कोलकाता के ऐतिहासिक बास्क्यूल ब्रिज के नवीनीकरण को केंद्र सरकार की मंजूरी

कोलकाता के ऐतिहासिक बास्क्यूल ब्रिज के नवीनीकरण को केंद्र सरकार की मंजूरी

केंद्र सरकार ने कोलकाता स्थित श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट के ऐतिहासिक बास्क्यूल ब्रिज के नवीनीकरण को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने लगभग 117.54 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को स्वीकृति प्रदान की। इस नवीनीकरण का उद्देश्य कई दशकों पुराने पुल को आधुनिक बनाना और कोलकाता डॉक सिस्टम के भीतर माल ढुलाई तथा वाहनों की आवाजाही को अधिक सुगम बनाना है। पूर्वी भारत के इस महत्वपूर्ण समुद्री केंद्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

नवीनीकरण परियोजना को स्वीकृति

बास्क्यूल ब्रिज के नवीनीकरण का प्रस्ताव श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट, कोलकाता द्वारा प्रस्तुत किया गया था। इस प्रस्ताव की समीक्षा डेलीगेटेड इन्वेस्टमेंट बोर्ड द्वारा की गई, जिसकी अध्यक्षता बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के सचिव ने की। 16 फरवरी 2026 को आयोजित बैठक में परियोजना का विस्तृत मूल्यांकन किया गया और इसके बाद इसे आधुनिककरण कार्यों के साथ आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी गई।

सागरमाला कार्यक्रम के तहत वित्तीय सहायता

इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत 117.54 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। इसके लिए लगभग 41 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता सागरमाला कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदान की जाएगी। सागरमाला कार्यक्रम भारत सरकार की प्रमुख पहल है जिसका उद्देश्य बंदरगाह आधारित विकास को बढ़ावा देना और देश के समुद्री बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाना है। इस सहायता से पुल के उन्नयन कार्य को तेजी से पूरा करने और बंदरगाह की लॉजिस्टिक क्षमता को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

ऐतिहासिक डबल-लीफ पुल का आधुनिकीकरण

बास्क्यूल ब्रिज लगभग छह दशक पहले वेगनर-बिरो ब्रिज सिस्टम्स एजी द्वारा निर्मित किया गया था। यह एक डबल-लीफ मूवेबल ब्रिज है, जिसका उपयोग जहाजों को गुजरने देने के लिए पुल के दोनों हिस्सों को ऊपर उठाने में किया जाता है, जबकि सामान्य समय में यह सड़क यातायात को भी संचालित करता है। नवीनीकरण के दौरान पुल की संरचना को मजबूत किया जाएगा और इसके इलेक्ट्रो-मैकेनिकल तंत्र को आधुनिक तकनीक से अपग्रेड किया जाएगा। इससे संचालन की सुरक्षा बढ़ेगी और माल व वाहनों की आवाजाही अधिक तेज और सुचारु हो सकेगी।

परियोजना का क्रियान्वयन

इस परियोजना के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी रेल विकास निगम लिमिटेड को सौंपी गई है, जो देश में बुनियादी ढांचा विकास में विशेषज्ञ सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है। निर्माण कार्य एच एंड एच फ्रेसीनेट कंपनी को दिया गया है। परियोजना पूरी होने के बाद कोलकाता डॉक सिस्टम की परिचालन क्षमता में सुधार होगा और बंदरगाह परिसर के भीतर माल ढुलाई और परिवहन की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सकेगी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • सागरमाला कार्यक्रम का उद्देश्य बंदरगाह आधारित विकास को बढ़ावा देना और समुद्री बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण करना है।
  • श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट, कोलकाता भारत का एकमात्र प्रमुख नदी आधारित बंदरगाह है।
  • बास्क्यूल ब्रिज एक ऐसा चलायमान पुल होता है जिसमें काउंटरवेट की मदद से पुल का हिस्सा जहाजों के गुजरने के लिए ऊपर उठाया जाता है।
  • कोलकाता डॉक सिस्टम पूर्वी भारत में माल ढुलाई के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री केंद्र है।

कुल मिलाकर, बास्क्यूल ब्रिज का नवीनीकरण कोलकाता बंदरगाह की दक्षता और आधुनिक समुद्री बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे माल परिवहन की प्रक्रिया अधिक तेज और सुरक्षित बनेगी तथा भारत के बंदरगाह आधारित विकास को नई गति मिलेगी।

Originally written on March 12, 2026 and last modified on March 12, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *