गहरे समुद्र में मिली ‘डार्क ऑक्सीजन’ की खोज
प्रशांत महासागर की गहराइयों का अध्ययन कर रहे वैज्ञानिकों ने लगभग 4,000 मीटर नीचे एक नई तरह की ऑक्सीजन की मौजूदगी दर्ज की है, जिसे “डार्क ऑक्सीजन” कहा जा रहा है। यह खोज इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि समुद्र की इतनी गहराई में सूर्य का प्रकाश बिल्कुल नहीं पहुंचता। अब तक वैज्ञानिकों का मानना था कि पृथ्वी पर ऑक्सीजन का उत्पादन मुख्यतः प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से होता है, जिसके लिए सूर्य के प्रकाश की आवश्यकता होती है। लेकिन इस नई खोज ने इस पारंपरिक वैज्ञानिक समझ को चुनौती दी है और अत्यधिक गहरे समुद्री वातावरण में ऑक्सीजन बनने की नई संभावनाओं पर चर्चा शुरू कर दी है।
क्या है ‘डार्क ऑक्सीजन’?
“डार्क ऑक्सीजन” उस ऑक्सीजन को कहा जा रहा है जो ऐसे गहरे समुद्री क्षेत्रों में पाई गई है जहां सूर्य का प्रकाश नहीं पहुंचता। सामान्यतः पृथ्वी पर ऑक्सीजन का उत्पादन पौधों, शैवाल और कुछ बैक्टीरिया द्वारा प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया के माध्यम से होता है, जिसमें सूर्य की ऊर्जा का उपयोग कर पानी और कार्बन डाइऑक्साइड को ऑक्सीजन में बदला जाता है।
लेकिन वैज्ञानिकों ने गहरे समुद्री क्षेत्र में ऑक्सीजन के मापने योग्य स्तर पाए, जहां प्रकाश संश्लेषण होना संभव ही नहीं है। यह अध्ययन प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका “नेचर जियोसाइंस” में प्रकाशित हुआ है। प्रयोगों के दौरान समुद्र तल पर बंद परिस्थितियों में किए गए परीक्षणों में पाया गया कि पॉलीमेटैलिक नोड्यूल्स के आसपास ऑक्सीजन की मात्रा समय के साथ बढ़ रही थी।
वैज्ञानिकों ने गहरे समुद्र में कैसे किया पता
यह शोध प्रशांत महासागर के क्लैरियन–क्लिपर्टन ज़ोन में किया गया, जो खनिजों से भरपूर समुद्री तल के लिए प्रसिद्ध है। वैज्ञानिकों ने विशेष उपकरणों और बेंथिक चैंबर का उपयोग कर समुद्र तल के छोटे हिस्सों को अलग किया और वहां रासायनिक परिवर्तनों को समय के साथ मापा।
आश्चर्यजनक रूप से इन चैंबरों के अंदर ऑक्सीजन की मात्रा कम होने के बजाय बढ़ती हुई पाई गई। सामान्यतः गहरे समुद्र में सूक्ष्मजीव और रासायनिक प्रतिक्रियाएं ऑक्सीजन का उपभोग करती हैं। लेकिन यहां ऑक्सीजन की वृद्धि यह संकेत दे रही थी कि समुद्र तल में ही कोई ऐसी प्रक्रिया चल रही है जो पूर्ण अंधकार में भी ऑक्सीजन उत्पन्न कर रही है। परिणामों की पुष्टि के लिए वैज्ञानिकों ने कई बार परीक्षण दोहराए और प्रयोगशाला में भी सिमुलेशन कर उपकरणों की त्रुटि की संभावना को खत्म किया।
पॉलीमेटैलिक नोड्यूल्स की संभावित भूमिका
पॉलीमेटैलिक नोड्यूल्स समुद्र तल पर पाए जाने वाले चट्टान जैसे जमाव होते हैं जिनमें मैंगनीज, निकेल और कोबाल्ट जैसे महत्वपूर्ण धातु तत्व पाए जाते हैं। ये नोड्यूल्स लाखों वर्षों में धीरे-धीरे बनते हैं और गहरे समुद्र में खनन के संभावित संसाधन माने जाते हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि ये नोड्यूल्स प्राकृतिक बैटरी की तरह काम कर सकते हैं। इनमें मौजूद खनिज तत्व ऐसी विद्युत-रासायनिक प्रतिक्रियाओं को संभव बना सकते हैं जो समुद्री जल के अणुओं को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित कर देती हैं। हालांकि इस प्रक्रिया की पूरी तरह पुष्टि अभी बाकी है, लेकिन यही कारण गहरे समुद्र में ऑक्सीजन की अप्रत्याशित वृद्धि का संभावित स्पष्टीकरण हो सकता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- प्रकाश संश्लेषण पृथ्वी पर ऑक्सीजन उत्पादन की प्रमुख प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसमें सूर्य के प्रकाश की आवश्यकता होती है।
- क्लैरियन–क्लिपर्टन ज़ोन प्रशांत महासागर का एक विशाल क्षेत्र है जो पॉलीमेटैलिक नोड्यूल्स के लिए प्रसिद्ध है।
- पॉलीमेटैलिक नोड्यूल्स समुद्र के गहरे तल पर लाखों वर्षों में बनने वाले खनिज जमाव होते हैं।
- “नेचर जियोसाइंस” पृथ्वी और पर्यावरण विज्ञान से जुड़े शोध प्रकाशित करने वाली प्रमुख अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका है।
गहरे समुद्र में “डार्क ऑक्सीजन” की यह खोज पृथ्वी के ऑक्सीजन चक्र की वैज्ञानिक समझ को नया आयाम दे सकती है। यदि ऑक्सीजन बिना सूर्य के प्रकाश के भी रासायनिक प्रक्रियाओं से बन सकती है, तो यह अंतरिक्ष में जीवन की खोज और अन्य ग्रहों के अध्ययन के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत प्रदान कर सकती है। साथ ही यह खोज गहरे समुद्र में खनन गतिविधियों के पर्यावरणीय प्रभावों पर भी नए सवाल खड़े करती है, क्योंकि इन नोड्यूल्स से जुड़े पारिस्थितिक तंत्र अभी भी पूरी तरह समझे नहीं गए हैं।