गणतंत्र दिवस 2026 में RVC की ऐतिहासिक प्रस्तुति: पहली बार महिला अधिकारी के नेतृत्व में पशु दल
भारतीय सेना की ‘रिमाउंट एंड वेटरनरी कॉर्प्स’ (RVC) इस वर्ष के गणतंत्र दिवस परेड में इतिहास रचने जा रही है। 247 वर्षों की विरासत में पहली बार इस विशेष पशु दल का नेतृत्व एक महिला अधिकारी करेंगी। यह क्षण न केवल सेना के भीतर लैंगिक समावेशन की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, बल्कि RVC की संचालनात्मक प्रासंगिकता और बदलती पहचान को भी दर्शाता है।
रिमाउंट एंड वेटरनरी कॉर्प्स: भूमिका और विरासत
RVC भारतीय सेना की एक विशेषीकृत शाखा है, जो घोड़े, खच्चर, ऊँट, कुत्ते और अन्य सेना पशुओं के प्रजनन, प्रशिक्षण और देखरेख के लिए उत्तरदायी है। ये पशु लॉजिस्टिक्स, टोही, युद्ध सहयोग और आतंकवाद विरोधी अभियानों में, विशेषकर उच्च पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों में, महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस कॉर्प्स की स्थापना की जड़ें 1779 में बंगाल में स्थापित स्टड विभाग में हैं, और इसे आधिकारिक रूप से 1960 में RVC नाम दिया गया। इसका आदर्श वाक्य है – “पशु सेवा अस्माकं धर्म:”, जो इसके मूल सेवा सिद्धांत को दर्शाता है।
महिला नेतृत्व का ऐतिहासिक क्षण
इस वर्ष RVC की टुकड़ी का नेतृत्व कैप्टन हर्षिता राघव करेंगी, जो 2023 में RVC में नियुक्त होने वाली पहली महिला अधिकारियों में से एक हैं। यह अवसर सेना की लैंगिक समानता की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। RVC में अधिकारी विशेष पशु चिकित्सा प्रशिक्षण के बाद शॉर्ट सर्विस कमीशन के रूप में नियुक्त होते हैं, जो इसकी विशिष्ट पेशेवर पहचान को दर्शाता है।
संचालनात्मक क्षमताओं का प्रदर्शन
इस बार की परेड में RVC की टुकड़ी में शामिल होंगे:
- बैक्ट्रियन ऊँट: जिन्हें लद्दाख के ठंडे रेगिस्तान में 15,000 फीट से अधिक ऊँचाई पर लॉजिस्टिक्स और गश्त में प्रयोग किया जाता है।
- स्थानीय जंस्कार पोनी: जो सियाचिन जैसे हिमालयी क्षेत्रों में टिकाऊपन और भार वहन में सक्षम हैं।
- सेना के प्रशिक्षित कुत्ते: जो विस्फोटक पहचान, ट्रैकिंग, युद्ध सहयोग और आपदा राहत कार्यों में लगे रहते हैं।
- शिकारी पक्षी (Raptors): जो RVC की विविध पशु क्षमताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- RVC को 1989 में राष्ट्रपति ध्वज से सम्मानित किया गया।
- बैक्ट्रियन ऊँट का प्रयोग वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर लॉजिस्टिक्स के लिए होता है।
- जंस्कार पोनी उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में गश्त और आपूर्ति में सहायता करती है।
- RVC की स्थापना 1779 में हुई, जिससे यह सेना की सबसे पुरानी शाखाओं में से एक है।
संचालनात्मक और मानवीय योगदान
RVC ने विश्व युद्धों, करगिल संघर्ष, और श्रीलंका में भारतीय शांति सेना मिशन जैसे प्रमुख अभियानों में भाग लिया है। हाल के वर्षों में यह वायनाड, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में आई बाढ़ जैसी आपदाओं में मानवीय सहायता भी प्रदान कर चुकी है। इसके अलावा RVC की भागीदारी सैन्य कूटनीति, संयुक्त राष्ट्र मिशनों और आपदा राहत में भी होती है।
RVC की यह ऐतिहासिक उपस्थिति हमें यह याद दिलाती है कि सेना और उनके साथ कार्यरत पशुओं के बीच का रिश्ता न केवल संचालनात्मक बल्कि संवेदनशीलता और समर्पण का प्रतीक भी है।