गोवा को मिला पहला जैव विविधता और सांस्कृतिक मानचित्र: बच्चों के लिए अनोखी शैक्षिक पहल
गोवा को अपना पहला जैव विविधता और सांस्कृतिक विशेषताओं वाला मानचित्र मिलने जा रहा है, जिसे डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया द्वारा विकसित किया गया है। यह मानचित्र 48 सामान्य रूप से पाई जाने वाली प्रजातियों और राज्य की पारंपरिक कला रूपों को एक साथ प्रस्तुत करता है। इसे गोवा आर्ट एंड लिटरेचर फेस्टिवल में जारी किया जाएगा और राज्य के स्कूलों में प्रिंट व डिजिटल प्रारूप में निःशुल्क वितरित किया जाएगा। यह पहल स्कूली बच्चों में पर्यावरणीय जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार की गई है।
48 सामान्य प्रजातियों पर विशेष फोकस
इस मानचित्र में पक्षियों, स्तनधारियों, सरीसृपों, समुद्री जीवों, मैंग्रोव और कीटों सहित 48 ऐसी प्रजातियों को दर्शाया गया है, जो गोवा में आमतौर पर पाई जाती हैं। इसमें कैटफिश और मैंग्रोव जैसी प्रजातियों से लेकर बाघ जैसे बड़े स्तनधारी भी शामिल हैं।
चयन में दुर्लभ या दूरस्थ क्षेत्रों में पाई जाने वाली प्रजातियों से परहेज किया गया है, ताकि बच्चे अपने आसपास दिखने वाली जैव विविधता को पहचान सकें और उससे जुड़ाव महसूस करें। दृश्यात्मक प्रस्तुति बच्चों में जिज्ञासा जगाने और कक्षा में संवाद को प्रोत्साहित करने के लिए तैयार की गई है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 से जुड़ाव
यह पहल National Education Policy 2020 के उस दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसमें अनुभवात्मक और व्यावसायिक शिक्षा पर बल दिया गया है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया-गोवा ने सरकारी और अनुदानित स्कूलों के लगभग 450 शिक्षकों को प्रशिक्षण देना शुरू किया है, जिसकी शुरुआत कक्षा 6 से की गई है।
पाठ्यक्रम में स्थानीय व्यवसायों से जुड़े पर्यावरणीय पहलुओं को शामिल किया जा रहा है। यह मानचित्र केवल एक प्रदर्शन सामग्री नहीं, बल्कि सतत शिक्षण प्रक्रिया का उपकरण है, जो बच्चों को स्थानीय पारिस्थितिकी से जोड़ने का माध्यम बनेगा।
जैव विविधता और सांस्कृतिक पहचान का समन्वय
मानचित्र की विशेषता यह है कि इसमें गोवा की सांस्कृतिक विरासत को भी स्थान दिया गया है। इसमें पारंपरिक कावी कला, कुनबी महिलाओं की पारंपरिक पोशाक और घोडेमोदनी लोक नृत्य को दर्शाया गया है। साथ ही ‘मन्नगेटापन्नी’ जैसी स्थानीय मगरमच्छ पूजा परंपरा का भी उल्लेख किया गया है।
कलाकार सुदर्शन शॉ द्वारा लोक-इंडिका शैली में तैयार यह कलाकृति बच्चों के लिए आकर्षक है, लेकिन इसे कार्टून शैली में नहीं बनाया गया है। इसका उद्देश्य पर्यावरणीय साक्षरता के साथ सांस्कृतिक गर्व को भी बढ़ावा देना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- गोवा में मैंग्रोव, तटीय जल क्षेत्र और पश्चिमी घाट के वन क्षेत्र जैसी विविध पारिस्थितिक प्रणालियां पाई जाती हैं।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 मध्य विद्यालय स्तर से अनुभवात्मक और व्यावसायिक शिक्षा पर जोर देती है।
- कावी कला गोवा की पारंपरिक भित्ति चित्रकला शैली है, जिसमें लाल लेटराइट रंग का उपयोग होता है।
- मैंग्रोव तटीय संरक्षण और जैव विविधता संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
समग्र रूप से, यह जैव विविधता और सांस्कृतिक मानचित्र गोवा में जमीनी स्तर पर संरक्षण जागरूकता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कक्षा की दीवारों पर यह मानचित्र बच्चों को अपने आसपास की प्रकृति और परंपराओं से जोड़ते हुए पर्यावरण संरक्षण के प्रति दीर्घकालिक संवेदनशीलता विकसित करने में सहायक सिद्ध होगा।