कोच्चि बैकवाटर्स में पिस्टल श्रिम्प की नई प्रजाति की खोज

कोच्चि बैकवाटर्स में पिस्टल श्रिम्प की नई प्रजाति की खोज

कोच्चि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के औद्योगिक मत्स्य विद्यालय के शोधकर्ताओं ने कोच्चि के बैकवाटर्स में पिस्टल श्रिम्प की एक नई प्रजाति की पहचान की है। ‘अल्फियस मधुसूदनाई’ नामक यह प्रजाति अल्फीइडी परिवार से संबंधित है और इस क्षेत्र के मुहाना पारितंत्र से दर्ज की गई पहली अल्फीइड श्रिम्प मानी जा रही है। इस खोज को यूनाइटेड किंगडम की जर्नल ऑफ द मरीन बायोलॉजिकल एसोसिएशन में प्रकाशित किया गया है, जो इसकी वैज्ञानिक महत्ता को रेखांकित करता है।

मत्स्य विज्ञान के अग्रणी को समर्पित नामकरण

नई प्रजाति का नाम प्रोफेसर बी. मधुसूदन कुरुप के सम्मान में रखा गया है, जो केरल यूनिवर्सिटी ऑफ फिशरीज एंड ओशन स्टडीज के प्रथम कुलपति और देश के प्रमुख मत्स्य वैज्ञानिक रहे हैं। यह नामकरण समुद्री विज्ञान और मत्स्य अनुसंधान में उनके योगदान को श्रद्धांजलि स्वरूप किया गया है।

इस शोध का नेतृत्व प्रोफेसर एम. हरिकृष्णन ने किया, जिनके साथ के. पी. विष्णु, अभैकृष्णा यू और निधिन बी. एम. शामिल थे। शोधकर्ताओं ने इस प्रजाति की विशिष्ट पहचान की पुष्टि विस्तृत आकारिकी अध्ययन और आणविक विश्लेषण के माध्यम से की। इसे निकटवर्ती प्रजातियों से तुलना कर इसकी अलग पहचान स्थापित की गई।

मैंग्रोव पारितंत्र में पारिस्थितिक भूमिका

पिस्टल श्रिम्प, जिन्हें स्नैपिंग श्रिम्प भी कहा जाता है, अपने विशेष पंजे से तेज ध्वनि उत्पन्न करने की क्षमता के लिए प्रसिद्ध हैं। किंतु ध्वनि उत्पादन के अलावा इनका पारिस्थितिक महत्व भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

अल्फियस मधुसूदनाई मैंग्रोव से आच्छादित मुहाना क्षेत्रों में निवास करती है और प्रवाल भित्ति-समृद्ध पारितंत्रों से भी जुड़ी पाई गई है। यह प्रजाति बिल बनाने का व्यवहार प्रदर्शित करती है, जिससे दलदली मिट्टी में फंसी विषैली गैसें बाहर निकलती हैं। यह प्रक्रिया मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने और मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन में सहायक होती है।

भारत में अल्फीइडी परिवार पर सीमित अध्ययन

शोधकर्ताओं ने बताया कि भारतीय समुद्री जल में अल्फीइडी परिवार की जैव विविधता पर अभी भी सीमित अध्ययन हुआ है। इस नई प्रजाति की पहचान से स्पष्ट होता है कि मुहाना और तटीय पारितंत्रों में व्यवस्थित सर्वेक्षण की आवश्यकता है।

यह खोज न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि भारत के तटीय पारिस्थितिक तंत्र की समृद्ध जैव विविधता को भी उजागर करती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

* पिस्टल श्रिम्प अल्फीइडी परिवार से संबंधित होती हैं।
* अल्फियस मधुसूदनाई कोच्चि के मुहाना क्षेत्र से दर्ज की गई पहली अल्फीइड श्रिम्प है।
* मैंग्रोव पारितंत्र कार्बन अवशोषक और तटीय सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करते हैं।
* आधुनिक प्रजाति पहचान में आकारिकी और आणविक उपकरणों का उपयोग किया जाता है।

हालांकि इस प्रजाति का प्रत्यक्ष वाणिज्यिक महत्व नहीं है और यह कभी-कभी जाल में अनायास पकड़ी जाती है, फिर भी इसका पारिस्थितिक और वैज्ञानिक महत्व अत्यधिक है। विश्व स्तर पर स्नैपिंग श्रिम्प अपनी अनूठी जैव-ध्वनिक क्षमता और पारिस्थितिक अंतःक्रियाओं के कारण शोध का विषय रही हैं। कोच्चि बैकवाटर्स में इस खोज ने भारत के तटीय पारितंत्रों में निरंतर समुद्री अनुसंधान की आवश्यकता को और अधिक स्पष्ट कर दिया है।

Originally written on February 20, 2026 and last modified on February 20, 2026.

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