गरुड़-2025: भारत और फ्रांस का संयुक्त वायु युद्धाभ्यास
भारत और फ्रांस ने मों-दे-मर्सां (Mont-de-Marsan) में “गरुड़” वायु युद्धाभ्यास के नवीनतम संस्करण की शुरुआत की है, जो दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और सामरिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह अभ्यास ऐसे समय में हो रहा है जब क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य तेजी से बदल रहे हैं और सहयोगी राष्ट्र अपनी सैन्य तत्परता को परख रहे हैं।
भारतीय और फ्रांसीसी लड़ाकू विमानों का संयुक्त प्रशिक्षण
भारतीय वायु सेना ने इस अभ्यास के लिए छह सुखोई-30 एमकेआई (Sukhoi-30MKI) लड़ाकू विमानों की तैनाती की है, जिन्हें आईएल-78 (IL-78) एयर-टू-एयर रिफ्यूलर और सी-17 ग्लोबमास्टर-III (C-17 Globemaster-III) परिवहन विमान का सहयोग प्राप्त है। ये विमान फ्रांसीसी राफेल (Rafale) और अन्य मल्टीरोल लड़ाकू विमानों के साथ उन्नत सिमुलेटेड युद्ध परिस्थितियों में संचालन कर रहे हैं। इस अभ्यास का उद्देश्य हवाई युद्ध कौशल को निखारना, हवाई रक्षा रणनीतियों को मजबूत करना और संयुक्त स्ट्राइक मिशनों का अभ्यास करना है।
संचालन अनुभव और सामरिक समन्वय पर फोकस
“गरुड़” अभ्यास को दोनों देशों की वायु सेनाएँ एक ऐसा मंच मानती हैं जहाँ वास्तविक ऑपरेशनल परिस्थितियों में समन्वय को परखा जा सके। भारतीय और फ्रांसीसी पायलट आपसी अनुभव साझा कर रहे हैं चाहे वह मिशन की योजना हो, हवाई रणनीतियाँ हों या विभिन्न परिस्थितियों में त्वरित निर्णय लेना। इस संयुक्त अभ्यास से दोनों वायु सेनाओं को एक-दूसरे की प्रशिक्षण प्रणाली और युद्धनीति को समझने का अवसर मिल रहा है, जिससे भविष्य की संयुक्त कार्रवाइयों में तालमेल और बेहतर हो सकेगा।
दीर्घकालिक सामरिक साझेदारी की मजबूती
भारत और फ्रांस लंबे समय से रक्षा सहयोग के तीनों क्षेत्रों थल, जल और वायु में एक साथ कार्य कर रहे हैं। “गरुड़” जैसे वायु अभ्यास न केवल दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच आपसी तालमेल को बढ़ाते हैं, बल्कि रक्षा तकनीक, समुद्री सुरक्षा और एयरोस्पेस विनिर्माण में चल रहे सहयोग को भी पूरक बनाते हैं। यह प्रशिक्षण भारत-फ्रांस की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है जो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता, रक्षा तैयारी और दीर्घकालिक सामरिक सहयोग की दिशा में काम कर रहे हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- “गरुड़” भारत और फ्रांस के बीच एक द्विपक्षीय वायु युद्धाभ्यास है।
- 2025 में इसका आयोजन फ्रांस के मों-दे-मर्सां एयर बेस पर हो रहा है।
- भारतीय वायु सेना ने सुखोई-30 एमकेआई, आईएल-78 और सी-17 विमान तैनात किए हैं।
- इसका मुख्य उद्देश्य एयर-टू-एयर कॉम्बैट, हवाई रक्षा और संयुक्त स्ट्राइक मिशनों का अभ्यास करना है।
भविष्य के सहयोग की दिशा
16 से 27 नवंबर तक चलने वाला “गरुड़-2025” दोनों देशों के बीच परिचालन संगतता (interoperability) को और मजबूत करेगा। यह अभ्यास न केवल संयुक्त तत्परता को सुदृढ़ करेगा, बल्कि भविष्य में एयरोस्पेस, प्रशिक्षण और उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में नए सहयोगों की नींव रखेगा। भारत और फ्रांस की यह साझेदारी वैश्विक शांति और संतुलन के लिए आधुनिक सामरिक सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभर रही है।