कोचीन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनेगा देश का पहला हाइड्रोजन बस संचालित एयरपोर्ट
कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (CIAL) भारत का पहला ऐसा हवाई अड्डा बनने जा रहा है जहाँ हाइड्रोजन चालित बसें यात्रियों के परिवहन के लिए तैनात की जाएँगी। यह पहल न केवल भारत में स्वच्छ गतिशीलता को बढ़ावा देने की दिशा में एक अग्रणी कदम है, बल्कि केरल सरकार की हरित ऊर्जा और कम-उत्सर्जन बुनियादी ढांचे की व्यापक रणनीति का भी हिस्सा है।
केरल हाइड्रोजन वैली पहल के अंतर्गत समझौता
यह परियोजना राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत केरल हाइड्रोजन वैली इनोवेशन क्लस्टर फाउंडेशन (Kerala-HVIC) और CIAL के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoA) का परिणाम है। यह समझौता केरल के विद्युत मंत्री के. कृष्णनकुट्टी और औद्योगिक मंत्री पी. राजीव की उपस्थिति में कोच्चि में संपन्न हुआ।
बसों की खरीद और वित्त पोषण ढाँचा
समझौते के अनुसार, कोचीन एयरपोर्ट पर तीन हाइड्रोजन ईंधन सेल विद्युत बसों का संचालन किया जाएगा। बसों की खरीद हेतु ₹2.90 करोड़ प्रति बस की सीमा में केरल-HVIC द्वारा वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। कुल परियोजना लागत ₹8.7 करोड़ निर्धारित की गई है, जिसे चरणबद्ध रूप से जारी किया जाएगा। बसों की खरीद अगले 12 महीनों के भीतर पूरी कर ली जाएगी।
संचालन की जिम्मेदारी और अधिकार
हाइड्रोजन चालित इन बसों का स्वामित्व CIAL के पास रहेगा, जो उनके संचालन, अनुरक्षण और वैधानिक व्यय की पूरी जिम्मेदारी भी उठाएगा। हवाई अड्डा प्रबंधन ही इन बसों के संचालन मॉडल, यात्री मार्ग और तैनाती रणनीति का निर्धारण करेगा, ताकि इन्हें मौजूदा परिवहन सेवाओं के साथ एकीकृत किया जा सके।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- CIAL भारत का पहला एयरपोर्ट बनेगा जहाँ हाइड्रोजन फ्यूल सेल बसें संचालित होंगी।
- परियोजना राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत आती है।
- प्रति बस ₹2.90 करोड़ की अधिकतम वित्तीय सहायता तय की गई है।
- केरल हाइड्रोजन वैली का उद्देश्य ग्रीन हाइड्रोजन के प्रायोगिक उपयोग को बढ़ावा देना है।
हरित ईंधन आपूर्ति और उत्सर्जन में कमी
यह परियोजना यात्रियों की सुविधा को बेहतर बनाने के साथ-साथ हवाई अड्डा परिवहन में कार्बन उत्सर्जन को कम करने में सहायक होगी। इन बसों को ऊर्जा देने वाला ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र CIAL और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया जा रहा है। इसके लिए आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियाँ पहले ही मिल चुकी हैं, जिससे यह परियोजना शीघ्र क्रियान्वयन के लिए तैयार है।
यह पहल केरल को भारत के अग्रणी हरित ऊर्जा अपनाने वाले राज्यों की पंक्ति में स्थापित करती है और स्वच्छ सार्वजनिक परिवहन के क्षेत्र में एक आदर्श मॉडल प्रस्तुत करती है।