खाद्य सुरक्षा सुधार की दिशा में बड़ा कदम: उर्वरक सब्सिडी भुगतान के लिए एकीकृत ई-बिल प्लेटफॉर्म लॉन्च
भारत सरकार ने लगभग ₹2 लाख करोड़ की वार्षिक उर्वरक सब्सिडी के डिजिटल भुगतान के लिए एकीकृत ई-बिल प्लेटफॉर्म की शुरुआत की है। यह पहल सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन में एक बड़े सुधार के रूप में देखी जा रही है, जो मैन्युअल और कागजी प्रक्रियाओं को समाप्त कर पूर्णतः डिजिटल वर्कफ्लो को अपनाती है। इस डिजिटल क्रांति का उद्देश्य पारदर्शिता, कार्यक्षमता और त्वरित भुगतान को सुनिश्चित करना है।
उर्वरक सब्सिडी प्रशासन में डिजिटल बदलाव
केंद्रीय उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा द्वारा इस ई-बिल प्रणाली का उद्घाटन नई दिल्ली में किया गया। यह मंच सब्सिडी भुगतान के लिए बिलों की भौतिक आवाजाही और मैन्युअल जांच की आवश्यकता को समाप्त करता है। अब उर्वरक कंपनियाँ अपने दावों को पूरी तरह से ऑनलाइन सबमिट कर सकती हैं, जिससे प्रक्रिया में लगने वाला समय और प्रशासनिक अड़चनें कम हो जाएंगी।
IFMS और PFMS का एकीकरण
यह प्रणाली उर्वरक विभाग की एकीकृत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (IFMS) और वित्त मंत्रालय की सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) के एकीकरण से विकसित की गई है। PFMS, जो कि महालेख नियंत्रक (Controller General of Accounts) के अधीन कार्य करता है, सरकार के भुगतान प्रणाली का केंद्रीकृत ढांचा प्रदान करता है। उर्वरक सचिव रजत कुमार मिश्रा ने इस पहल को विभाग के वित्तीय संचालन के आधुनिकीकरण की दिशा में एक मील का पत्थर बताया है।
रीयल-टाइम ट्रैकिंग और वित्तीय नियंत्रण
नई प्रणाली के माध्यम से बिलों की स्थिति को रीयल-टाइम में ट्रैक किया जा सकता है। इसमें केंद्रीकृत रिपोर्टिंग, छेड़छाड़-सुरक्षित डिजिटल ऑडिट ट्रेल और स्वचालित सत्यापन प्रणाली शामिल हैं। महालेख नियंत्रक संतोष कुमार के अनुसार, यह प्रणाली जवाबदेही बढ़ाने, निगरानी को सरल बनाने और वित्तीय अनुशासन को सुदृढ़ करने में सहायक होगी। हर क्रिया का डिजिटल लॉग तैयार होता है जिससे धोखाधड़ी की संभावना न्यूनतम हो जाती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत में उर्वरक सब्सिडी का प्रशासन रसायन और उर्वरक मंत्रालय के तहत उर्वरक विभाग करता है।
- PFMS सरकारी व्यय की प्रत्यक्ष भुगतान और निगरानी प्रणाली है।
- महालेख नियंत्रक (CGA) वित्त मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।
- डिजिटल ऑडिट ट्रेल पारदर्शिता और वित्तीय रिसाव को रोकने में सहायक होता है।
त्वरित भुगतान और उद्योग को लाभ
संयुक्त सचिव मनोज सेठी के अनुसार, ई-बिल प्रणाली ‘फर्स्ट-इन-फर्स्ट-आउट’ सिद्धांत पर काम करती है जिससे दावों के भुगतान में तीव्रता आती है, और साप्ताहिक सब्सिडी जारी करने जैसे सुधार संभव होते हैं। अब उर्वरक कंपनियाँ ऑनलाइन दावे प्रस्तुत कर सकती हैं, भुगतान की स्थिति को लाइव ट्रैक कर सकती हैं, और मैन्युअल फॉलो-अप से बच सकती हैं। इससे इस क्षेत्र में व्यवसाय करने में आसानी बढ़ेगी और सब्सिडी प्रशासन में व्यावसायिक दक्षता आएगी।
यह पहल डिजिटल इंडिया और ई-गवर्नेंस के विजन को बल देती है और देश के कृषि क्षेत्र की वित्तीय संरचना को अधिक पारदर्शी, कुशल और उत्तरदायी बनाती है।