केरल के उच्च पर्वतीय क्षेत्र में खोजा गया नया ऑर्किड: वेस्टर्न घाट की जैव विविधता को मिला नया उपहार
वेस्टर्न घाट की जैव विविधता को एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि मिली है, जब वैज्ञानिकों ने केरल के इडुक्की जिले के कंथल्लूर–मरायूर क्षेत्र में ऑर्किड की एक नई प्रजाति की पहचान की। यह खोज दक्षिणी वेस्टर्न घाट में स्थित इस क्षेत्र की वनस्पतिक समृद्धि और वैज्ञानिक महत्व को उजागर करती है। नई प्रजाति को “Diplozentrum papillosum” नाम दिया गया है और यह Diplozentrum वंश (genus) से संबंधित है, जो केवल दक्षिणी वेस्टर्न घाट तक सीमित है।
टैक्सोनॉमी और वैज्ञानिक वर्गीकरण
नई प्रजाति की वैज्ञानिक पत्रिका “Species” में औपचारिक रूप से प्रकाशन किया गया है। Diplozentrum वंश का भौगोलिक प्रसार अत्यंत सीमित है, जिससे यह खोज वर्गीकरण (taxonomy) और संरक्षण (conservation) दोनों दृष्टिकोणों से अत्यंत महत्वपूर्ण बन जाती है।
इस वंश की यह नई प्रजाति दुर्लभ और स्थानिक (endemic) होने के कारण भारत की जैव विविधता सूची में विशेष स्थान रखती है।
अद्वितीय शारीरिक विशेषताएँ
Diplozentrum papillosum की सबसे प्रमुख विशेषता है इसकी अविभाजित पुष्प गुच्छियाँ और गुलाबी-सफेद रंग के सुंदर फूल। इसके पंखुड़ियों की बनावट अन्य ज्ञात प्रजातियों से भिन्न है, जिससे इसकी पहचान सुनिश्चित की जा सकती है।
इसके फूलों में सुगंध और सौंदर्य दोनों ही मौजूद हैं, जिससे इसका सौंदर्यात्मक और पारिस्थितिकीय मूल्य और अधिक बढ़ जाता है।
आवास और पारिस्थितिक अनुकूलन
यह ऑर्किड चट्टानों (lithophytic) और पेड़ों की शाखाओं (epiphytic) पर उगता है। इसके मजबूत और विकसित जड़ें इसे तीव्र हवाओं वाले क्षेत्रों में भी जीवित रहने की क्षमता प्रदान करती हैं। यह इसकी कठोर पर्वतीय भू-भाग और जलवायु के अनुकूलन क्षमता को दर्शाता है।
इस प्रकार की अनूठी वृद्धि इसे वेस्टर्न घाट की पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुरूप ढलने वाला अत्यधिक अनुकूल पौधा बनाती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- Diplozentrum ऑर्किड वंश है जो केवल दक्षिणी वेस्टर्न घाट में पाया जाता है।
- “Diplozentrum papillosum” की खोज कंथल्लूर–मरायूर (इडुक्की जिला, केरल) क्षेत्र में हुई।
- यह प्रजाति lithophytic और epiphytic दोनों प्रकार की वृद्धि दिखाती है।
- वेस्टर्न घाट एक वैश्विक जैव विविधता हॉटस्पॉट के रूप में मान्यता प्राप्त क्षेत्र है।
अनुसंधान दल और वैज्ञानिक महत्व
इस खोज को अंजाम दिया डॉ. जोस मैथ्यू (SD कॉलेज, अलप्पुझा), मैथ्यू जोस मैथ्यू (जोناس ऑर्किडेरियम, वांडिपेरियार), ए. के. प्रदीप (रामापुरम) और सलीम पिचन (एम. एस. स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन, कलपेट्टा) की बहुविषयी टीम ने।
यह खोज वेस्टर्न घाट की अज्ञात जैव विविधता को उजागर करती है और यह संकेत देती है कि अभी भी इस क्षेत्र में नई प्रजातियों की खोज की अपार संभावनाएँ हैं। इसके साथ ही यह अनुसंधान वनस्पति अन्वेषण और पारिस्थितिक संरक्षण की निरंतर आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।