गाज़ा पुनर्निर्माण के लिए अमेरिकी “Board of Peace” में भारत को आमंत्रण: ट्रंप की मध्यपूर्व पहल में नई रणनीतिक भूमिका

गाज़ा पुनर्निर्माण के लिए अमेरिकी “Board of Peace” में भारत को आमंत्रण: ट्रंप की मध्यपूर्व पहल में नई रणनीतिक भूमिका

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संघर्ष-ग्रस्त गाज़ा पट्टी में युद्ध के बाद की शासन व्यवस्था और पुनर्निर्माण की निगरानी हेतु प्रस्तावित एक अंतरराष्ट्रीय “Board of Peace” में भारत को शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया है। यह पहल ट्रंप की 20-बिंदुओं वाली व्यापक युद्धविराम योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य गाज़ा क्षेत्र में स्थायीत्व और पुनर्निर्माण सुनिश्चित करना है।

गाज़ा योजना में भारत की रणनीतिक प्रासंगिकता

भारत को आमंत्रित किया जाना इस बात का संकेत है कि वैश्विक मंच पर भारत की संतुलित विदेश नीति को मान्यता मिल रही है। भारत जहां इज़राइल का रणनीतिक साझेदार है, वहीं वह फिलिस्तीन के साथ कूटनीतिक संबंध और मानवीय सहायता भी बनाए रखता है। हालिया संघर्ष के बाद भारत ने मिस्र के माध्यम से गाज़ा को मानवीय सहायता भेजने वाले पहले देशों में से एक बनकर अपनी तटस्थ और विश्वसनीय भूमिका को सिद्ध किया।

“Board of Peace” की संरचना और कार्यक्षेत्र

व्हाइट हाउस के अनुसार, यह बोर्ड गाज़ा में युद्धोत्तर शासन और पुनर्निर्माण की रणनीति तय करने वाला प्रमुख निकाय होगा। इसकी अध्यक्षता डोनाल्ड ट्रंप स्वयं करेंगे और इसका कार्यक्षेत्र निम्नलिखित होगा:

  • शासन क्षमता निर्माण
  • क्षेत्रीय समन्वय
  • बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण
  • निवेश प्रोत्साहन और फंडिंग एकत्रीकरण

इसमें अमेरिकी वरिष्ठ अधिकारी, अंतरराष्ट्रीय वित्त विशेषज्ञ और पूर्व वैश्विक नेता शामिल होंगे, जिससे राजनीतिक और आर्थिक नेतृत्व का सम्मिलन सुनिश्चित किया जा सकेगा।

वैश्विक प्रतिक्रियाएँ और कूटनीतिक संवेदनशीलता

इस पहल को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने सावधानीपूर्ण प्रतिक्रिया व्यक्त की है। अब तक केवल हंगरी ने सार्वजनिक रूप से इस प्रस्ताव को स्वीकार किया है। संयुक्त राष्ट्र की पारंपरिक भूमिका को दरकिनार किए जाने की आशंका के कारण कई देश अभी निर्णय लेने से हिचक रहे हैं।

UPSC प्रीलिम्स के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • गाज़ा पट्टी और वेस्ट बैंक फिलिस्तीनी क्षेत्रों के रूप में अलग-अलग प्रशासनिक संरचनाएँ रखते हैं।
  • भारत फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देता है और साथ ही इज़राइल के साथ रणनीतिक संबंध बनाए रखता है।
  • युद्धोत्तर पुनर्निर्माण हेतु बनाए गए निकायों में राजनीतिक और वित्तीय पर्यवेक्षण दोनों शामिल होते हैं।
  • संयुक्त राष्ट्र, मध्यपूर्व शांति प्रक्रियाओं में ऐतिहासिक रूप से केंद्रीय भूमिका निभाता रहा है।

इज़राइली चिंताएँ और कार्यकारी बोर्ड विवाद

एक अलग “गाज़ा कार्यकारी बोर्ड” की भी घोषणा की गई है, जिसमें 11 सदस्य शामिल होंगे और इसमें क्षेत्रीय एवं वैश्विक नेता नामित होंगे। परंतु इज़राइली प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस संरचना पर आपत्ति जताई है, यह कहते हुए कि:

  • इस प्रस्ताव में इज़राइल से कोई पूर्व समन्वय नहीं किया गया।
  • इसमें तुर्की की भागीदारी और कतर के साथ इज़राइल के तनावपूर्ण संबंध नीति विरोधाभास उत्पन्न करते हैं।

निष्कर्ष

गाज़ा के लिए प्रस्तावित “Board of Peace” में भारत को आमंत्रण मिलना एक संकेत है कि भारत वैश्विक शांति प्रयासों में एक संतुलित और विश्वसनीय शक्ति बनकर उभर रहा है। यह पहल यदि सफल होती है, तो मध्यपूर्व में भारत की सक्रिय भूमिका और अधिक सुदृढ़ होगी, साथ ही भारत की वैश्विक रणनीतिक स्थिति को और भी मजबूती मिलेगी।

Originally written on January 20, 2026 and last modified on January 20, 2026.

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