खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का भव्य समापन
छत्तीसगढ़ में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का समापन एक भव्य समारोह के साथ हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव तथा प्रसिद्ध खिलाड़ी मैरी कॉम और बाइचुंग भूटिया की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। यह आयोजन देशभर के आदिवासी खिलाड़ियों को एक मंच प्रदान करने और खेलों में समावेशिता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
अंतिम दिन के प्रमुख मुकाबले
समापन दिवस पर पुरुष फुटबॉल फाइनल और तीरंदाजी के कई महत्वपूर्ण मुकाबले आयोजित किए गए। फुटबॉल में पश्चिम बंगाल ने मेजबान छत्तीसगढ़ को 1-0 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। छत्तीसगढ़ ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक हासिल किया, जो घरेलू मैदान पर उनकी मजबूत उपस्थिति को दर्शाता है।
तीरंदाजी में उभरती प्रतिभाएं
तीरंदाजी प्रतियोगिताओं में कई खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। झारखंड की कोमालिका बारी ने महिला रिकर्व व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। वहीं नागालैंड ने महिला रिकर्व टीम स्पर्धा में शीर्ष स्थान हासिल किया। पुरुष वर्ग में ओडिशा के अर्जुन खरा ने व्यक्तिगत स्वर्ण जीता, जबकि झारखंड की टीम ने पुरुष टीम स्पर्धा में बाजी मारी, जिससे इस खेल में उनकी मजबूत पकड़ स्पष्ट हुई।
पदक तालिका और राज्यों की स्थिति
इन खेलों में कर्नाटक ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 23 स्वर्ण, 8 रजत और 7 कांस्य पदकों के साथ पहला स्थान हासिल किया। ओडिशा 21 स्वर्ण, 15 रजत और 21 कांस्य पदकों के साथ दूसरे स्थान पर रहा। झारखंड ने 16 स्वर्ण, 8 रजत और 11 कांस्य पदकों के साथ तीसरा स्थान प्राप्त किया। मेजबान छत्तीसगढ़ 3 स्वर्ण, 10 रजत और 6 कांस्य पदकों के साथ नौवें स्थान पर रहा।
भागीदारी और खेल विधाएं
इस आयोजन में लगभग 3,800 खिलाड़ियों ने भाग लिया, जो 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। प्रतियोगिताएं सात प्रमुख खेलों—तीरंदाजी, एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, तैराकी, भारोत्तोलन और कुश्ती—में आयोजित की गईं। इसके साथ ही मल्लखंभ और कबड्डी जैसे पारंपरिक खेलों को प्रदर्शन खेल के रूप में शामिल किया गया, जिससे भारतीय सांस्कृतिक विरासत को भी बढ़ावा मिला।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का उद्देश्य आदिवासी समुदायों में खेल प्रतिभा को प्रोत्साहित करना है।
- इस आयोजन में देशभर से 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खिलाड़ी शामिल हुए।
- कुल लगभग 3,800 खिलाड़ियों ने विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में भाग लिया।
- मल्लखंभ और कबड्डी जैसे पारंपरिक खेलों को प्रदर्शन खेल के रूप में शामिल किया गया।
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स ने यह सिद्ध किया कि भारत के आदिवासी क्षेत्रों में अपार खेल प्रतिभा मौजूद है, जिसे उचित मंच और अवसर मिलने पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सकती है। यह पहल न केवल खेल विकास को बढ़ावा देती है, बल्कि सामाजिक समावेश और सांस्कृतिक गौरव को भी सशक्त बनाती है।