गुजरात में खुरपका-मुंहपका रोग नियंत्रण के लिए व्यापक टीकाकरण अभियान

गुजरात में खुरपका-मुंहपका रोग नियंत्रण के लिए व्यापक टीकाकरण अभियान

गुजरात सरकार ने राज्य में खुरपका-मुंहपका रोग (Foot and Mouth Disease – FMD) के प्रसार को रोकने के लिए एक व्यापक टीकाकरण अभियान शुरू किया है। यह अभियान 1 मार्च 2026 से प्रारंभ होकर 15 अप्रैल तक राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NADCP) के तहत चलाया जा रहा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य पशुधन की सुरक्षा करना, रोग के प्रकोप को रोकना और किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाना है, क्योंकि यह बीमारी पशुओं की उत्पादकता पर गंभीर प्रभाव डालती है।

खुरपका-मुंहपका रोग क्या है

खुरपका-मुंहपका रोग एक अत्यंत संक्रामक वायरल बीमारी है, जो मुख्यतः खुर वाले पशुओं जैसे गाय, भैंस, भेड़ और बकरी को प्रभावित करती है। इस रोग के प्रमुख लक्षणों में बुखार, मुंह में छाले और अत्यधिक लार आना शामिल हैं। यह बीमारी पशुओं के दूध उत्पादन और कार्यक्षमता को तेजी से कम कर देती है, जिससे डेयरी किसानों की आय पर सीधा असर पड़ता है।

NADCP के तहत टीकाकरण अभियान

यह अभियान राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित किया जा रहा है, जिसका लक्ष्य देशभर में पशु रोगों को नियंत्रित और समाप्त करना है। गुजरात में पशु चिकित्सा टीमें बड़े पैमाने पर पशुओं का टीकाकरण कर रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, वर्ष में दो बार नियमित टीकाकरण करना इस बीमारी की रोकथाम के लिए अत्यंत आवश्यक है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग

अभियान के तहत पशुओं की पहचान के लिए ईयर-टैगिंग की जा रही है और उनकी जानकारी INAPH (Information Network for Animal Productivity and Health) पोर्टल पर अपलोड की जा रही है। यह डिजिटल प्रणाली टीकाकरण की निगरानी, पशुओं के स्वास्थ्य का आकलन और डेटा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाती है।

किसानों और स्थानीय संस्थाओं का सहयोग

इस अभियान को किसानों और डेयरी सहकारी समितियों का व्यापक समर्थन मिल रहा है। पशु चिकित्सा अधिकारी गांव-गांव जाकर न केवल टीकाकरण कर रहे हैं, बल्कि किसानों को जागरूक भी कर रहे हैं। कई क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पशुओं का टीकाकरण सफलतापूर्वक किया जा चुका है, जिससे रोग नियंत्रण में सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • खुरपका-मुंहपका रोग एक अत्यंत संक्रामक वायरल बीमारी है, जो खुर वाले पशुओं को प्रभावित करती है।
  • राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NADCP) का उद्देश्य पशु रोगों का नियंत्रण और उन्मूलन है।
  • INAPH पोर्टल का उपयोग पशुधन के स्वास्थ्य और टीकाकरण डेटा को ट्रैक करने के लिए किया जाता है।
  • FMD की रोकथाम के लिए साल में दो बार टीकाकरण आवश्यक माना जाता है।

यह टीकाकरण अभियान न केवल पशुधन की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि किसानों की आजीविका को भी स्थिर बनाए रखने में मदद करेगा। बड़े स्तर पर इस तरह के प्रयास भारत के डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

Originally written on March 17, 2026 and last modified on March 17, 2026.

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