खगोल विज्ञान में भारत की बड़ी छलांग: बजट 2026-27 में चार नई परियोजनाओं की घोषणा

खगोल विज्ञान में भारत की बड़ी छलांग: बजट 2026-27 में चार नई परियोजनाओं की घोषणा

केंद्रीय बजट 2026-27 में भारत की स्थलीय खगोल विज्ञान अवसंरचना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से चार प्रमुख परियोजनाओं की घोषणा की गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि ये पहलें सौर भौतिकी, गहरे अंतरिक्ष अवलोकन और वैज्ञानिक शिक्षा के क्षेत्र में भारत की क्षमताओं को मजबूती प्रदान करेंगी। इन सभी परियोजनाओं का संचालन बेंगलुरु स्थित भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) द्वारा किया जाएगा।

लद्दाख में दो राष्ट्रीय स्तर की दूरबीनें

लद्दाख के हनले क्षेत्र में दो अत्याधुनिक दूरबीनें स्थापित की जाएंगी। पहली, नेशनल लार्ज सोलर टेलीस्कोप (NLST), पेंगोंग झील के पास लगाई जाएगी। यह दो मीटर श्रेणी की ऑप्टिकल और निकट-अवरक्त दूरबीन होगी, जो सूर्य के चुंबकीय क्षेत्रों, सौर ज्वालाओं और कोरोना उत्सर्जनों का अध्ययन करेगी। यह ISRO के आदित्य-L1 मिशन के अवलोकनों को जमीनी समर्थन प्रदान करेगी।

दूसरी, नेशनल लार्ज ऑप्टिकल-इन्फ्रारेड टेलीस्कोप (NLOT), 10–12 मीटर की सबसे बड़ी ऑप्टिकल-अवरक्त दूरबीन होगी। यह दूरस्थ आकाशगंगाओं, तारों के निर्माण क्षेत्रों और एक्सोप्लैनेट्स के अध्ययन में सहायक होगी। हनले की स्वच्छ आकाश, कम नमी और न्यूनतम प्रकाश प्रदूषण की स्थिति इसे आदर्श खगोलीय स्थान बनाती है।

हिमालयन चंद्र टेलीस्कोप का उन्नयन

हनले में वर्ष 2000 से चालू हिमालयन चंद्र टेलीस्कोप को अपग्रेड करने का प्रस्ताव भी बजट में शामिल है। इस उन्नयन से इसकी वैज्ञानिक क्षमताएं बढ़ेंगी और यह परिवर्ती तारों, सुपरनोवा और सक्रिय आकाशगंगाओं के अनुसंधान में नई दिशा देगा। यह लद्दाख को भारत के प्रमुख खगोल विज्ञान केंद्र के रूप में और सुदृढ़ करेगा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • सभी चार परियोजनाएं भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) द्वारा संचालित की जाएंगी।
  • NLST सूर्य की चुंबकीय गतिविधियों और अंतरिक्ष मौसम पर केंद्रित होगी।
  • NLOT भारत की सबसे बड़ी ऑप्टिकल-अवरक्त दूरबीन होगी।
  • हनले क्षेत्र खगोल विज्ञान के लिए आदर्श स्थितियों वाला स्थान है।

आम जनता के लिए खगोलीय शिक्षा: कोसमॉस-2 प्लेनेटेरियम

बजट में अनुसंधान के साथ-साथ वैज्ञानिक जनजागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कोसमॉस-2 प्लेनेटेरियम एवं प्रशिक्षण केंद्र की भी घोषणा की गई है, जिसे आंध्र प्रदेश के अमरावती में स्थापित किया जाएगा। यह उन्नत डिजिटल प्रोजेक्शन तकनीक और इंटरैक्टिव प्रदर्शनों से युक्त होगा। यह पहल मैसूरु में विकसित हो रहे कोसमॉस-1 एलईडी डोम प्लेनेटेरियम की अगली कड़ी है।

इन परियोजनाओं से भारत न केवल खगोल विज्ञान अनुसंधान में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए सुसज्जित होगा, बल्कि आम जनता के बीच वैज्ञानिक चेतना भी सशक्त रूप से बढ़ेगी।

Originally written on February 1, 2026 and last modified on February 1, 2026.

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