गिनी में लोकतंत्र की वापसी: ममादी डूम्बूया राष्ट्रपति निर्वाचित
पश्चिमी अफ्रीका के खनिज-समृद्ध देश गिनी में सैन्य शासन के वर्षों के बाद लोकतंत्र की औपचारिक वापसी हो गई है। 31 दिसंबर 2025 को घोषित अस्थायी चुनाव परिणामों के अनुसार कूप नेता ममादी डूम्बूया को भारी बहुमत से देश का राष्ट्रपति चुना गया है। यह चुनाव देश के राजनीतिक इतिहास में एक अहम मोड़ है, जो सैन्य नेतृत्व से नागरिक शासन की ओर गिनी के संक्रमण को चिह्नित करता है।
चुनाव परिणाम और प्रक्रिया
देश के प्रमुख चुनाव अधिकारी ने घोषणा की कि डूम्बूया ने 86.72% वोट हासिल कर दूसरे दौर की आवश्यकता समाप्त कर दी। मतदान 28 दिसंबर 2025 को हुआ, जिसमें 80.95% मतदान दर्ज किया गया। हालांकि राजधानी कोनाक्री में मतदान की सक्रियता कम रही और विपक्ष ने आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं। चुनाव परिणामों को कानूनी चुनौतियों के लिए आठ दिन का समय है, जिसके बाद गिनी की सुप्रीम कोर्ट अंतिम पुष्टि करेगी।
डूम्बूया को सात वर्षीय कार्यकाल के लिए निर्वाचित किया गया है, जैसा कि गिनी के वर्तमान संविधान में प्रावधान है।
सैन्य तख्तापलट से संविधान तक
ममादी डूम्बूया, जो एक पूर्व विशेष बल कमांडर हैं, ने 2021 में राष्ट्रपति अल्फा कॉन्दे को तख्तापलट के जरिए सत्ता से हटाकर शासन संभाला था। यह तख्तापलट 2020 के बाद पश्चिम और मध्य अफ्रीका में हुए कई सैन्य हस्तक्षेपों की श्रृंखला का हिस्सा था।
तख्तापलट के बाद बनाए गए अस्थायी चार्टर में सेना के नेताओं को चुनाव लड़ने से रोक दिया गया था, लेकिन सितंबर 2025 में हुए जनमत संग्रह में पारित नए संविधान ने इस रोक को हटा दिया, जिससे डूम्बूया की उम्मीदवारी संभव हुई।
अर्थव्यवस्था, खनिज और जनसमर्थन
गिनी विश्व का सबसे बड़ा बॉक्साइट भंडार रखने वाला देश है और सिमांडू नामक विशाल लौह अयस्क खनन परियोजना यहाँ स्थित है। डूम्बूया ने हाल ही में इस परियोजना को गति देने का श्रेय स्वयं को दिया है, जिसे वर्षों से स्थगित किया जा रहा था।
उनकी सरकार ने एमिरेट्स ग्लोबल एल्युमिनियम की स्थानीय सहायक कंपनी का लाइसेंस रद्द कर उसे एक राज्य-स्वामित्व वाली कंपनी को हस्तांतरित किया। यह कदम “संसाधन राष्ट्रवाद” (Resource Nationalism) की नीति का हिस्सा था, जो माली, बुर्किना फासो और नाइजर जैसे पड़ोसी देशों में भी लोकप्रिय होती जा रही है। इसके अलावा, देश की मध्यम आयु 19 वर्ष होने के कारण डूम्बूया की युवा छवि भी समर्थन जुटाने में सहायक रही है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- गिनी में विश्व का सबसे बड़ा बॉक्साइट भंडार है और सिमांडू लौह अयस्क क्षेत्र भी यहीं स्थित है।
- ममादी डूम्बूया ने 2021 में सैन्य तख्तापलट द्वारा सत्ता हासिल की थी।
- नया संविधान सेना के नेताओं को चुनाव लड़ने की अनुमति देता है।
- गिनी में राष्ट्रपति कार्यकाल सात वर्षों का होता है।
लोकतांत्रिक चिंताएँ और भविष्य की राह
हालांकि यह चुनाव लोकतंत्र की दिशा में एक कदम है, लेकिन राजनीतिक स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों को लेकर चिंताएँ बनी हुई हैं। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने चुनावी अभियान को “गंभीर रूप से सीमित” बताया और स्वतंत्र निगरानी व विपक्षी गतिविधियों पर प्रतिबंध की बात कही।
विपक्षी उम्मीदवार फाया लांसाना मीलिमोनो ने व्यवस्थित धांधली और पर्यवेक्षण में बाधा के आरोप लगाए हैं, जिन पर सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
गिनी के लिए यह समय लोकतंत्र और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में संतुलित निर्णय लेने का है। डूम्बूया की लोकप्रियता और संसाधन नीति को स्थायी लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ कैसे संतुलित किया जाएगा, यही देश के भविष्य की दिशा तय करेगा।