गणतंत्र दिवस 2026: कर्तव्य पथ पर दिखा भारतीय सेना का नया युद्ध कौशल और स्वदेशी शक्ति

गणतंत्र दिवस 2026: कर्तव्य पथ पर दिखा भारतीय सेना का नया युद्ध कौशल और स्वदेशी शक्ति

भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में इस बार परंपरागत औपचारिकता से अलग हटकर सैन्य यथार्थवाद और स्वदेशी युद्ध क्षमता का दमदार प्रदर्शन हुआ। कर्तव्य पथ पर पहली बार भारतीय सेना की नई युद्ध संरचनाएँ और स्वदेशी हथियार प्रणाली सार्वजनिक मंच पर प्रस्तुत हुईं, जिससे बदलती सैन्य रणनीति और भविष्य-केंद्रित दृष्टिकोण का स्पष्ट संकेत मिला।

भैरव कमांडो बटालियन: पारंपरिक और विशेष बलों की कड़ी

अक्टूबर 2025 में गठित ‘भैरव लाइट कमांडो बटालियन’ ने पहली बार सार्वजनिक रूप से परेड में भाग लिया। सिख लाइट इन्फेंट्री रेजीमेंट की यह 4 भैरव बटालियन पारंपरिक पैदल सेना और विशेष बलों के बीच रणनीतिक अंतर को पाटने के लिए बनाई गई है। यह बटालियन तेज, सटीक और उच्च तीव्रता वाले अभियानों के लिए प्रशिक्षित है—विशेषकर जटिल और विविध भूभागों में।

यह इकाई भारत की भविष्य-सिद्ध सेना की अवधारणा को मूर्त रूप देती है, जिसमें गति, लचीलापन और विशेष अभियानों की क्षमता प्रमुख भूमिका निभाते हैं।

सूर्यास्त्र रॉकेट सिस्टम: स्वदेशी तोपखाने की नई दिशा

भारत का पहला स्वदेशी यूनिवर्सल मल्टी-कैलिबर रॉकेट लॉन्चर सिस्टम ‘सूर्यास्त्र’ भी पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित हुआ। यह प्रणाली 150 से 300 किलोमीटर की दूरी तक सतह से सतह पर सटीक हमले करने में सक्षम है।

‘सूर्यास्त्र’ की विशेषता यह है कि यह एक ही लॉन्चर पर विभिन्न प्रकार की रॉकेट और मिसाइलों को एकीकृत कर सकता है, जिससे यह अलग-अलग युद्ध स्थितियों में अत्यधिक अनुकूलनीय बन जाता है। यह प्रदर्शनी तोपखाना आधुनिकीकरण की दिशा में भारत की आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनी।

युद्ध यथार्थवाद का सशक्त प्रदर्शन

इस वर्ष परेड में एक मिक्स्ड स्काउट्स टुकड़ी ने भी पहली बार भाग लिया, जो भारी थर्मल युद्ध पोशाक में सज्जित थी। इसका नेतृत्व 2 अरुणाचल स्काउट्स के लेफ्टिनेंट अमित चौधरी ने किया। यह टुकड़ी उन यूनिटों का प्रतिनिधित्व करती है जो ऊँचाई वाले सीमांत क्षेत्रों में निगरानी और टोही कार्यों में विशेषज्ञ हैं।

61 कैवेलरी ने पहली बार युद्ध पोशाक में मार्च किया, जो अब तक पारंपरिक वेशभूषा में ही परेड में हिस्सा लेती थी। सेना की अन्य टुकड़ियाँ भी ‘फेज्ड बैटल अरे’ संरचना में प्रदर्शित हुईं, जिससे वास्तविक युद्ध के मैदान में क्रमिक संचालन—जैसे टोही, रसद और आक्रमण—का अनुकरण किया गया।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भैरव बटालियन पारंपरिक इन्फेंट्री और विशेष बलों के बीच संचालनात्मक सेतु का कार्य करती है।
  • सूर्यास्त्र भारत का पहला स्वदेशी यूनिवर्सल मल्टी-कैलिबर रॉकेट लॉन्चर है।
  • फेज्ड बैटल अरे फॉर्मेशन युद्ध के मैदान में वास्तविक सैन्य संचालन को दर्शाता है।
  • 61 कैवेलरी ने पहली बार परंपरागत वेशभूषा की जगह युद्ध पोशाक में भाग लिया।

समारोह की थीम और अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति

समारोह की शुरुआत “विश्वगुरु भारत – एक भारत श्रेष्ठ भारत” विषय पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और 105 मिमी स्वदेशी लाइट फील्ड गन से 21 तोपों की सलामी दी गई।

इस बार यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन भी अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जिससे गणतंत्र दिवस को वैश्विक मंच पर विशेष मान्यता प्राप्त हुई।

यह समारोह भारतीय सेना की बदलती युद्ध संरचना, स्वदेशी सामर्थ्य और वैश्विक रणनीतिक दृष्टिकोण का जीवंत प्रदर्शन था—जहाँ परंपरा और प्रौद्योगिकी का संयोजन भारत को एक आत्मनिर्भर और युद्ध-तैयार राष्ट्र की छवि में प्रस्तुत करता है।

Originally written on January 27, 2026 and last modified on January 27, 2026.

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