गणतंत्र दिवस परेड 2026 में पहली बार पशु टुकड़ी की भागीदारी: सैन्य परंपरा और नवाचार का अनूठा संगम

गणतंत्र दिवस परेड 2026 में पहली बार पशु टुकड़ी की भागीदारी: सैन्य परंपरा और नवाचार का अनूठा संगम

भारत के गणतंत्र दिवस समारोह 2026 में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। 26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर होने वाली परेड में पहली बार भारतीय सेना की एक समर्पित पशु टुकड़ी (Animal Contingent) हिस्सा लेगी। यह पहल सेना की पारंपरिक विरासत और अत्यधिक दुर्गम क्षेत्रों में पशुओं की परिचालनिक भूमिका को दर्शाने वाली है। यह भागीदारी भारत के रक्षा तंत्र में मानव-पशु सहयोग के स्थायित्व और नवाचार दोनों का प्रतीक बनेगी।

गणतंत्र दिवस परेड में पहली पशु टुकड़ी की भागीदारी

2026 की परेड की प्रमुख विशेषता रिमाउंट एंड वेटरनरी कोर (RVC) द्वारा प्रस्तुत पशु टुकड़ी होगी। यह सुव्यवस्थित टुकड़ी सैनिकों के साथ मार्च करते हुए यह संदेश देगी कि आज भी पशु सेना की रसद, निगरानी और युद्ध सहयोग प्रणाली का अभिन्न अंग हैं। यह टुकड़ी न केवल सैन्य परंपरा को पुनर्स्थापित करेगी, बल्कि अत्यधिक ऊंचाई और दुर्गम क्षेत्रों में इनके संचालन की व्यावहारिकता को भी दर्शाएगी।

परिचालन में बैक्ट्रियन ऊँट और ज़ंस्कार टट्टू की भूमिका

टुकड़ी का नेतृत्व दो बैक्ट्रियन ऊँट करेंगे, जिन्हें हाल ही में लद्दाख के शीत मरुस्थलीय क्षेत्रों में सैन्य संचालन के लिए शामिल किया गया है। ये दो कूबड़ वाले ऊँट 15,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर, अत्यधिक ठंड में 250 किलोग्राम तक का भार ले जाने में सक्षम हैं और उन्हें पानी की कम आवश्यकता होती है। इनके साथ होंगे चार ज़ंस्कार टट्टू, जो लद्दाख के मूल निवासी और अत्यंत सहनशील पर्वतीय नस्ल के हैं। ये टट्टू माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी कार्य कर सकते हैं और 2020 से सियाचिन जैसे क्षेत्रों में सेना के अभियानों का हिस्सा हैं।

रैप्टर और सेना के कुत्ते: शक्ति गुणक (Force Multipliers)

इस पशु टुकड़ी में चार प्रशिक्षित रैप्टर भी शामिल होंगे, जो पक्षी टकराव नियंत्रण (bird-strike control) और हवाई निगरानी के लिए उपयोग किए जाते हैं। परेड की एक अन्य आकर्षण होंगे “साइलेंट वॉरियर्स” कहे जाने वाले सेना के कुत्ते। इनमें दस भारतीय नस्लों के सेना कुत्ते और छह पारंपरिक सैन्य नस्लें होंगी। मेरठ स्थित रिमाउंट एंड वेटरनरी कोर द्वारा प्रशिक्षित ये कुत्ते आतंकवाद विरोधी अभियानों, विस्फोटक पहचान, ट्रैकिंग, गश्त और आपदा राहत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • रिमाउंट एंड वेटरनरी कोर भारतीय सेना में उपयोग होने वाले पशुओं के प्रशिक्षण और प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है।
  • बैक्ट्रियन ऊँट शीत मरुस्थलीय क्षेत्रों के लिए उपयुक्त हैं और 15,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर संचालित किए जा सकते हैं।
  • ज़ंस्कार टट्टू लद्दाख की देशी नस्ल हैं और 2020 में सेना में शामिल किए गए थे।
  • सेना के कुत्तों को बहादुरी के लिए वीरता पुरस्कार भी मिल चुके हैं।

आम जनता के लिए परेड देखने की व्यवस्था

गणतंत्र दिवस परेड 2026 को प्रत्यक्ष रूप से देखने के इच्छुक दर्शकों को आधिकारिक सरकारी पोर्टलों के माध्यम से अग्रिम टिकट बुकिंग करनी होगी। पूर्व वर्षों के अनुभवों के आधार पर, टिकट बुकिंग जनवरी के पहले सप्ताह में रक्षा मंत्रालय द्वारा अधिसूचना जारी होने के बाद शुरू होने की संभावना है।

इस ऐतिहासिक पहल से स्पष्ट है कि भारतीय सेना आधुनिक तकनीक के साथ-साथ परंपरागत सामर्थ्य को भी समान महत्व देती है, और गणतंत्र दिवस परेड इस समन्वय का भव्य प्रदर्शन बनेगा।

Originally written on January 2, 2026 and last modified on January 2, 2026.

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