गुजरात के पावागढ़ पहाड़ी क्षेत्र में दुर्लभ ब्लू-एंड-व्हाइट फ्लायकैचर का दर्शन

गुजरात के पावागढ़ पहाड़ी क्षेत्र में दुर्लभ ब्लू-एंड-व्हाइट फ्लायकैचर का दर्शन

गुजरात के पावागढ़ पहाड़ी क्षेत्र में एक दुर्लभ प्रवासी पक्षी ब्लू-एंड-व्हाइट फ्लायकैचर का दर्शन हुआ है, जिसने पक्षी प्रेमियों और वन अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया है। यह छोटा प्रवासी पक्षी अपनी चमकीली नीली पीठ, काले चेहरे और सीने तथा सफेद पेट के कारण आसानी से पहचाना जाता है। वन विभाग के अधिकारियों ने इसे उस समय देखा और तस्वीरें लीं जब वे जंगल क्षेत्र में वृक्षों के बीज एकत्र करने के लिए फील्ड विजिट पर गए थे। इस अप्रत्याशित दृश्य ने यह भी दिखाया कि कभी-कभी दुर्लभ प्रवासी पक्षी अपनी सामान्य प्रवासन मार्गों से हटकर भी दिखाई दे सकते हैं।

फील्ड विजिट के दौरान हुआ आकस्मिक अवलोकन

यह पक्षी 8 मार्च को पावागढ़ पहाड़ी के माची क्षेत्र के पास देखा गया। उस समय वन अधिकारी एक वनस्पति विशेषज्ञ के साथ क्षेत्र में अध्ययन कर रहे थे। रेंज फॉरेस्ट अधिकारी जयेश डुमडिया पक्षियों का निरीक्षण करने के लिए एक शांत स्थान पर गए, तभी उन्होंने पास में पानी पीते हुए एक नीले और सफेद रंग के पक्षी को देखा। आश्चर्यजनक रूप से पक्षी मानव उपस्थिति से नहीं डरा और कुछ समय तक वहीं रहा, जिससे अधिकारी को उसकी तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड करने का अवसर मिल गया। इसके बाद वह घने जंगल की ओर उड़ गया।

दुर्लभ प्रवासी पक्षी की पहचान

प्रारंभ में यह पक्षी स्थानीय प्रजातियों जैसे ब्लैक-नेप्ड मोनार्क या टिकेल्स ब्लू फ्लायकैचर जैसा दिखाई दे रहा था। हालांकि ये स्थानीय पक्षी आमतौर पर मनुष्यों के करीब आते ही उड़ जाते हैं। तस्वीरों का सावधानीपूर्वक अध्ययन करने पर अधिकारियों को इसके विशिष्ट रंग और पैटर्न अलग लगे। बाद में ऑनलाइन संदर्भों और पक्षी विशेषज्ञों से परामर्श करने पर यह पुष्टि हुई कि यह पक्षी ब्लू-एंड-व्हाइट फ्लायकैचर है, जो भारत में बहुत कम देखा जाता है।

प्रवासन मार्ग और वैश्विक आवास

ब्लू-एंड-व्हाइट फ्लायकैचर मुख्य रूप से पूर्वी एशिया में प्रजनन करता है, जिसमें जापान, कोरिया और चीन तथा रूस के कुछ हिस्से शामिल हैं। इसका प्रजनन काल सामान्यतः मई से जुलाई के बीच होता है। अगस्त से यह पक्षी दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों जैसे वियतनाम, थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया और फिलीपींस की ओर प्रवास करता है। यह वहां जनवरी तक रहता है और फिर फरवरी से मई के बीच अपने प्रजनन क्षेत्रों में वापस लौटता है।

भारत में दुर्लभ उपस्थिति

भारत इस पक्षी के सामान्य प्रवासन मार्ग में नहीं आता, इसलिए यहां इसका दिखना अत्यंत दुर्लभ माना जाता है। वन अधिकारियों के अनुसार अब तक देश में इस प्रजाति को लगभग 149 बार ही दर्ज किया गया है। इसी वर्ष की शुरुआत में गुजरात के खेड़ा जिले में इस प्रजाति की एक मादा को भी देखा गया था। मादा पक्षी का रंग भूरा होता है और वह अन्य फ्लायकैचर प्रजातियों से मिलती-जुलती दिखाई देती है, जिससे उसकी पहचान करना और भी कठिन हो जाता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • ब्लू-एंड-व्हाइट फ्लायकैचर मुस्सिकैपिडे परिवार से संबंधित एक प्रवासी पक्षी है।
  • यह प्रजाति पूर्वी एशिया में प्रजनन करती है और सर्दियों में दक्षिण-पूर्व एशिया की ओर प्रवास करती है।
  • गुजरात का पावागढ़ क्षेत्र चंपानेर-पावागढ़ पुरातात्विक उद्यान का हिस्सा है, जिसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा प्राप्त है।
  • मौसम या नेविगेशन में बदलाव के कारण प्रवासी पक्षी कभी-कभी अपने सामान्य मार्ग से भटककर अन्य क्षेत्रों में दिखाई दे सकते हैं।

पावागढ़ में इस दुर्लभ पक्षी का देखा जाना क्षेत्र की जैव विविधता और प्रवासी पक्षियों के अप्रत्याशित मार्गों की ओर संकेत करता है। ऐसे अवलोकन पक्षी विज्ञान और संरक्षण प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं।

Originally written on March 13, 2026 and last modified on March 13, 2026.

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