केरल की ग्रेफीन नीति: उन्नत प्रौद्योगिकी उद्योग की ओर बड़ा कदम
केरल ने भारत की पहली व्यापक ग्रेफीन नीति को मंजूरी देकर स्वयं को उन्नत सामग्रियों के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। ग्रेफीन को “वंडर मटेरियल” कहा जाता है, क्योंकि यह असाधारण मजबूती, उच्च विद्युत चालकता और लचीलेपन जैसी विशेषताओं से युक्त है। यह नीति राज्य की दीर्घकालिक आर्थिक विकास रणनीति में उच्च-प्रौद्योगिकी उद्योगों के समावेशन का संकेत देती है।
ग्रेफीन पार्क और औद्योगिक प्रोत्साहन
इस दिशा में प्रारंभिक कदम के रूप में केंद्र सरकार ने “ग्रेफीन पार्क” को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य ग्रेफीन आधारित नवाचार और विनिर्माण को गति देना है। राज्य सरकार पलक्कड़ में एक समर्पित ग्रेफीन औद्योगिक पार्क स्थापित करने की योजना बना रही है। इसके साथ ही ₹200 करोड़ के निवेश से एक डिजिटल इनोवेशन सेंटर भी विकसित किया जाएगा।
निवेश आकर्षित करने के लिए केरल सरकार सरकारी प्रबंधित औद्योगिक पार्कों में स्थापित विनिर्माण इकाइयों को लीज भुगतान पर 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी देगी। यह पहल घरेलू और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए प्रवेश बाधाओं को कम कर प्रतिस्पर्धी पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने का प्रयास है।
अनुसंधान और उद्योग के बीच सेतु
ग्रेफीन नीति का प्रमुख उद्देश्य अकादमिक अनुसंधान और औद्योगिक अनुप्रयोग के बीच की दूरी को कम करना है। राज्य ऑक्सफोर्ड और मैनचेस्टर विश्वविद्यालय जैसे वैश्विक संस्थानों के साथ सहयोग को प्रोत्साहित कर नवाचार क्षमता को सुदृढ़ करना चाहता है।
विश्वविद्यालयों, अनुसंधान केंद्रों और उद्योग इकाइयों के बीच एकीकृत मूल्य श्रृंखला विकसित कर प्रयोगशाला से व्यावसायिक उत्पादन तक की प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा। इससे प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा मिलेगा, स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन मिलेगा और उच्च-कौशल रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
आर्थिक दृष्टि और औद्योगिक रणनीति
राज्य सरकार का मानना है कि उभरते क्षेत्रों में निवेश दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करेगा। गरीबी उन्मूलन, आवास और स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रगति का हवाला देते हुए सरकार ने नीति निरंतरता पर जोर दिया है। उद्योग मंत्री पी. राजीव ने विश्वास व्यक्त किया है कि राज्य बजट 2026 औद्योगिक विकास को नई गति देगा और उद्योग विभाग के प्रस्तावों को मजबूती प्रदान करेगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
* ग्रेफीन कार्बन परमाणुओं की एकल परत है, जो षट्कोणीय संरचना में व्यवस्थित होती है।
* इसमें उच्च विद्युत चालकता, तन्य शक्ति और तापीय स्थिरता पाई जाती है।
* वर्ष 2004 में मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पहली बार ग्रेफीन को पृथक किया था।
* ग्रेफीन का उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा भंडारण, समग्र पदार्थ और जैव-चिकित्सा उपकरणों में किया जाता है।
ग्रेफीन नीति के माध्यम से केरल उच्च-प्रौद्योगिकी और नवाचार-आधारित औद्योगिक विकास को गति देना चाहता है। उन्नत सामग्रियों, अनुसंधान सहयोग और निवेश प्रोत्साहन के संयोजन से राज्य वैश्विक तकनीकी परिदृश्य में अपनी स्थिति सुदृढ़ करने और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।