गुवाहाटी के असम चिड़ियाघर में मिला दुर्लभ एल्बिनो कीलबैक सांप
असम राज्य चिड़ियाघर एवं वनस्पति उद्यान, गुवाहाटी में एक किशोर एल्बिनो चेकर्ड कीलबैक सांप (Fowlea piscator) का रिकॉर्ड दर्ज किया गया है, जिसने पूर्वोत्तर भारत में सरीसृपों के रंग संबंधी आनुवंशिक विचलनों के अध्ययन के नए द्वार खोले हैं। यह दुर्लभ आनुवंशिक अवस्था जंगली सांपों में बहुत ही कम पाई जाती है, जिससे यह खोज असम की जैव विविधता सूची में एक मूल्यवान जोड़ साबित हुई है।
गुवाहाटी में पहली बार दर्ज हुआ एल्बिनो कीलबैक
वैज्ञानिकों ने असम चिड़ियाघर के परिसर में इस एल्बिनो कीलबैक सांप का दस्तावेजीकरण किया, जो गुवाहाटी में अपनी तरह की पहली खोज है। लगभग 290 मिलीमीटर लंबा यह किशोर सांप नियमित निगरानी के दौरान सरीसृप वैज्ञानिकों और वन अधिकारियों की टीम को दिखाई दिया। इस पर आधारित अध्ययन को अंतरराष्ट्रीय पत्रिका ‘Reptiles and Amphibians’ में प्रकाशित किया गया है, जिससे असम उन कुछ क्षेत्रों में शामिल हो गया है जहां इस प्रजाति में हाइपोपिग्मेंटेशन (रंजकता की कमी) का औपचारिक रिकॉर्ड दर्ज हुआ है।
एल्बिनिज़्म का कारण और विशेष लक्षण
इस सांप में एल्बिनिज़्म के पारंपरिक लक्षण स्पष्ट रूप से देखे गए यानी शरीर में मेलेनिन की अनुपस्थिति, जिसके कारण इसका शरीर हल्के पीले रंग का और आंखें लाल थीं। यह रूप सामान्य चेकर्ड कीलबैक के गहरे रंगों वाले पैटर्न से बिल्कुल अलग था।विशेषज्ञों के अनुसार, एल्बिनिज़्म और ल्यूसिज़्म (Leucism) में अंतर यह है कि ल्यूसिज़्म में जानवर का शरीर हल्का तो होता है, लेकिन आंखों का रंग सामान्य बना रहता है।
संरक्षण और वैज्ञानिक महत्व
सांप की पहचान शरीर के स्केल पैटर्न और शारीरिक विशेषताओं के आधार पर की गई। उसके बाद उसे कुछ दिनों तक सावधानीपूर्वक निगरानी में रखा गया और फिर तनाव से बचाने के लिए एक संरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ दिया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि इस प्रजाति के एल्बिनो नमूने पहले नेपाल और भारत के कुछ अन्य हिस्सों में भी दर्ज किए जा चुके हैं। इस प्रकार, गुवाहाटी में दर्ज यह नमूना क्षेत्रीय और वैश्विक दोनों स्तरों पर सरीसृप जैव विविधता के अध्ययन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- यह सांप Fowlea piscator प्रजाति का है, जिसे आमतौर पर चेकर्ड कीलबैक कहा जाता है।
- एल्बिनिज़्म में मेलेनिन की कमी से शरीर हल्का और आंखें लाल हो जाती हैं।
- यह किशोर सांप लगभग 290 मिमी लंबा था।
- यह अध्ययन ‘Reptiles and Amphibians’ अंतरराष्ट्रीय पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।
पारिस्थितिक चुनौतियाँ
एल्बिनो सांपों के लिए प्राकृतिक परिवेश में जीवित रहना कठिन होता है। सामान्य सांप अपने रंग और पैटर्न की मदद से पत्तियों, मिट्टी या जलाशयों में छिपकर शिकार करते हैं और शिकारी से बचते हैं। इसके विपरीत, एल्बिनो सांपों का हल्का शरीर और लाल आंखें उन्हें आसानी से दृष्टिगोचर बनाती हैं, जिससे वे शिकारी का शिकार जल्दी बन सकते हैं।