गुजरात के साणंद में माइक्रोन की सेमीकंडक्टर एटीएमपी इकाई शुरू
भारत की सेमीकंडक्टर क्षेत्र में महत्वाकांक्षाओं को एक बड़ी उपलब्धि मिली है, क्योंकि माइक्रोन टेक्नोलॉजी ने गुजरात के साणंद में अपनी उन्नत मेमोरी एटीएमपी (Assembly, Testing, Marking and Packaging) सुविधा में उत्पादन शुरू कर दिया है। इस संयंत्र से तैयार पहला DRAM मॉड्यूल डेल टेक्नोलॉजीज को भेजा गया, जिससे भारत उच्च स्तरीय सेमीकंडक्टर असेंबली और परीक्षण क्षेत्र में प्रवेश कर गया है। इस संयंत्र का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। यह भारत का पहला उन्नत मेमोरी एटीएमपी संयंत्र माना जा रहा है।
दुनिया का सबसे बड़ा रेज्ड-फ्लोर क्लीन रूम
साणंद स्थित इस इकाई में लगभग 5 लाख वर्ग फुट का रेज्ड-फ्लोर क्लीन रूम बनाया गया है, जिसे इस प्रकार की सबसे बड़ी सेमीकंडक्टर असेंबली सुविधा माना जा रहा है। इसे विशेष रूप से गुजरात की मिट्टी और जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है, ताकि नमी से जुड़े जोखिमों को कम किया जा सके।
यह क्लीन रूम ‘क्लास 1000’ मानक का है, जिसमें प्रति घन मीटर हवा में अधिकतम 1,000 कणों की ही अनुमति होती है। यहां हवा को प्रति घंटे लगभग 120 बार प्रवाहित किया जाता है, जो फार्मास्युटिकल उद्योग के मानकों से भी अधिक है। इससे अति संवेदनशील इंटीग्रेटेड सर्किट और बेहद पतले गोल्ड बॉन्डिंग तार सुरक्षित रहते हैं।
उन्नत मेमोरी निर्माण प्रक्रिया
इस संयंत्र में DRAM और NAND फ्लैश मेमोरी का असेंबली और परीक्षण किया जाता है। DRAM कंप्यूटर, स्मार्टफोन और डेटा सेंटर जैसे उपकरणों में कार्यशील मेमोरी के रूप में काम करती है, जबकि NAND फ्लैश मेमोरी SSD और अन्य स्टोरेज उपकरणों में स्थायी डेटा भंडारण के लिए उपयोग की जाती है।
यह संयंत्र ‘वेफर-इन से फिनिश्ड-प्रोडक्ट-आउट’ मॉडल पर काम करता है। माइक्रोन की वैश्विक फैब्रिकेशन इकाइयों से आने वाले वेफर को यहां पतला किया जाता है, छोटे चिप्स में काटा जाता है, असेंबल किया जाता है और परीक्षण के बाद मॉड्यूल में लगाया जाता है। इसके बाद गुणवत्ता परीक्षण के बाद इन्हें बाजार में भेजा जाता है।
इस परियोजना में दो चरणों में कुल लगभग 2.7 अरब डॉलर का निवेश किया जाएगा। इस वर्ष संयंत्र में करोड़ों इंटीग्रेटेड सर्किट के उत्पादन का लक्ष्य है, जिसे 2027 तक बढ़ाकर लगभग एक अरब इकाइयों तक पहुंचाने की योजना है। उत्पादन का बड़ा हिस्सा निर्यात के लिए होगा, जबकि घरेलू बाजार की मांग भी पूरी की जाएगी।
कुशल कार्यबल और तकनीकी नवाचार
इस संयंत्र में लगभग 1,300 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें लगभग आधे नए इंजीनियरिंग स्नातक हैं। ये कर्मचारी गुजरात और आसपास के राज्यों से आए हैं। सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए विशेष पाठ्यक्रम विश्वविद्यालयों के सहयोग से तैयार किए गए हैं।
कुछ कर्मचारियों को मलेशिया और सिंगापुर में माइक्रोन की इकाइयों में 3 से 6 महीने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। संयंत्र में स्वचालन प्रणाली, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित फैक्ट्री प्रबंधन और उन्नत उत्पादन विश्लेषण तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। शुरुआती उत्पादन में डेल के लिए DRAM मॉड्यूल भेजे गए हैं और भविष्य में आसुस तथा क्वालकॉम जैसी कंपनियों को भी आपूर्ति की योजना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- एटीएमपी का अर्थ है सेमीकंडक्टर निर्माण में असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग।
- DRAM एक वोलाटाइल मेमोरी है, जो कंप्यूटर और अन्य उपकरणों की कार्यशील मेमोरी के रूप में उपयोग होती है।
- NAND फ्लैश मेमोरी एक नॉन-वोलाटाइल स्टोरेज तकनीक है, जिसका उपयोग SSD और स्मार्टफोन में किया जाता है।
- क्लीन रूम वर्गीकरण प्रति घन मीटर हवा में स्वीकार्य कणों की संख्या को दर्शाता है।
साणंद में स्थापित यह संयंत्र भारत के सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे देश की इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षमता बढ़ेगी और महत्वपूर्ण तकनीकों के आयात पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी।