गुरुडोंगमार झील पर्यटन फिर शुरू, दो साल बाद नॉर्थ सिक्किम में लौटी रौनक

गुरुडोंगमार झील पर्यटन फिर शुरू, दो साल बाद नॉर्थ सिक्किम में लौटी रौनक

नॉर्थ सिक्किम की प्रसिद्ध गुरुडोंगमार झील की ओर पर्यटन गतिविधियां फिर से धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही हैं। अक्टूबर 2023 में साउथ ल्होनाक झील में आए ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) के कारण क्षेत्र में भारी तबाही हुई थी, जिससे सड़कें और कई पुल नष्ट हो गए थे। इसके चलते गुरुडोंगमार झील तक पहुंच लगभग दो वर्षों तक बाधित रही। अब चुंगथांग–लाचेन मार्ग के फिर से खुलने और 400 फुट लंबे ताराम चू पुल के निर्माण के बाद प्रशासन ने लाचेन की ओर जाने के लिए पर्यटक परमिट जारी करना शुरू कर दिया है।

गुरुडोंगमार झील का सामरिक और पर्यटन महत्व

गुरुडोंगमार झील नॉर्थ सिक्किम में लगभग 17,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और भारत-चीन सीमा के काफी करीब है। यह भारत की सबसे ऊंचाई पर स्थित झीलों में से एक मानी जाती है। अपनी प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व के कारण यह हर साल हजारों पर्यटकों और श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। आमतौर पर पर्यटक पहले लाचेन नामक पर्वतीय गांव तक पहुंचते हैं, जो इस झील के लिए मुख्य आधार स्थल माना जाता है। यहां से आगे सड़क मार्ग द्वारा झील तक पहुंचा जाता है।

2023 की ग्लेशियल झील आपदा का प्रभाव

अक्टूबर 2023 में साउथ ल्होनाक झील से उत्पन्न ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड ने नॉर्थ सिक्किम के कई हिस्सों में भारी तबाही मचाई थी। इस प्राकृतिक आपदा में कई पुल बह गए और सड़कों के बड़े हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए। इसके कारण लाचेन क्षेत्र के कई गांवों का संपर्क टूट गया और पर्यटन गतिविधियां लगभग पूरी तरह बंद हो गईं। इस घटना ने यह भी दिखाया कि हिमालयी क्षेत्रों में मौजूद बुनियादी ढांचा जलवायु परिवर्तन से जुड़ी आपदाओं के प्रति कितना संवेदनशील है।

चुंगथांग–लाचेन मार्ग का पुनः खुलना

हाल ही में 400 फुट लंबे ताराम चू पुल के उद्घाटन के बाद चुंगथांग–लाचेन मार्ग पर वाहन आवागमन फिर से शुरू हो गया है। इसके साथ ही प्रशासन ने पर्यटकों के लिए परमिट जारी करना भी शुरू कर दिया है। हालांकि सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कुछ विशेष निर्देश दिए गए हैं। पुल पर एक समय में केवल एक वाहन को ही पार करने की अनुमति है क्योंकि यह एकल लेन वाला पुल है। इसके अलावा चालकों को निर्धारित भार सीमा का पालन करने और वाहनों के बीच पर्याप्त समय अंतराल बनाए रखने की भी सलाह दी गई है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • गुरुडोंगमार झील नॉर्थ सिक्किम में लगभग 17,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और यह भारत की सबसे ऊंची झीलों में से एक है।
  • ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) तब होता है जब ग्लेशियल झील का प्राकृतिक बांध अचानक टूट जाता है और पानी तेजी से बाहर निकलता है।
  • अक्टूबर 2023 में साउथ ल्होनाक झील से आए GLOF ने सिक्किम में भारी बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया था।
  • नॉर्थ सिक्किम का प्रमुख पर्यटन सर्किट लाचेन, लाचुंग और गुरुडोंगमार झील को शामिल करता है।

गुरुडोंगमार झील के लिए मार्ग खुलने से लाचेन क्षेत्र के स्थानीय लोगों को बड़ी आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है। यहां के होटल, होमस्टे और पर्यटन से जुड़े अन्य व्यवसाय लंबे समय से पर्यटकों की वापसी का इंतजार कर रहे थे। हालांकि क्षेत्र की भौगोलिक संवेदनशीलता और लगातार बदलते मौसम को देखते हुए प्रशासन और स्थानीय समुदाय दोनों ही सावधानी बरत रहे हैं। फिर भी संपर्क बहाल होने से नॉर्थ सिक्किम की पर्यटन अर्थव्यवस्था को फिर से गति मिलने की उम्मीद है।

Originally written on March 11, 2026 and last modified on March 11, 2026.

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