केरल की दुर्लभ गैलेक्सी मेंढक पर फोटोग्राफी का खतरा
भारत के पश्चिमी घाट की जैव विविधता विश्वभर में प्रसिद्ध है, और यहीं पाई जाने वाली एक अत्यंत दुर्लभ और आकर्षक प्रजाति है — गैलेक्सी मेंढक (Melanobatrachus indicus)। यह मेंढक अपनी काली चमकदार त्वचा पर नीले धब्बों और नारंगी चिह्नों के कारण रात के आकाश की तरह प्रतीत होता है। परंतु अब यह सुंदर जीव एक अनपेक्षित खतरे का सामना कर रहा है — अनैतिक वन्यजीव फोटोग्राफी।
गैलेक्सी मेंढक की विशेषताएँ
गैलेक्सी मेंढक पहली बार 1878 में वैज्ञानिक रूप से दर्ज किया गया था, लेकिन इसकी रहस्यमयी जीवनशैली के कारण इस पर बहुत कम अध्ययन हुए हैं। इसकी लंबाई केवल 2 से 3.5 सेंटीमीटर होती है और यह केवल पश्चिमी घाट के केरल स्थित नम जंगलों में सड़े हुए लकड़ियों के नीचे पाया जाता है। अधिकांश मेंढकों के विपरीत, यह प्रजाति संभोग कॉल नहीं करती। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह मेंढक अपनी विशिष्ट रंग-रूप के माध्यम से संवाद करता है, जिससे इसकी जनसंख्या और प्रजनन अध्ययन कठिन हो जाते हैं।
IUCN ने इस प्रजाति को ‘संकटग्रस्त (Vulnerable)’ की श्रेणी में रखा है, मुख्यतः इसके सीमित वितरण क्षेत्र, निवास स्थान की हानि और पर्यावरणीय असंतुलन के कारण।
हालिया अध्ययन के निष्कर्ष
दिसंबर 2025 में प्रकाशित एक अध्ययन (Herpetology Notes) में इस बात का खुलासा हुआ कि केरल के एक मॉनिटर किए गए वन क्षेत्र से गैलेक्सी मेंढकों की सात प्रजातियाँ गायब हो गईं। यह अध्ययन जूलॉजिकल सोसाइटी ऑफ लंदन और आरण्यकम नेचर फाउंडेशन के संरक्षणविद् पी. एस. ईसा द्वारा किया गया था।
मार्च 2020 में इन मेंढकों को खोजा गया था, लेकिन कोविड-19 के दौरान जब मानवीय गतिविधियाँ सीमित थीं, उसी अवधि में कई फोटोग्राफर इस स्थान पर पहुँच गए। 2021 और उसके बाद किए गए अध्ययन दौरे में मेंढक नहीं पाए गए, और अब उन्हें मृत माना जा रहा है।
अनैतिक फोटोग्राफी से कैसे हुआ नुकसान?
अध्ययन के अनुसार, फोटोग्राफरों ने सड़ी लकड़ियाँ पलट दीं, वनस्पति को रौंदा, मेंढकों को बिना दस्ताने के छुआ और घंटों तक तेज फ्लैश लाइट्स का इस्तेमाल किया। इन कार्रवाइयों से मेंढकों के सूक्ष्म आवास (microhabitat) में हस्तक्षेप हुआ, जिससे उनके भोजन और प्रजनन की प्रक्रिया बाधित हो गई।
विशेषज्ञों के अनुसार, उभयचर जीवों की त्वचा नम होती है, जिससे वे साँस लेते हैं। इनका शरीर तापमान और नमी के प्रति अत्यंत संवेदनशील होता है। इसके अतिरिक्त, मानव स्पर्श से रोगजनकों का संक्रमण भी हो सकता है, जिससे प्रजाति पर महामारी का खतरा मंडरा सकता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- गैलेक्सी मेंढक का वैज्ञानिक नाम Melanobatrachus indicus है।
- यह केवल केरल के पश्चिमी घाट में पाया जाता है।
- यह मेंढक संभोग कॉल नहीं करता, जिससे अध्ययन जटिल होता है।
- IUCN ने इसे Vulnerable प्रजाति के रूप में सूचीबद्ध किया है।
नैतिक फोटोग्राफी की आवश्यकता
अध्ययन ने प्राकृतिक और संरक्षण फोटोग्राफी के लिए नैतिक मानकों की सख्त आवश्यकता पर बल दिया है। इनमें शामिल हैं — जानवरों को न छूना, फ्लैश का सीमित उपयोग, सूक्ष्म आवास को न बिगाड़ना, और फोटोग्राफरों व गाइड्स को उचित प्रशिक्षण देना। संरक्षणविदों ने चेतावनी दी है कि गैलेक्सी मेंढक जैसी सीमित वितरण वाली दुर्लभ प्रजातियाँ मनुष्य की बार-बार की दखलअंदाज़ी से समाप्त हो सकती हैं, भले ही वह दखल प्रशंसा के इरादे से ही क्यों न हो।
गैलेक्सी मेंढक की कहानी हमें इस बात की याद दिलाती है कि सुंदरता की खोज में भी हमें प्रकृति की सीमाओं और संतुलन का ध्यान रखना होगा।