कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए शिपकी ला मार्ग खोलने पर भारत–चीन वार्ता जारी
भारत सरकार ने संसद को जानकारी दी है कि कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए हिमाचल प्रदेश स्थित शिपकी ला दर्रे के माध्यम से एक नया मार्ग खोलने के विषय पर चीन के साथ संवाद जारी है। यह पहल न केवल श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ाने के उद्देश्य से की जा रही है, बल्कि भारत की धार्मिक-सांस्कृतिक कूटनीति का भी एक अहम हिस्सा है।
संसद में सरकार का बयान
लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए बेहतर मार्ग और सुविधाएं सुनिश्चित करना भारत सरकार की निरंतर प्राथमिकता रही है। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली बीजिंग के साथ निरंतर संवाद में है ताकि अधिक भारतीय श्रद्धालु इस आध्यात्मिक यात्रा का लाभ उठा सकें।
मौजूदा मार्ग और 2025 यात्रा का संचालन
2025 में यात्रा का सफलतापूर्वक आयोजन जून से अगस्त के बीच किया गया, जो लिपुलेख दर्रा (उत्तराखंड) और नाथू ला दर्रा (सिक्किम) के दो आधिकारिक मार्गों से सम्पन्न हुई। इस यात्रा का आयोजन उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और सिक्किम सरकारों के सहयोग और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के समन्वय से किया गया।
कोविड-19 और सीमा प्रतिबंधों के कारण कुछ वर्षों से रुकी हुई यह यात्रा अब सामान्य रूप से संचालित हो रही है।
शिपकी ला मार्ग और चीन की स्थिति
भारत सरकार ने पूर्व में शिपकी ला दर्रा के माध्यम से वैकल्पिक मार्ग खोलने का प्रस्ताव चीन को दिया था। यह दर्रा हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में स्थित है और भारत-चीन सीमा के पास आता है।
हालाँकि, चीन ने लॉजिस्टिक और संचालन संबंधी कठिनाइयों का हवाला देते हुए फिलहाल इस मार्ग को खोलने में असमर्थता जताई है। इसके बावजूद भारत इस प्रस्ताव पर लगातार विचार-विमर्श करता रहा है और यह विषय दोनों देशों के बीच संवाद में शामिल है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- कैलाश मानसरोवर यात्रा हिंदू, बौद्ध, जैन और बोन धर्मों के लिए अत्यंत पवित्र मानी जाती है।
- वर्तमान में दो आधिकारिक मार्ग हैं: लिपुलेख दर्रा (उत्तराखंड) और नाथू ला दर्रा (सिक्किम)।
- शिपकी ला दर्रा हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में स्थित है और यह भारत–चीन सीमा से सटा हुआ है।
- यात्रा को कोविड-19 और सीमा संबंधी कारणों से कुछ वर्षों के लिए स्थगित किया गया था।
श्रद्धालुओं के लिए सहायता और सुरक्षा उपाय
विदेश मंत्रालय द्वारा यात्रा स्व-वित्तपोषण (self-financing) पद्धति पर संचालित की जाती है, जिसमें परिवहन, आवास, भोजन, चिकित्सकीय परीक्षण और गाइड की सुविधा शामिल होती है।
मंत्रालय चीनी अधिकारियों और भारतीय एजेंसियों के साथ समन्वय कर यह सुनिश्चित करता है कि यात्रा सुरक्षित, सुविधाजनक और सुचारु हो। आपात स्थिति के लिए भारतीय क्षेत्र में हेलीकॉप्टर निकासी व्यवस्था भी उपलब्ध रहती है, जिससे ऊँचाई पर स्थित इस यात्रा मार्ग में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा सके।
कैलाश मानसरोवर यात्रा को और सुगम व समावेशी बनाने के प्रयास भारत की आध्यात्मिक परंपरा और सांस्कृतिक संवेदनशीलता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। नए मार्गों के विकल्प इस दिशा में एक सकारात्मक पहल साबित हो सकते हैं।