गुंटूर में पहली बार राष्ट्रीय स्तर का सरस मेला 2026

गुंटूर में पहली बार राष्ट्रीय स्तर का सरस मेला 2026

आंध्र प्रदेश का गुंटूर जिला वर्ष 2026 में एक बड़े राष्ट्रीय आयोजन का साक्षी बनने जा रहा है। यहां पहली बार राष्ट्रीय स्तर के सरस मेला 2026 का आयोजन किया जाएगा, जिससे जिले को देशभर में विशेष पहचान मिलेगी। यह प्रतिष्ठित मेला 6 जनवरी से 18 जनवरी 2026 तक आयोजित होगा और ग्रामीण आजीविका तथा महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों को राष्ट्रीय मंच प्रदान करेगा। इस घोषणा से गुंटूर को ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में देखा जा रहा है।

महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए राष्ट्रीय मंच

सरस मेला महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के उद्देश्य से शुरू की गई एक प्रमुख पहल है, जो टिकाऊ आजीविका को बढ़ावा देती है। 13 दिनों तक चलने वाले इस मेले में देश के 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से लगभग 300 महिला शिल्पकार और उद्यमी भाग लेंगे। महिला स्वयं सहायता समूहों, विशेष रूप से आंध्र प्रदेश की डीडब्ल्यूसीआरए समूहों को राष्ट्रीय स्तर पर अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने, नए बाजारों से जुड़ने और आधुनिक उत्पाद मानकों व विपणन तरीकों को समझने का अवसर मिलेगा।

उद्घाटन और आंध्र प्रदेश के लिए महत्व

सरस मेला 2026 का औपचारिक उद्घाटन 8 जनवरी 2026 को शाम 4 बजे आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा किया जाएगा। इस अवसर पर केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री भी उपस्थित रहेंगे। पहली बार राष्ट्रीय सरस आयोजन की मेजबानी कर रहा गुंटूर जिला ग्रामीण आजीविका मिशन की इस प्रमुख पहल को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने में अहम भूमिका निभाएगा। यह आयोजन महिला-नेतृत्व वाले विकास और उद्यमिता के प्रति आंध्र प्रदेश की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है।

शिल्प, व्यंजन और सांस्कृतिक विविधता

मेले में भारत की समृद्ध हस्तशिल्प परंपरा की झलक देखने को मिलेगी। यहां बांस शिल्प, पारंपरिक आभूषण, हस्तनिर्मित सजावटी वस्तुएं, घरेलू सजावट के उत्पाद और पर्यावरण-अनुकूल जूट उत्पाद प्रदर्शित किए जाएंगे। हथकरघा खंड में पोचमपल्ली और गडवाल जैसी प्रसिद्ध बुनकर परंपराएं आकर्षण का केंद्र होंगी। इसके साथ ही अखिल भारतीय स्वयं सहायता समूह फूड कोर्ट में रायलसीमा व्यंजन, मदुगुला हलवा, भीमिली थांद्रा और अत्रेयपुरम पूथरेकलु जैसे क्षेत्रीय स्वाद उपलब्ध होंगे।

प्रशिक्षण, सुरक्षा और आयोजन व्यवस्थाएं

सरस–2026 केवल प्रदर्शनी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें आजीविका से जुड़े विषयों पर संरचित क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। लखपति दीदी पवेलियन में विभिन्न जिलों की सफल महिला उद्यमियों की कहानियां प्रस्तुत की जाएंगी। हर शाम अंतर-राज्यीय और जिला स्तर के सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। सुरक्षा के लिए 24 घंटे निगरानी के साथ 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। प्रतिभागी स्वयं सहायता समूह सदस्यों को निःशुल्क आवास, भोजन और परिवहन सुविधा दी जाएगी। यह आयोजन राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत, जिला ग्रामीण विकास एजेंसी और एसईआरपी के सहयोग से किया जा रहा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • सरस मेला राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की प्रमुख पहल है।
  • इसका उद्देश्य महिला स्वयं सहायता समूहों का आर्थिक सशक्तिकरण है।
  • सरस–2026 में 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की भागीदारी होगी।
  • डीडब्ल्यूसीआरए का अर्थ है ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और बच्चों का विकास।

कुल मिलाकर, गुंटूर में होने वाला राष्ट्रीय सरस मेला 2026 ग्रामीण भारत की उद्यमशीलता, महिला शक्ति और सांस्कृतिक विविधता को एक साझा मंच पर लाकर आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।

Originally written on January 7, 2026 and last modified on January 7, 2026.

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