गुजरात में बारिश से उफनी विष्वामित्री नदी: बाढ़ चेतावनी स्तर के करीब, प्रशासन सतर्क
मध्य और पूर्वी गुजरात में लगातार हो रही भारी वर्षा के चलते वडोदरा की विष्वामित्री नदी का जलस्तर शनिवार को शहर के बाढ़ चेतावनी मानक के करीब पहुंच गया। हालांकि नगर निगम ने सतर्कता अलर्ट जारी किया है, लेकिन फिलहाल तत्काल बाढ़ का कोई खतरा नहीं बताया गया है। वर्ष 2024 में आई गंभीर बाढ़ की स्मृति ने जनता की चिंता को पुनः जागृत कर दिया है।
जलस्तर में वृद्धि: योजनाबद्ध जल निकासी का परिणाम
काला घोड़ा पुल, जो कि वडोदरा में बाढ़ निगरानी के लिए प्रमुख बेंचमार्क बिंदु है, वहां विष्वामित्री का जलस्तर शनिवार दोपहर तक 13.4 फीट से बढ़कर लगभग 19 फीट पहुंच गया। यह वृद्धि अजवा जलाशय से 6,600 क्यूसेक और प्रतापपुरा से 2,000 क्यूसेक पानी के नियोजित रूप से छोड़े जाने के कारण हुई।
वडोदरा नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि यह जल विमोचन बाढ़ शमन रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य अजवा जलाशय का जलस्तर 212.50 फीट पर नियंत्रित रखना है।
प्रशासन सतर्क, पर स्थिति नियंत्रण में
नगर आयुक्त अरुण महेश बाबू के अनुसार, स्थिति पर पूर्ण नियंत्रण है। उन्होंने बताया कि यदि विष्वामित्री नदी 20 फीट के स्तर को छूती है, तो नीचे के इलाकों में जल निकासी के लिए अस्थायी रूप से जल विमोचन को नियंत्रित किया जाएगा।
नदी किनारे बसे क्षेत्रों के निवासियों को सतर्क किया गया है, लेकिन फिलहाल शहर सीमा में बाढ़ की कोई संभावना नहीं जताई गई है।
निचले क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति
प्रशासन के आश्वासन के बावजूद, सुभानपुरा, टारसाली, वडसर और कोटेश्वर रोड के कुछ हिस्सों में जलभराव देखा गया। कोटेश्वर रोड का एक हिस्सा एहतियातन बंद कर दिया गया है और आसपास के रिहायशी परिसरों में सार्वजनिक उद्घोषणाओं के माध्यम से सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।
अधिकारियों के अनुसार, यह स्थिति उपरी क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा और बाहरी प्रवाह के कारण उत्पन्न हुई है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य:
- काला घोड़ा पुल वडोदरा में विष्वामित्री नदी के बाढ़ मापन का प्रमुख बिंदु है।
- अजवा जलाशय वडोदरा के लिए प्रमुख पेयजल स्रोत है।
- बाढ़ नियंत्रण उपायों में प्राकृतिक जल निकासी नालों का डी-सिल्टिंग शामिल होता है।
- पूर्णिमा की लहरें नदी के समुद्र में प्रवाह को धीमा कर सकती हैं।
राज्यभर में नदियों का उफान
वर्षा का असर केवल विष्वामित्री तक सीमित नहीं है:
- नर्मदा नदी ने भरूच में 28 फीट का स्तर पार किया है, जो सरदार सरोवर बांध से जल विमोचन का परिणाम है।
- अंकलेश्वर में जलभराव की स्थिति बनी है।
- माहीसागर नदी में कडाना, पानम और वनकबोरी बांधों से जल छोड़े जाने के कारण भारी बाढ़ देखी गई है।
- खेड़ा जिले और आस-पास के क्षेत्रों में प्रशासन ने लोगों को नदी किनारे न जाने और अस्थायी रूप से स्थानांतरित होने की सलाह दी है।
राज्य भर में प्रशासन सतर्कता, अलर्ट और पुनर्वास के उपाय अपनाते हुए स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है। यह घटना एक बार फिर शहरी बाढ़ प्रबंधन, जलाशय नियंत्रण और वर्षा अनुकूल अधोसंरचना की आवश्यकता को उजागर करती है।