गुरु अंगद देव: सिख धर्म के आधार को मजबूत करने वाले महान गुरु
सिख धर्म के दूसरे गुरु, गुरु अंगद देव जी के ज्योति-ज्योत दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। यह दिवस उनके दिव्य मिलन और उनके महान योगदानों को स्मरण करने का अवसर है। गुरु अंगद देव जी ने सिख धर्म के प्रारंभिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और शिक्षा, सामाजिक सुधार तथा धार्मिक परंपराओं को सुदृढ़ किया।
प्रारंभिक जीवन और पृष्ठभूमि
गुरु अंगद देव जी का जन्म 31 मार्च 1504 को पंजाब के मट्टे-दी-सराय में हुआ था। उनका मूल नाम लहणा था। वे 1539 में गुरु नानक देव जी के उत्तराधिकारी बने और सिख धर्म के दूसरे गुरु के रूप में प्रतिष्ठित हुए। उन्होंने 1552 तक अपने नेतृत्व में सिख धर्म के सिद्धांतों को मजबूत किया और उसे संगठित रूप दिया।
गुरुमुखी लिपि का विकास
गुरु अंगद देव जी का सबसे महत्वपूर्ण योगदान गुरुमुखी लिपि का मानकीकरण था। उन्होंने इस लिपि को व्यवस्थित और लोकप्रिय बनाकर सिख धर्म की शिक्षाओं को आम लोगों तक पहुंचाने में मदद की। इससे पंजाबी भाषा में धार्मिक ग्रंथों का संरक्षण और प्रसार संभव हुआ, जिससे साक्षरता में भी वृद्धि हुई।
सामाजिक और शैक्षिक सुधार
गुरु अंगद देव जी ने शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई विद्यालय स्थापित किए, जिनमें खडूर साहिब का विद्यालय प्रमुख है। उन्होंने बच्चों को गुरुमुखी लिपि सिखाने पर विशेष ध्यान दिया। इसके साथ ही उन्होंने शारीरिक स्वास्थ्य को भी महत्व देते हुए कुश्ती और खेलों को प्रोत्साहित किया। उन्होंने लंगर व्यवस्था को और मजबूत किया, जिससे सभी लोगों को जाति और वर्ग से परे समान रूप से भोजन प्राप्त हो सके।
धार्मिक योगदान और विरासत
गुरु अंगद देव जी ने 62 भजन (शब्द) विभिन्न रागों में रचे और गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया। उन्होंने संगत (धार्मिक सभा) की परंपरा को मजबूत किया, जिससे सिख समुदाय का संगठन और विस्तार हुआ। उनके द्वारा स्थापित मूल्य—समानता, अनुशासन और सेवा—आज भी सिख धर्म की आधारशिला हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- गुरु अंगद देव सिख धर्म के दूसरे गुरु थे (1539–1552)।
- उन्होंने गुरुमुखी लिपि को मानकीकृत किया।
- उनका जन्म लहणा के रूप में पंजाब में हुआ था।
- उन्होंने लंगर और संगत परंपराओं को मजबूत किया।
अंततः, गुरु अंगद देव जी का जीवन और कार्य सिख धर्म के विकास में मील का पत्थर साबित हुआ। उनकी शिक्षाएं आज भी समाज को समानता, सेवा और शिक्षा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती हैं।