गायक और अभिनेता प्रशांत तमांग का निधन: दार्जिलिंग की सांस्कृतिक और राजनीतिक पहचान के प्रतीक को अंतिम विदाई
प्रशांत तमांग, जिनकी यात्रा एक पुलिस कांस्टेबल से राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त गायक और अभिनेता तक पहुँची, का दिल्ली में कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया। वह 43 वर्ष के थे। 2007 में इंडियन आइडल जीतकर प्रसिद्धि पाने वाले तमांग की मृत्यु ने दार्जिलिंग की पहाड़ियों में गहरे सांस्कृतिक और भावनात्मक शोक की लहर दौड़ा दी है। उनका अंतिम संस्कार दार्जिलिंग में किया जाएगा, जहाँ हजारों प्रशंसक उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए एकत्र हो रहे हैं।
आकस्मिक निधन और पारिवारिक व्यवस्था
परिवार के अनुसार, रविवार सुबह तमांग ने सीने में बेचैनी की शिकायत की लेकिन उन्होंने चिकित्सकीय सहायता लेने के बजाय आराम करना उचित समझा। बाद में हालत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। वह दिल्ली के जनकपुरी क्षेत्र में अपनी पत्नी और बेटी के साथ रह रहे थे। परिवार ने निर्णय लिया कि उनके पार्थिव शरीर को दार्जिलिंग लाया जाएगा ताकि स्थानीय जनता उन्हें श्रद्धांजलि दे सके।
पुलिस की वर्दी से राष्ट्रीय मंच तक का सफर
1983 में दार्जिलिंग में जन्मे प्रशांत ने अपने पिता की मृत्यु के बाद कोलकाता पुलिस में नौकरी जॉइन की। यहीं उनकी संगीत प्रतिभा सामने आई और वह पुलिस ऑर्केस्ट्रा में गाने लगे। 2007 में उन्होंने इंडियन आइडल के तीसरे सीजन में भाग लिया और रिकॉर्ड मतों से विजेता बने। उनके इस जीत ने न केवल उन्हें स्टार बनाया, बल्कि गोरखा समुदाय को भी एक सांस्कृतिक पहचान दी।
उनकी लोकप्रियता ने उस समय के गोरखालैंड आंदोलन को भी मजबूती दी, और इसके बाद गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (GJM) जैसी राजनीतिक शक्तियों का उदय देखा गया। प्रशांत की जीत को गोरखा संस्कृति और क्षेत्रीय अस्मिता के प्रतीक के रूप में देखा गया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
• गोरखालैंड की माँग उत्तर बंगाल में एक अलग राज्य की वर्षों पुरानी मांग है।
• इंडियन आइडल सीजन 3 में दार्जिलिंग से रिकॉर्ड संख्या में जनभागीदारी देखी गई थी।
• भारत में सांस्कृतिक आंदोलनों ने अक्सर क्षेत्रीय राजनीतिक चेतना को प्रेरित किया है।
• दार्जिलिंग की पहाड़ियाँ गोरखा संस्कृति के इर्द-गिर्द एक विशिष्ट भाषायी और जातीय पहचान रखती हैं।
सिनेमा, ओटीटी और सार्वजनिक स्मृति में योगदान
प्रशांत तमांग ने संगीत के अलावा फिल्मों और वेब सीरीज में भी काम किया और एक प्रतिभाशाली अभिनेता के रूप में अपनी पहचान बनाई। उनकी भूमिकाओं को दर्शकों और आलोचकों दोनों ने सराहा। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई राजनीतिक और सांस्कृतिक हस्तियों ने उनके निधन को असमय और अत्यंत दुखद बताया।
दार्जिलिंग की जनता के लिए प्रशांत तमांग केवल एक गायक या अभिनेता नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक गौरव और सामूहिक पहचान का प्रतीक थे। उनका निधन एक ऐसी विरासत को छोड़ गया है, जो आगे भी गोरखा अस्मिता और प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।