केरल बना पहला राज्य जिसने घोषित किया अपना ‘राज्य सूक्ष्मजीव’: बैसिलस सब्टिलिस को मिली आधिकारिक मान्यता
भारत में विज्ञान-आधारित विकास को प्रोत्साहित करते हुए केरल ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य ने “बैसिलस सब्टिलिस” (Bacillus subtilis) को अपना आधिकारिक राज्य सूक्ष्मजीव (State Microbe) घोषित कर दिया है। यह घोषणा थिरुवनंतपुरम में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पिनराई विजयन द्वारा की गई, जिससे केरल देश का पहला राज्य बन गया है जिसने किसी सूक्ष्मजीव को अपनी आधिकारिक पहचान का हिस्सा बनाया है।
बैसिलस सब्टिलिस: स्वास्थ्य और कृषि में सहायक जीवाणु
Bacillus subtilis एक प्रोबायोटिक बैक्टीरिया है जो मिट्टी, किण्वित खाद्य पदार्थों और मानव आंत में पाया जाता है। यह जीवाणु रोग नियंत्रण, पाचन स्वास्थ्य सुधार और कृषि उत्पादकता बढ़ाने में सहायक होता है। यह जैविक खाद, बायो-फर्टिलाइज़र और किण्वन उद्योगों में भी व्यापक रूप से उपयोग होता है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस जीवाणु पर आधारित उत्पादों से केरल की जैव-अर्थव्यवस्था को नया बल मिलेगा और राज्य के विज्ञान-आधारित नवाचार मॉडल को वैश्विक पहचान मिलेगी।
माइक्रोबायोम उत्कृष्टता केंद्र का उद्घाटन
इस अवसर पर Centre of Excellence in Microbiome (CoEM) को भी जनता को समर्पित किया गया। यह केंद्र केरल राज्य विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पर्यावरण परिषद (KSCSTE) के तहत कार्य करेगा और केरल विकास एवं नवाचार रणनीतिक परिषद (K-DISC) के सहयोग से स्थापित किया गया है।
CoEM देश का पहला ऐसा संस्थान है जो मानव स्वास्थ्य, पोषण, प्रतिरक्षा, कृषि, मत्स्य पालन और पर्यावरण संरक्षण जैसे विविध क्षेत्रों में माइक्रोबायोम आधारित अनुप्रयुक्त अनुसंधान को एक साथ समन्वित करता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- Bacillus subtilis एक प्रोबायोटिक बैक्टीरिया है, जिसका उपयोग स्वास्थ्य और कृषि में होता है।
- केरल पहला भारतीय राज्य है जिसने एक राज्य सूक्ष्मजीव की घोषणा की है।
- माइक्रोबायोम अनुसंधान में सूक्ष्मजीवों और उनके पर्यावरण के बीच संबंधों का अध्ययन किया जाता है।
- KSCSTE केरल में विज्ञान और प्रौद्योगिकी नीति की शीर्ष संस्था है।
सहयोग और भविष्य की दिशा
इस आयोजन के दौरान CoEM ने केरल स्टार्टअप मिशन और अमृता स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के साथ सहयोग ज्ञापन (MoUs) पर हस्ताक्षर किए। इसका उद्देश्य सहयोगी अनुसंधान, प्रौद्योगिकीय नवाचार, और व्यावसायिक अनुकूलता को बढ़ावा देना है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कड़कम्पल्ली सुरेंद्रन ने की, और वरिष्ठ वैज्ञानिकों व नीति विशेषज्ञों ने माइक्रोबायोम प्रौद्योगिकियों को ज्ञान-आधारित भविष्य की दिशा में केरल के अग्रणी कदम के रूप में रेखांकित किया।
यह पहल दर्शाती है कि कैसे सूक्ष्मजीवों पर आधारित अनुसंधान अब भारत के विकास मॉडल में एक केंद्रीय भूमिका निभा रहा है, और केरल इस क्षेत्र में राष्ट्रीय नेतृत्व कर रहा है।