मेदार दृष्टिकोण आवश्यक है। ऐसे मंच विज्ञान, नीति और जमीनी वास्तविकताओं के बीच सेतु का कार्य करते हैं, जिससे शोध के निष्कर्ष व्यावहारिक समाधानों में परिवर्तित हो सकें।
संस्थागत सहयोग और नवाचार
इस कांग्रेस का सह-आयोजन राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान, राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं महासागर अनुसंधान केंद्र तथा गोवा विश्वविद्यालय द्वारा किया जा रहा है। इससे पूर्व इसके संस्करण विशाखापत्तनम, कोच्चि और चेन्नई में आयोजित हो चुके हैं।
चर्चाओं में महासागर अवलोकन प्रणालियों, जलवायु मॉडलिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग और स्वायत्त जलमग्न वाहनों जैसी उन्नत तकनीकों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। समुद्री जैव-प्रौद्योगिकी और समुद्र तल अन्वेषण जैसे क्षेत्रों में भारतीय संस्थान अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। साथ ही, गोवा में निर्मित भारतीय तटरक्षक के लिए प्रदूषण नियंत्रण पोत का संचालन समुद्री सुरक्षा क्षमता में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में उल्लेखित किया गया।
जलवायु परिवर्तन और ब्लू इकोनॉमी पर केंद्रित एजेंडा
सम्मेलन का प्रमुख एजेंडा महासागर स्वास्थ्य, समुद्री पारितंत्र, तटीय आपदा लचीलापन और सतत ब्लू इकोनॉमी मॉडल पर केंद्रित है। विशेष सत्रों में मछुआरों की बैठक और लगभग 600 उच्च विद्यालय छात्रों की सहभागिता भी शामिल है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महासागर प्रदूषण, अनियमित मौसम और असंतुलित दोहन जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ब्लू इकोनॉमी का विकास वैज्ञानिक प्रमाणों और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के आधार पर होना चाहिए। समुद्री संरक्षण को राष्ट्रीय सुरक्षा और समुद्री तैयारी से भी जोड़ा गया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत की तटरेखा द्वीप क्षेत्रों सहित 7,500 किलोमीटर से अधिक लंबी है।
- राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान का मुख्यालय गोवा में स्थित है।
- ब्लू इकोनॉमी का आशय समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग से आर्थिक विकास और आजीविका सृजन से है।
- भारत में तटीय विनियमन तटीय विनियमन क्षेत्र (सीआरजेड) ढांचे के अंतर्गत संचालित होता है।
विश्व महासागर विज्ञान कांग्रेस 2026 विज्ञान और समाज के बीच समन्वय को सुदृढ़ करने का प्रयास है। पारंपरिक समुद्री ज्ञान और आधुनिक तकनीक के समागम के माध्यम से यह आयोजन तटीय समुदायों की क्षमता निर्माण और संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देता है। यह पहल भारत की महासागर सततता और जलवायु लचीलापन के प्रति प्रतिबद्धता को भी सुदृढ़ करती है।