कोडगु जिले की जम्‍मा बाने भूमि पर रिकॉर्ड संशोधन: कर्नाटक सरकार का ऐतिहासिक कदम

कोडगु जिले की जम्‍मा बाने भूमि पर रिकॉर्ड संशोधन: कर्नाटक सरकार का ऐतिहासिक कदम

कर्नाटक सरकार ने कोडगु जिले (पूर्व में कूर्ग) की अनोखी भूमि व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कानूनी सुधार किया है। ‘कर्नाटक भूमि राजस्व (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2025’ को राज्यपाल थावरचंद गहलोत की स्वीकृति मिलने के बाद 7 जनवरी 2026 को अधिसूचित किया गया। यह संशोधन कोडगु की पारंपरिक “जम्मा बाने” भूमि व्यवस्था की जटिलताओं को हल करने और डिजिटल भू-लेख प्रणाली में इन्हें एकीकृत करने के उद्देश्य से लाया गया है।

क्या हैं जम्‍मा बाने भूमि?

जम्मा बाने भूमि कोडगु की विशिष्ट पैतृक भूमि व्यवस्था है, जो 17वीं से 19वीं शताब्दी के बीच कोडगु के राजाओं और बाद में ब्रिटिश शासन द्वारा स्थानीय परिवारों को सैन्य सेवा के बदले में दी गई थी। इनमें धान की नमीयुक्त खेती योग्य भूमि और ऊँचाई पर स्थित वनयुक्त क्षेत्र शामिल हैं, जिनमें से कई बाद में कॉफी बागानों में परिवर्तित हो गए। इस व्यवस्था में भूमि का स्वामित्व मूल ‘पट्टेदार’ के नाम पर दर्ज रहता था, भले ही वह पीढ़ियों बाद बदल चुका हो, जिससे उत्तराधिकार, बिक्री और ऋण जैसी प्रक्रियाओं में कानूनी समस्याएँ उत्पन्न होती थीं।

पुराने भूमि रिकॉर्ड की समस्याएँ

कोडगु क्षेत्र पहले “Coorg Land Revenue and Regulations Act, 1899” के अधीन था, जो 1964 में लागू हुए “कर्नाटक भूमि राजस्व अधिनियम” के बाद भी कई गैर-औपचारिक प्रावधानों के साथ चलता रहा। पंरपरागत रूप से जमीन के रिकॉर्ड मृत पूर्वजों के नाम पर ही रहते थे, जिससे वर्तमान स्वामियों को न तो बिक्री और न ही बैंक ऋण की सुविधा मिल पाती थी। भूमि परिवर्तन (mutation) में देरी और न्यायिक उलझनों ने इस समस्या को और बढ़ाया। हालांकि “चेक्केरा पूवैया बनाम कर्नाटक राज्य” जैसे कई मामलों में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कोडवा समुदाय की भूमि पर पारंपरिक स्वामित्व को मान्यता दी है।

संशोधन अधिनियम के प्रमुख बदलाव

2025 के संशोधन अधिनियम के अंतर्गत कर्नाटक भूमि राजस्व अधिनियम, 1964 की धारा 127 में एक नया उपखंड जोड़ा गया है। इसके तहत कोडगु जिले में तहसीलदारों को यह अधिकार दिया गया है कि वे जांच के उपरांत रिकॉर्ड ऑफ राइट्स (भूमि अधिकार रजिस्टर) में पुरानी गलतियों को सुधारें या अवैध प्रविष्टियों को हटाएँ। इस प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जांच और अपील की व्यवस्था भी रखी गई है, जिससे कानूनी वैधता के साथ उत्तराधिकारियों को उनका भूमि अधिकार प्राप्त हो सके।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • जम्मा बाने भूमि केवल कोडगु जिले की पैतृक भूमि प्रणाली है।
  • यह भूमि सैन्य सेवा के बदले कोडगु के राजाओं और ब्रिटिशों द्वारा दी गई थी।
  • कर्नाटक भूमि राजस्व (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत भूमि रिकॉर्ड में सुधार की प्रक्रिया को वैधानिक रूप दिया गया है।
  • तहसीलदारों को भूमि रिकॉर्ड दुरुस्त करने की कानूनी शक्ति दी गई है।

यह कानूनी संशोधन न केवल कोडवा समुदाय की सांस्कृतिक और आर्थिक विरासत की रक्षा करता है, बल्कि भू-राजस्व प्रणाली में पारदर्शिता, वैधता और डिजिटल समावेशन को भी मजबूत करता है। दशकों पुरानी समस्याओं का समाधान कर यह कदम कोडगु क्षेत्र के किसानों, भूमि स्वामियों और उत्तराधिकारियों को न्यायिक स्पष्टता और वित्तीय सुविधा की दिशा में सक्षम बनाएगा।

Originally written on January 17, 2026 and last modified on January 17, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *